वसीठा धोबी समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन:18 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे, बेटियों ने कहा- जहां ऐसी समाज हो वहां बोझ नहीं होती बेटियां

प्रतापगढ़15 दिन पहले

वसीठा धोबी समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन आज शहर के अटल रंगमंच पर संपन्न हुआ। जिसमें 18 से अधिक जोड़े विवाह के परिणय सूत्र में बंधे हैं। धोबी समाज के 3 राज्यों के 15 से अधिक शहरों के करीब 18 से अधिक लोगों ने इस निशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन अपना तन मन धन से सहयोग दिया है।

अध्यक्ष रमेश चंद टांक ने बताया समाज के करीब 50 से अधिक लोग छह माह से इस निशुल्क सामूहिक विवाह की तैयारी में जुटे हुए थे। समाज द्वारा पहले भी सामूहिक विवाह सम्मेलन करवाया गया था। लेकिन यह निशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर पहली बार आयोजित हुआ है। टाक ने यह भी बताया भादवा बीज पर धोबी समाज द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रम में 5 पंचों ने महंगे खर्च से समाज के मध्यम वर्गीय लोगों को राहत देने के लिए इस कार्यक्रम को आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। जिस पर समाज के सभी लोगों ने अपनी सहमति देते हुए वसंत पंचमी पर निशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करने की बात पर समर्थन दिया। जिसके बाद से समाज के सभी लोग इसमें तन-मन-धन से अपना सहयोग देने में जुटे रहे।

वसीठा धोबी समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन हुआ संपन्न
वसीठा धोबी समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन हुआ संपन्न

5 हजार से अधिक लोगों के चाय नाश्ता और खाने की व्यवस्था की

धोबी समाज के पदाधिकारियों ने सामूहिक विवाह सम्मेलन में आने वाले बाहर से प्रत्येक मेहमानों को परेशानियां नहीं हो, इसको लेकर अटल रंगमंच पर टेंट से स्टॉल बनाई गई, जहां सभी लोगों के लिए चाय, नाश्ता खाना और ठहरने की व्यवस्था की गई। समाज के पदाधिकारियों के द्वारा 5000 से अधिक लोगों के खाने की व्यवस्था सामूहिक विवाह स्थल पर की गई। इस काम को करने में विवाह सम्मेलन से 1 दिन पूर्व ही हलवाई जुटे हुए नजर आए। सामूहिक विवाह सम्मेलन में किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं हो इसको लेकर समाज के पदाधिकारियों ने युवाओं की टीम को कार्य का विभाजन कर उन्हें जिम्मेदारियां सौंपी। समाज का प्रत्येक व्यक्ति सामूहिक विवाह सम्मेलन के प्रति अपने दायित्व को समर्पित करते हुए तन मन धन से विवाह स्थल पर सहयोग में लगता हुआ नज़र आया।

बेटियों ने कहा- जहां ऐसी समाज हो वहां बोझ नहीं होती बेटियां

अटल रंगमंच पर आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में बेटियों ने समाज की इस व्यवस्था पर हतोत्साहित नजर आई और कहने लगी जहां ऐसी समाज होती है वहां बेटियां कभी अपने मां-बाप पर बोझ नहीं होती है। हमें गर्व है हमने ऐसी सभ्य समाज में जन्म लिया है जहां पर एक दूसरे के मानवीय संवेदनाओं को समझकर उन्हें वर्तमान समय के महंगे खर्च से निजात दिलाया है। प्रत्येक समाज को ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए जिससे मध्यमवर्गीय परिवार को महंगी शादियों के खर्च से निजात मिल सके।

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