प्रतापगढ़:वन्य जीव गणना के लिए वन विभाग मुस्तैद, पूर्णिमा की रोशनी में गिने जाएंगे सभी जीव

प्रतापगढ़9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

हर साल वैसाख महीने की पूर्णिमा तिथि पर होने वाली वन्य जीव गणना कीविड के चलते वे साल बाद 16 व 17 मई को होगी। वन्य जीव गणना को लेकर वन विभाग तैयारियां तैयार है। क्षेत्रीय वन अधिकारी अश्विनी प्रतापसिंह ने बताया कि छोटी सादड़ी रेंज के अधीन वन क्षेत्र में विचरण करने चाले वन्य जीवों की गणना 16 मई को सुबह 8 बजे से 17 मई की सुबह 8 बजे तक होगी। इसके लिए करीब 15662 हेक्टेयर में फैले वन क्षेत्र में प्राकृतिक जगहों के अलावा अलग से 6 वाटर होल्स तैयार किए है। हर वाटर पॉइंट पर दो-दो कर्मचारी लगाए जाएंगे।

यह गणना प्रतिवर्ष शास्त्र माह की पूर्णिमा को होती है, क्योंकि इस पूर्णिमा पर मौसम एकदम साफ रहने से चांद की रोशनी में दूर साफ दिखाई देता है। ऐसे में वन्य जीवों को देखना और गणना करना आसान रहता है। पिछले दो साल में कोरोना संक्रमण के कारण इस बार की जाएगी। उन्होंने बताया कि गर्मी में वन्यजीवों को पानी की अधिक आवश्यकता रहती है वन्यजीव 24 घंटे में एक बार पानी जरूर पीता है। वन्य क्षेत्र में प्राकृतिक जगहों के अलावा 6 जगहों पर वन विभाग से पानी की व्यवस्था की गई है।

पर्याप्त संसाधनों का अभाव

वन्य कार्मिको ने बताया कि वे वन्यजीव गणना तो करते हैं, परंतु उनके पास वन्यजीव गणना करने व उनसे आत्म रक्षा करने के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। वन कर्मी आवागमन के लिए वाहन, टॉर्च, डंडे, बारिश से बचने के लिए छाते, मचान, रस्सियां मेडिकल कीट और भोजन सहित आदि की व्यवस्था खुद के खर्च पर करते हैं। उनके पास हिंसक जानवरों से बचाव के लिए आत्म सुरक्षा के संसाधन भी नहीं है। साथ ही अधिकारियों के पास इन गणना स्थलों का जायजा लेने के लिए भी पेट्रोलिंग वाहन भी उपलब्ध नहीं है। उन्हें भी किराए के वाहनों से निरीक्षण करना पड़ता है, जिसका खर्च वो खुद वहन करते हैं।

वन क्षेत्र में पैंथर, जरख, लोमड़ी, सियार नीलगाय, मोर, तीतर, खरगोश, जंगली मुर्गा, जंगली सूअर, जंगली बिल्ली, पेंगोलिन सहित अनेक प्रकार के जानवर और पशु पक्षी मौजूद हैं। गणना के दौरान सभी वन्यजीवों के साथ अन्य जानवरों व पक्षियों की भी गणना होगी।

यहां होगी वन्य जीवों की गणना
छोटी सादड़ी वन खंड के अंतर्गत 5 वनपाल नाके हैं, जिसमें सियाखेड़ी का एनिकट फूटा तालाब, छोटी सादड़ी में भंवरमाता एनीकट के नीचे, धोलगट्टा, साटोला का हमेल महादेव, मानपुरा का वागदाता, ढावटा की अखेपुर नदी, शामिल है। इन जगहों पर विभाग द्वारा बनाए गए वाटर हॉल पर वन्य जीव की गणना की जाएगी।

रेंज के अधीन 23 वन खण्ड और क्षेत्रफल (हेक्टेयर में):
भंवरमाता- 24.39.00
सुकड़- 1690.00
सुरा मंगरा- 176.0०
घास बीड़ चापडोल- 017.00
घास बीड़ चरलिया- 43.00
घास बीड़ बम्बोरा- 056.00
मोटा टोंक- 137.00
सियाखेड़ी- 1152.00
बिलियां तालाब- 408.00
कालाखेत- 1308.00
हांडीया केसर- 411.00
बरोल जागीर- 1016.00
जंजाल- 268.00
गोट वेली- 165.00
छोटा देव मंगरा- 259.00
सन्तोषपुरिया- 701.00
जाम्बुडी जागीर- 372.00
बुरा- 680.00
अखेपुर- 603.00
बोरखेड़ी- 717.00
रुआ मंगरा- 269.00
लाम्बा सागड़ा- 1234.00
मुवई- 1541.00 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। जिसमें 920 हेक्टेयर क्षेत्रफल आवागमन के लिए आरक्षित हैं जबकि 14742 आरक्षित क्षेत्रफल प्रतिबंधित है।

खबरें और भी हैं...