क्षुल्लक एकलसागर नामकरण किया:मुनि एकत्वसागर का हुआ समाधिमरण

धरियावद11 दिन पहले
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दिगंबर जैन मुनि एकत्वसागर महाराज का मध्यलोक संस्थान मधुवन तीर्थराज सम्मेदशिखरजी झारखंड राज्य में समाधिमरण हो गया। अशोक कुमार जेतावत ने बताया कि जैन समाज के प्रसिद्ध पंडित भरत कुमार काला दिगंबर जैन समाज के सबसे प्राचीन साप्ताहिक समाचार पत्र जैन गजट के सम्पादक रहे हैं। उन्‍होंने संसार को असारमान और शरीर को नश्वर जानकर दिगंबर जैन मुनि वात्सल्य मूर्ति पुण्यसागर महाराज से 4 अगस्त 2022 को जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण कर क्षुल्लक एकलसागर नामकरण किया।

मुनि पुण्यसागर ने 8 अगस्त को मनुष्य पर्याय के सर्वोच्चय पद दिगंबर जैन मुनि दीक्षा प्रदान कर मुनि एकल सागर महाराज नामकरण रखा। तब से वह निरंतर साधनारत थे। मुनि पुण्यसागर महाराज ने मुनि एकत्वसागर के शारीरिक अस्वस्थता के चलते और आयु का क्षरण करीब मानते हुए चार पांच दिन पहले सभी प्रकार के आहारों का त्याग कर आजीवन यम संल्लेखना को धारण किया।

रविवार को दोपहर डेढ़ बजे समाधिमरण हो गया। मुनि एकत्वसागर महाराज का मध्यलोक परिसर संस्थान में जैन विधि विधान पूर्वक समाधिमरण के अंतिम संस्कार करते हुए अग्नि संस्कार कर दिया गया। इस दौरान सिद्ध क्षेत्र भूमि तीर्थराज सम्मेदशिखर के कई मुनि, आर्यिका, ब्रह्रचारिणी बहिने, त्यागी व्रत और यात्री उपस्थित थे।

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