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पाेस्ट मानसून की बारिश:25 किमी रफ्तार से चली हवा, बारिश के साथ 15 बार गिरी बिजली, शहरवासी सहमे

पाली8 दिन पहले
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क्षेत्र में तेज गर्जना के साथ हुई बारिश। इस दौरान प्रताप चाैक पर पानी बहने लगा
  • जिले में आज भी बरसात की संभावना, दिन व रात के तापमान में गिरावट
  • अरब सागर में कम दबाव से जिले में बारिश, देर रात तक रुक-रुककर होती रही बरसात

अरब सागर में बन रहे दबाव का असर शनिवार काे जिले पर दिखाई दिया। सवेरे से ही आकाश में बादल छा गए तथा दाेपहर बाद बिजली की कड़कड़ाहट के साथ बारिश का दाैर शुरू हाे गया। यह आधे घंटे से अधिक समय तक चलता रहा। इसके बाद रात काे एक बार फिर बारिश का दाैर शुरू हुआ।

यह देर रात तक चलता रहा। वहीं शहर सहित आसपास के क्षेत्र में 15 बार से अधिक बार आकाशीय बिजली गिरने से शहरवासी सहम गए। इस बारिश के बाद दिन व रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री ताे न्यूनतम तापमान 17.2 डिग्री पर पहुंच गया। वहीं 25 किमी की रफ्तार से तेज हवा चली। इस कारण से कई स्थानों पर पेड़ गिर गए व बिजली भी गुल हो गई।

गांव सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में शनिवार को शाम 5 बजे रिमझिम बारिश का दौर शुरू हुआ। दिनभर तेज गर्मी के कारण लोग परेशान रहे। दोपहर बाद काले घने बादल छाने लगे और बादल गरजने लगे। दोपहर के बाद रिमझिम बारिश का दौर शुरू हुआ, जो देर शाम तक चलता रहा। बरसात होने से घरों के परनालों से भी पानी बहने लगा।

इसलिए, गिरी आकाशीय बिजली
आम तौर पर विक्षोभ हवा के साथ कम दबाव के क्षेत्र की तरफ मूव करते हैं, लेकिन अक्सर बड़े क्षेत्र में अचानक वायुदबाव कम रहने और स्थिर हो जाने पर सिस्टम रुक जाता है और अपनी ताकत तेज़ी से खोने लगता है। जिसके परिणामस्वरूप भारी बारिश और लगातार कई देर तक जबरदस्त बिजली कड़कने औऱ गिरने की घटनाएं होती है। पाली में शाम काे ज़मीनी सतह से ऊपर हवा नहीं थी, जिस वजह से ये सिस्टम शहर पर करीब 30 मिनट से ज्यादा समय सक्रिय रहा और इस दौरान 15 बार बिजली गिरने का अनुमान है।

इसलिए बदला माैसम

बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवातीय परिसंचरण को दक्षिण भारत में अरब सागर से आ रही हवाओं से काफी मात्रा में नमी मिली है। इसके फलस्वरूप दक्षिण भारत मे कई जगह भारी वर्षा हुई है। माैसम विशेषज्ञ नीलेश पुराेहित ने बताया कि बंगाल की खाड़ी से आए साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने पश्चिम में आगे बढ़ते हुए सागर से आ रही नमी के साथ काफी इंटरेक्ट किया, जिस वजह सिस्टम कमज़ोर तो रहा लेकिन काफी मात्रा में पानी बरसा।

यह इंटरेक्शन एल शेप में होता है, इस वजह से मुंबई, पुणे समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में तूफानी बारिश हुई। अब यह सिस्टम कम दबाव की तरफ मुंबई से आगे समुद्र की तरफ चल पड़ा है और आगे ओमान के निकट सल्लाह की खाड़ी तक जाएगा। अरब सागर से आ रही हवाएं कच्छ भुज के रास्ते यह पाली जिले तक पहुंची। इस कारण से जिले में बारिश हाे रही है।

रबी की फसल के लिए उपयाेगी बारिश

फायदा

नवरात्रा की स्थापना के साथ ही किसान खेतों में रबी की फसल की बुवाई शुरू कर देते हैं। ऐसे में यह बारिश रबी की फसल के लिए बहुत ही उपयाेगी साबित हाेगी। इस बारिश से खेतों में नमी व आर्द्रता बढ़ेगी। इससे अंकुरित बीज जल्दी बाहर आ सकेगा। यह बारिश सिंचाई के लिए एक पाण का काम करेगी।

नुकसान

खरीफ की फसल खेतों में पड़ी है। इसके चलते इस बारिश से कटी हुई फसल भीग गई। वहीं तिलहन कटने के बाद खेतों में ही पड़ी है। इससे सबसे बड़ा नुकसान तिलहन की फसल काे हाेगा। साथ ही ज्वार भीग जाने से काली पड़ जाएगी। इससे बाजार में भाव नहीं मिलेंगे।

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