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बेटा होने के सवा साल बाद कोर्ट में गया पीड़ित:नसबंदी के बावजूद हो गई चौथी संतान तीन लाख रुपए का हर्जाना देने के आदेश

सिरोही20 दिन पहले
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पिंडवाड़ा तहसील निवासी एक महिला की नसबंदी फेल होने के बाद उसे चौथी संतान होने पर उसने स्थायी लोक अदालत में मुआवजा दिलवाने की गुहार की। इस पर न्यायालय ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद 3 लाख रुपए मुआवजा राशि देने के आदेश किए है।

इसमें से उसे 30 हजार रुपए पूर्व में दिए जा चुके हैं। पिंडवाड़ा तहसील निवासी एक महिला ने स्थायी लोक अदालत में गुहार लगाते हुए बताया कि उसने 9 जनवरी 2012 में पिंडवाड़ा अस्पताल में नसबंदी करवाई थी। लेकिन, अस्पताल की लापरवाही से ऑपरेशन फेल हो गया और उसनेे बेटे को जन्म दिया। जबकि, उसे पहले से ही एक बेटा व दो बेटियां हैं।

इसकी शिकायत उसने अस्पताल प्रभारी से की थी, लेकिन उन्होंने कोई संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं दिया। इस पर उसने बतौर सहायता राशि के 5 लाख रुपए खर्चे के रुप में दिलाए जाने की प्रार्थना की। इस मामले में अस्पताल प्रभारी की ओर से जवाब दिया कि नसबंदी ऑपरेशन किसी कारण से फेल हो जाता है तो उसे नजदीकी अस्पताल में संपर्क करना चाहिए।

लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। नसबंदी आपरेशन विफल होने पर परिवार कल्याण बीमा योजना के तहत निर्धारित मुआवजा राशि के अतिरिक्त अन्य किसी राशि के लिए दावा करने की हकदार नहीं है। ऐसे में परिवार कल्याण बीमा राशि के तहत वर्तमान प्रावधान के तहत निर्धारित मुआवजा राशि 30 हजार रुपए का भुगतान किया जा चुका है।

न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद प्रार्थीया को 3 लाख रुपए क्षतिपूर्ति के रुप में दो माह में अदा करने के आदेश दिए। 30 हजार रुपए क्षतिपूर्ति के दिए जा चुके है। उसे तीन लाख में समायोजित कर शेष रुपए 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पाने की अधिकारी रहेगी।

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