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ताऊते ने पाली को दे ही दिया जख्म:20 मई को घर आना था, 22 को एक का शव आया, दूसरा 6 दिन बाद भी लापता

पाली24 दिन पहले
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पप्पूराम का शव पहुंचने पर दोनों बच्चे भी बिलख उठे। - Dainik Bhaskar
पप्पूराम का शव पहुंचने पर दोनों बच्चे भी बिलख उठे।

किसी को पता नहीं था कि ताऊते चक्रवात किसी का हंसता खेलता घर उजाड़ देगा। हादसा मुंबई में हुआ, लेकिन उसका असर पाली तक पहुंच गया। मुंबई में ओएनसीजी के जहाज पर काम करने वाले सालरिया गांव के दो भाई भी चक्रवात के शिकार हो गए। इनमें से एक भाई का शव मिलने के बाद शनिवार को गांव पहुंच गया, जबकि दूसरा भाई अभी लापता है। दोनों भाई 20 मई को गांव आने वाले थे, लेकिन 17 मई को यह हादसा हो गया।

पप्पूराम का शव शनिवार दोपहर करीब 1 बजे मुंबई से एंबुलेंस के जरिये सालरिया गांव पहुंचा, जहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं अमराराम को लेकर अभी भी परिवार के साथ-साथ ग्रामीण यही प्रार्थना कर रहे हैं कि वह सही सलामत घर लौटे। जानकारी के अनुसार रानी के समीप सालरिया गांव निवासी उदाराम मेघवाल के दाे बेटे अमराराम (40) और छोटा भाई पप्पूराम (32) मजदूरी करने के लिए काफी समय पहले ही मुंबई चले गए थे। अमराराम सुपरवाइजर था।

वह 15 साल से वहीं काम कर रहा था। वहीं पप्पूराम वेल्डरमैन था। वह भी 10 साल से काम कर रहा था। वे दाेनाें वहां ओएनजीसी के अधीन आने वाले जहाजाें पर मजदूरी करते थे। 17 मई को दोनों बार्ज पी-305 जहाज पर 216 लोगों के साथ सवार थे। चक्रवात में यह जहाज डूब गया। जहाज से अब तक 188 लोगों को सलामत निकाला जा चुका है।

60 शव भी रेस्क्यू कर निकाले गए हैं। वहीं, इस तूफान में सालरिया के दाेनाें भाई भी खो गए। इसमें से पप्पूराम का शव तो मिल गया, लेकिन अमराराम की तलाश जारी है। इसी जहाज पर उदाराम मेघवाल के दोनों बेटे हादसे के समय सवार थे। पप्पूराम का शव रेस्क्यू के दौरान मिल गया, लेकिन अब तक अमराराम के बारे में किसी भी तरह की जानकारी नहीं मिल पाई है।

मुंबई में समुद्र से लोगों को निकालने का रेस्क्यू अभी जारी है।
मुंबई में समुद्र से लोगों को निकालने का रेस्क्यू अभी जारी है।

पिता और पत्नियां बेसुध, दोनों भाइयों के 4 बेटे,परिवार की यही आस, अमराराम कुशल लौट आए
दोनों भाई 20 मई को अपने घर आने वाले थे। घर में खुशी का माहौल था, लेकिन 17 मई की शाम को ते तूफान के कारण दोनों भाइयों लापता होने की खबर से घर में कोहराम मच गया। दोनों के बच्चे तो अब भी हादसे से बेखबर से हैं। वृद्ध उदाराम के दो पुत्र व दो पुत्रियां हैं। दाेनाें भाई मुंबई तफान में फंस गए।

इसमें एक के बारे में अभी भी पता नहीं चल रहा है। ऐसे मे वृद्ध पिता तथा उसकी दोनों बेटियों का राे-राेकर बुरा हाल हाे रहा है। अब इस परिवार काे पालने की जिम्मेदारी भी वृद्ध पिता उदाराम मेघवाल के कंधों पर आ गई है। ग्रामीणाें का कहना है कि हादसे के बाद अमराराम की पत्नी गवरी देवी और पप्पूराम की पत्नी विद्यादेवी भी बेसुध हाे गई हैं। दाेनाें भाइयाें के कुल 4 बेटे हैं। अमराराम के अर्जुन (11) और भावेश (6) दो बेटे हैं। वहीं, पप्पूराम के भी हिमांशु (8) व कुणाल (3) दो बेटे हैं।

मुंबई में जहाज पर पप्पूराम। (फाइल फोटो)
मुंबई में जहाज पर पप्पूराम। (फाइल फोटो)
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