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पहल:कृषि वैज्ञानिक किसानों को ऑनलाइन दे रहे सेंजना फली की किस्मों और इसकी उपयोगिता की जानकारी

सिरोही4 महीने पहले
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  • कृृषि वैज्ञानिकों ने बताया : पौष्टिकता से भरी है सेंजना की फली
  • इससे कुपोषण का भी होता है समाधान, आयुर्वेद में भी होता है इसका उपयोग

वैश्विक महामारी कोविड-19 को लेकर पूरे देश में हर वर्ग प्रभावित हो रहा है। लॉक डाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की पालना को लेकर सिरोही के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अब किसानों को फोन कॉल और वाट्सएप के जरिए खेती के तरीके और फसलों की जानकारी ऑन लाइन ही दे रहे है। केवीके प्रभारी डॉ. एमएस चांदावत ने बताया की सेंजना पौष्टिकता से भरपूर बहुउद्देशीय वृक्ष है। सेंजना के वृक्ष का प्रत्येक भाग किसी न किसी रूप में मनुष्यों एवं जानवरों की ओर से खाया अथवा उपयोग में लाया जाता है। आयुर्वेद में सेंजना का उपयोग प्राचीन समय से चला आ रहा है।

पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण इससे विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाए जाने लगे है। यदि इस पौधे का प्रत्येक घर या परिवार में उपयोग किया जाए तो यह कुपोषण की समस्या का समाधान करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इन दिनों सहंजना की फूलों वाली टहनियां बाजारों में आसानी से देखने को मिल जाती है। इसकी फलियों में अन्य सब्जियों व फलों की तुलना में विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, एमीनो एसिड व खनिज पदार्थ अधिक होते है। इसकी पत्तियां व फूलों में भी विटामिन बी, सी व बीटा कैरोटीन, मैंगनीज तथा प्रोटीन पाया जाता है। फलियों के बीजों से प्राप्त तेल में जैतून के तेल से भी ज्यादा प्रभावशाली गुण होते है।
सेंजना की फलियों में है पोषक तत्वों का मिश्रण

  • विटामिन ‘सी’ 120 मिली ग्राम
  • कैरोटीन 110 मिली ग्राम
  • फॉस्फोरस 110 मिली ग्राम
  • मैग्निशियम 28 मिली ग्राम
  • पोटेशियम 259 मिली ग्राम
  • सल्फर 137 मिली ग्राम
  • क्लोरीन 423 मिली ग्राम

अनुसंधान केंद्रों ने विकसित की है उन्नत किस्में
सेंजना की उन्नत किस्में कृषि विश्व विद्यालयों, अनुसंधान केन्द्रों, आईसीएआर अनुसंधान केन्द्रों की ओर से विकसित की गई।

  • रोहित-1 : पौधारोपण के 4 से 6 महीने के बाद ये उत्पादन शुरू कर देता है और 10 साल तक व्यावसायिक उत्पादन होता रहता है। (एक साल में दो फसल)। सेंजना की फली गहरे हरे रंग की 45 से 60 इंच की होती है। इसकी गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है। एक पौधे से 40 से 135 फली मिल सकती है, जो करीब तीन से दस किलो तक की होती है।
  • पीकेएम-1: यह किस्म बीज द्वारा प्रसारित की गई हैं। यह किस्म उद्यान अनुसंधान केंद्र, (तमिलनाडू कृषि विश्वविद्यालय) ने विकसित की है। पौधे की ऊंचाई 4-6 मीटर होती हैं। इस किस्म में फूल 90-100 दिन बाद में पौध रोपण के पश्चात आतें है। प्रथम बार फलियों की तुड़ाई पौध रोपण के 160 से 170 दिन बाद करनी चाहिए। प्रति पौधा प्रतिवर्ष 200-225 फलियां मिलती हैं।
  • पीकेएम-2 : यह किस्म बीज से प्रसारित की गयी हैं। इस किस्म को उद्यान तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गयी। इसकी फलियों की लंबाई 125-130 सेमी जो अधिक मुलायम व स्वादिष्ट होती है। यह किस्म अधिक घरेलू उपयोग के काम आती है।
  • ओडीसी-3 : इसकी बुवाई के 3-4 महीने के भीतर फूल आते है और 6 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाता है। फली 2 फीट से 2.5 फीट लंबी होती है। किस्म की औसत उपज 30 किग्रा(वृक्ष होती है) एक वर्ष में दो बार फूल (एक वर्ष में 4-4 महीने उपज) किस्म का अच्छा रंग और मध्यम आकार इसलिए बाजार की मांग अधिक होगी।

किसानों बताया इसका बगीचा लगाने का तरीका और खाद की जानकारी
सेजंना का बगीचा लगाते समय खेत को 3-4 बार तवा हल से जुताई करनी चाहिए। उसके बाद खेत को समतल कर लेना चाहिए। सेजंना के खेत में पौधे लगाने के बाद पानी का भराव नहीं होना चाहिए यदि ऐसा हैं। तो जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। जब खेत पूरी तरह तैयार हो जाय उसके बाद निश्चित दूरी पर पौधों को लगाना चाहिए। किसानों को बताया कि अच्छी वानस्पतिक बढ़वार के लिए जब पौधे 75 सेमी ऊंचाई हो जाए उस समय 100 ग्राम यूरिया, 100 ग्राम सुपर फास्फेट तथा 50 ग्राम म्युरटे ऑफ पोटास प्रति पौधा देना चाहिए। उसके बाद सिंचाई कर देना चाहिए।

  • सिरोही के किसानों को फोनकॉल एवं व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से फल पौध की उपलब्धता जान रहे है। उन्होंने ने बताया कि सेंजना की उपयोगिता व नई खेती को सिरोही जिले मे बढावा देने के लिए सेंजना की दो किस्में पीकेएम-1 व ओडीसी-3 किसान को उपलब्ध कराई जा रही है।

- कामिनी पाराशर,  उद्यान वैज्ञानिक, केवीके, सिरोही

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