नवरात्रि पर विशेष:इकलौता मंदिर जहां, शिव पर विराजित हैं मां ललिता, सिर ब्रह्मा, पैर विष्णु की गोद में

मंडार/ सिरोही7 महीने पहलेलेखक: शब्बीर भाटी
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  • राजस्थान का एकमात्र मां ललिता का ऐसा मंदिर, जहां भगवान शिव लेटी हुई मुद्रा में हैं

यह है जिले का एकमात्र ललिता देवी का मंदिर जो शक्ति स्वरूपा भी है और लक्ष्मी का रूप भी। मंडार से 25 किमी दूर रायपुर ग्राम पंचायत के जालमपुरा गांव के पास बनी टेकरी पर स्थित है यह अनूठा मंदिर। खास बात यह है कि इस मंदिर में मां ललिता की प्रतिमा ही अपने आप में अद्भुत और सबसे अलग है।

प्रदेश में कहीं पर भी ऐसी प्रतिमा नहीं है, जिसमें मां ललिता शिव पर विराजित हैं। इतना ही नहीं, भगवान शिव भी लेटे हुई मुद्रा में हैं। खास बात यह है कि इनका सिर ब्रह्मा और पैर भगवान विष्णु की गोद में हैं। भगवान शिव के पेट पर मां ललिता विराजित हैं। बताया जाता है कि प्रदेश में ऐसी प्रतिमा और इस स्वरूप में कहीं पर भी दर्शन भी नहीं होते हैं। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि इस पहाड़ी पर हजार साल से भी ज्यादा साल पुरानी मिट्टी की अनेक प्रतिमा स्थापित होने के कारण पहले लोग पहाड़ी के रास्ते दर्शन के लिए आते थे। इसके बाद 10 गांवों के ग्रामीणों ने मिलकर गुफा में माता जी की प्रतिमा स्थापित की। इसके बाद 2008 में इस प्रतिमा को यहां विराजित किया।

  • इस मंदिर की ये 2 विशेषताएं भी

​​​​​​​​​​​​​​200 फीट ऊंचे मंदिर का गुंबद भी दक्षिण भारत के मंदिरों जैसा

करीब 200 फीट ऊपर सुंधा माता पहाड़ी पर बने इस मंदिर का गुंबद भी अपने आप में अलग है। यह दक्षिण भारत शैली का है। मंदिर परिसर में काला भैरव की प्रतिमा भी स्थ्ज्ञापित की गई है। नवरात्रि में यहां दूरदराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। क्योंकि, प्रदेश में बांसवाड़ा के बाद मां त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर यहीं पर है।

जहां भक्त नकदी-आभूषण नहीं चढ़ाते हैं अनाज और दलहन

मंदिर के पुजारी हीरा वल्लभ तिवारी ने बताते हैं कि मा त्रिपुरा सुंदरी व ललिता देवी की प्रतिमा स्थापित होने के बाद से यहां रुपए का चढ़ावा नहीं चढ़ता है। बाकी मंदिरों से अलग परंपरा के तहत भक्त यहां चावल, गेहूं, मूंग आदि अनाज चढ़ाते हैं। यहां कोई भंडारा भी नहीं रखा गया है।

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