श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान भक्ति यज्ञ का समापनs:आत्म मंथन से खुद को पहचानो, जब स्वयं को पहचान लोगे, तभी क्षमता का आंकलन होगा : पवन महाराज

प्रतापगढ़14 दिन पहले
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शहर के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित शिव मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान भक्ति यज्ञ का समापन हुआ। अंतिम दिन व्यास गद्दी से सुदामा चरित्र, नवयोगेश्वर संवाद, भक्तिज्ञान, वैराग्य, सत्संग सहित परीक्षित को अंतिम उपदेश और भागवत कथा का सार कथा वाचक पवन महाराज ने सुनाया। कथा में भाग लेने वाले समस्त श्रद्धालुओं के अच्छे भविष्य की कामना की गई।

इस मौके पर भारी भीड़ पांडाल में उमड़ पड़ी। कथा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्म का तन-मन-धन से सहयोग कर लाभ लिया। कथा वाचक ने बताया कि क्रोध से भ्रम उत्पन्न होता है, जिससे बुद्धि व्यग्र हो जाती है। भ्रमित मनुष्य अपने मार्ग से भटक जाता है। तब सारे तर्कों का नाश हो जाता है, जिसके कारण मनुष्य का पतन हो जाता है। इसलिए हमें अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए।

मनुष्य को उसकी ओर से किए गए कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है। इसलिए मनुष्य को सदैव सत्कर्म करने चाहिए। गीता में कही गई इन बातों को प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्म मंथन करके खुद को पहचानो। क्योंकि जब स्वयं को पहचान लोगे, तभी क्षमता का आंकलन कर पाओंगे। ज्ञान रूपी तलवार से अज्ञान को काट कर अलग कर देना चाहिए।

जब व्यक्ति अपनी क्षमता का आंकलन कर लेता है तभी उसका उद्धार हो पाता है। क्योंकि मृत्यु एक अटल सत्य है, लेकिन केवल यह शरीर नश्वर है। आत्मा अजर अमर है, आत्मा को कोई काट नहीं सकता। अग्नि जला नहीं सकती और पानी गीला नहीं कर सकता। जिस तरह से एक वस्त्र बदलकर दूसरे वस्त्र धारण किए जाते हैं, उसी प्रकार आत्मा एक शरीर का त्याग करके दूसरे जीव में प्रवेश करती है।

हमेशा धर्म के मार्ग पर चलते रहना चाहिए। रविवार को पूर्णाहुति व महा प्रसादी के वितरण के साथ कथा का विराम हुई। पूर्णाहुति में 9 जोड़ों ने भाग लिया। जिसमें भक्तों ने दिल खोलकर आनंद लिया। साथ ही कथावाचक पवन महाराज को हाउसिंग बोर्ड वालों ने ₹85000 का डेमो भेंट किया।

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