खेतीबाड़ी:खरीफ प्याज पर प्रक्षेत्र दिवस, बताए मुनाफा कमाने के तरीके

सिरोहीएक महीने पहले
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खरीफ प्याज पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन कालंद्री में किसान भरत हिरागर के खेत पर किया गया। - Dainik Bhaskar
खरीफ प्याज पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन कालंद्री में किसान भरत हिरागर के खेत पर किया गया।
  • खरीफ प्याज दिसंबर-जनवरी में हो जाता है तैयार और इस समय आपूर्ति भी कम होती है, जिससे मुनाफा संभव

कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर की ओर से संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र सिरोही अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन में दिए गए खरीफ प्याज पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन कालंद्री में किसान भरत हिरागर के खेत पर किया गया। इस मौके केन्द्र के प्रभारी डॉ. एमएस चांदावत ने किसानों को कृषि विज्ञान केन्द्र की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। डॉ. चांदावत ने बताया कि उन्नत किस्मों के अभाव में किसानों को आशातीत लाभ नहीं मिल पाता है। इसलिए जहां तक हो सके अधिक उपज देने वाली किस्म जो कि क्षेत्र विशेष के सिफारिश की गई हो की बुवाई करें।

केन्द्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ. आभा पाराशर ने कार्यक्रम के बारे में बताया कि किसानों के खेतों पर खरीफ में प्याज की किस्म लाइन-883 लगाई थी, जिसके परिणाम बहुत ही आशाजनक है। किस्म के बारे में बताया कि यह किस्म खरीफ के मौसम में लगाने के लिए काफी उपयुक्त है। इस प्रजाति के शल्क कंद गहरे लाल रंग के गोलाकार होते हैं। शल्के अच्छी प्रकार चिपकी होती है तथा मध्यम तीखापन होता है। फसल रौपाई के 90-100 दिन में तैयार हो जाती है। यह किस्म खरीफ के मौसम में प्याज उत्पादन लेने से बाजार में आपूर्ति लगातार बनाए रखने में सहायक होती है तथा अधिक लाभ कमाया जा सकता है।

खरीफ सीजन में प्याज होने से किसानों को मिल रहा अधिक मुनाफा

डॉ. आभा पाराशर ने बताया कि सिरोही एवं इसके आस-पास वाले स्थान में किसान प्याज की किस्म को अधिकतर रबी के मौसम में ही उगाते हैं। जो अप्रेल माह में तैयार होती है एवं उस समय प्याज की आवक अधिक होने के साथ ही भंडारण के समुचित अभाव में किसानों को प्याज सस्ते भाव में बेचना पड़ता है। खरीफ प्याज दिसंबर-जनवरी में तैयार हो जाता है एवं इस समय प्याज की आपूर्ति भी कम होती है, जिस कारण इन दो महीनों में प्याज की कीमतों में वृद्धि हो जाती है।

15 चयनित किसानों के खेतों पर किया पंक्ति प्रदर्शन

पाराशर ने बताया कि 15 चयनित किसानों के खेतों पर प्याज के फसल पंक्ति प्रदर्शन लगाए थे। इस कार्यक्रम के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को फसल को दिखाकर नवीनतम तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे अधिक लाभ मिल सके। साथ ही पाराशर ने बताया कि प्याज की नर्सरी जून-जुलाई में तैयार की जाती है एवं लगभग 40 दिन में मुख्य खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाता है। साथ ही उन्होंने प्याज में खाद एवं उर्वरकों खरपतवार नियंत्रण एवं सिंचाई प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।

किसानों ने बेहतर मुनाफे के बताए अनुभव

इस दौरान किसान भरत हीरागर ने खरीफ प्याज के बारे में अपने अनुभव को सांझा किए एवं इसके परिणामों और लाभ से संतुष्टि जताते हुए कहा कि भविष्य में प्याज की खेती के लिए क्षेत्र बढाएंगे। कार्यक्रम का संचालन सुरेन्द्र सिंह ने किया। प्रक्षेत्र दिवस के अवसर पर गांव के आस-पास के 40 किसानों ने भाग लिया।​​​​​​​

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