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असर:काेराेना के साथ निमोनिया के लक्षण वाले मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव अाने के बाद प्लमाेनरी फाइब्राेसिस बीमारी, 6 मिनट चलते ही हांफ रहे

सिरोही8 महीने पहले
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  • प्रतिदिन 10 मरीज काेराेना से ठीक हाेकर प्लमाेनरी फाइब्राेसिस का इलाज करवाने पहुंच रहे अस्पताल, फेफड़ों में बढ़ा संक्रमण

जिले में काेराेना अपना घातक रूप दिखाने लगा है। मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अब वह प्लमाेनरी फाइब्राेसिस नामक बीमारी की चपेट में आ रहा है। ऐसे में मरीज के फेफड़े सिकुड़ जाते हैं। साथ ही मरीज काे अत्यधिक थकान, सांस भरने, हृदय की धड़कन बढ़ने, सीने में भारीपन, मांसपेशियों में दर्द और सूखी खांसी की शिकायत हाेने लगती है। समय पर इलाज नहीं लेने पर मरीज की माैत भी हाे जाती है।

सिरोही जिले में अब तक 3058 काेराेना के संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं। जिसमें से 2790 मरीज काेराेना से ठीक हाेकर घर जा चुके हैं। लेकिन इन संक्रमिताें में से करीब 20 प्रतिशत मरीजों में काेराेना के साथ निमोनिया के लक्षण दिखाई दिए, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उन्हें सांस लेने में तकलीफ, हृदय की धड़कन बढ़ने, सीने में भारीपन, मांस पेशियों में दर्द और सूखी खांसी हाे रही है। जिला मुख्यालय स्थित राजकीय अस्पताल में राेज करीब 10 काेराेना सर्वाइवर ऐसी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। लेकिन कई मरीज अभी भी प्लमाेनरी फाइब्राेसिस बीमारी से अनभिज्ञ है।

फेफड़ाें में अधिक निमाेनिया के लक्षण हाेने पर हाेती है प्लमाेनरी फाइब्राेसिस, ऐसे मरीजों का सिकुड़ जाता है फेफड़ा
काेराेना के साथ निमोनिया के लक्षण वाले मरीज समय पर इलाज ले ताे उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है। लेकिन मरीज के फेफड़ों में जमा कफ साफ नहीं हाे पता। इसके चलते फेफड़ों के उत्तक कठाेर हाे जाते हैं। इससे ऑक्सीजन फेफड़े से रक्त में पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाती। इससे मरीज काे सांस लेने में समस्या, जल्दी थकान और जाेड़ाें में दर्द बना रहता है।

स्वस्थ फेफड़े के लिए एक्सरसाइज

  • ऐसे मरीज तीन तरह से सांस लेने की एक्सरसाइज करें। पहली- हल्के-हल्के सांस लें। दूसरा जल्दी - जल्दी सांस लें, इसमें गहरी सांस नहीं ले हल्की हल्की लें और जाेर से छाेड़े। तीसरा गहरी सांस लें और जाेर से छाेडें यह एक तरह से कपाल भांति का ही रूप है।
  • डायफ्रामेटिव ब्रीदिंग एक्सरसाइज: इसमें पूरी सांस भरके पेट से सांस छाेड़ते है और मुंह से जैसे सीटी बजाते हैं।
  • स्कूल में पीटी करवाते हैं वह पीटी की एक्सरसाइज भी करते रहेंगे ताे फेफड़े के लिए अच्छा है।

^कोविड-19 पॉजिटिव मरीज जोकि गंभीर अवस्था में भर्ती होते हैं उनमें फेफड़ों में संक्रमण अथवा वायरल निमोनाइटिस हो जाती है, ऐसे केसेज में मरीज कोविड-19 नेगेटिव होने के बावजूद फेफड़ों में संक्रमण ठीक होने में करीब एक से डेढ़ महीना लगता है। पलमोनरी फाइब्रोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। मरीज को सांस में तकलीफ होती है। सामान्य कार्य के दौरान हांफने लग जाता है।
-डॉ. प्रदीप चौहान, प्रमुख विशेषज्ञ एवं प्रभारी कोविड आईसीयू व आइसोलेशन वार्ड, सिरोही

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