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ठग्स ऑफ पीसीसीबी:मजदूर व सब्जी व्यापारी को देते थे लोन का झांसा, एक फाइल पर 2 से 3 लाख तक बनाते कमीशन

पाली2 महीने पहले
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  • खाली प्लॉट दिलवाने और मकान बनवाने का झांसा देकर लोन की पूरी फाइल तैयार करता

पीसीसीबी होमलोन घोटाले में ब्रांच मैनेजर, एमडी, चेयरमैन से लेकर लोन कमेटी से जुड़े प्रत्येक अधिकारी की आपस की चेन थी। खुद को पीसीसीबी का एजेंट बताने वाले भरत पालीवाल ग्राहक लेकर आता और खाली प्लॉट दिलवाने और मकान बनवाने का झांसा देकर लोन की पूरी फाइल तैयार करता।

इसके बाद शाखा प्रबंधक के निर्देश पर फर्जी भौतिक सत्यापन हाेता और फाइल लोन कमेटी में पेश होती। लोन की स्वीकृति मिलने के बाद लोनधारक के खाते में राशि भी जमा हो जाती। भरत पालीवाल पहले ही लोनधारक से हस्ताक्षरयुक्त खाली चेक जमा कर लेता और लोन की राशि अपने खाते में जमा भी करवा लेता।

खास बात यह है कि आपसी सांठगांठ से लोन की राशि भी 10 से 30 दिन के भीतर लोनधारक के खाते में आ जाती। राशि आने के बाद पहले भू-माफियाओं को प्लॉट की रकम अदा करने के साथ शाखा प्रबंधक, एमडी व अन्य अधिकारियों को राशि भी पहुंचा दी जाती।

भरत पालीवाल ने हाथ ठेले वालों, मिल के मजदूराें, सब्जी व अन्य छोटे कार्य करने वालाें को ग्राहक बनाता था। प्लॉट पर मकान बनाने का झांसा देकर उनके सारे दस्तावेज तैयार करता। खाली प्लॉट पर मकान बनवाने का काम शुरू नहीं होने पर कारण पूछते तो लोन की राशि नहीं आने का हवाला भी देता। कई मामलों में लोगों को अपने प्लॉट के बारे में कोई जानकारी भी नहीं थी।

होमलोन व मोरगेज लोन की 4 साल में कुल 556 फाइलें, जांच सिर्फ 63 की
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पीसीसीबी में होम लोन घोटाले की जांच सिर्फ 63 फाइलों की ही हुई है, जबकि वर्ष 2014 से 18 तक 4 साल में होमलोन व मोरगेज लोन की कुल 556 फाइलें हैं। इसमें से 63 फाइलों की जांच में 40 प्रतिशत ज्यादा मिला है। जांच रिपोर्ट में लोन भी लक्ष्य से 4 से 5 गुना ज्यादा देने से बैंक डूबने की पूरी संभावना जताई गई थी।

एक फाइल पर लेते थे 2 से 3 लाख तक का कमीशन
पीसीसीबी की लक्ष्मी मार्केट शाखा, सूरजपोल शाखा व रेलवे स्टेशन शाखा के तीनों मैनेजर होमलोन की फाइलों पर दलालों से कमिशन लेते थे। प्रत्येक फाइल पर 2 से 3 लाख रुपए लेने और यह राशि लोन की पहली किश्त जारी होने के बाद देने के बाद दूसरी किश्त जारी होती थी। दलाल पहली किश्त से मिलने वाली राशि अधिकारियों में बांटने के बाद दूसरी व तीसरी किश्त की राशि खुद हड़प लेता था।

अध्यक्ष-एमडी सहित तीन ने पेश नहीं किए जवाब

कोर्ट ने राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 के तहत सभी 21 अधिकारियों व पदाधिकारियों को अपना पक्ष व जवाब प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया गया, लेकिन अध्यक्ष पुष्पेंद्रसिंह कुड़की, प्रबंध निदेशक भवानीसिंह कविया व योगेश पाठक ने जवाब पेश नहीं किया।

इस मामले में कोर्ट ने सभी जवाब नोटिस पेश करने के बावजूद भी उपस्थित नहीं होने पर दोषी करार दिया है। वहीं काेर्ट ने जितेंद्रसिंह पुत्र लादूसिंह एवं वर्षा कंवर पत्नी जितेंद्रसिंह के प्रकरण में सेवानिवृत्त बाबूलाल राठौड़ द्वारा भौतिक सत्यापन नहीं करने पर 1 लाख 58 हजार 625 रुपए कम किए हैं। यह राशि भौतिक सत्यापन करने वाले शाखा प्रबंधक एफआई रिपोर्टकर्ता हाजी मोहम्मद व अभिषेक सांदू से वसूली जाएगी।

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