पोषण वाटिका पर हुई कार्यशाला:पोषण वाटिका पर हुई कार्यशाला, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों के लिए पोषक फल-सब्जी उत्पादन की जानकारी दी

प्रतापगढ़15 दिन पहले
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राष्ट्रीय पोषण माह अन्तर्गत कृषि विज्ञान केंद्र प्रतापगढ़ की पोषण वाटिका पर कार्यशाला हुई। इस कार्यशाला में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं प्रकृति फाउण्डेशन से आई 130 महिलाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डाॅ. योगेश कनोजिया ने उपस्थित महिलाओं को बताया कि परिवार के संतुलित पोषण की जिम्मेदारी महिलाओं की होती हैं।

घरों में खाली स्थान में पोषण वाटिका स्थापित कर परिवार के लिए पोषक सब्जी व फल का उत्पादन कर सकते हैं। उन्होंने कार्बोहाईड्रेट, प्रोटिन, वसा, विटामिन एवं खनिज लवण के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रोटिन से शरीर की बढ़वार होती हैं। कार्बोहाइड्रेट से शरीर को दैनिक कार्यों के लिए उर्जा प्राप्त होती हैं।

उन्होंने संतुलित भोजन के लिए न्यूट्री-थाली के बारे भी महिलाओं को जानकारी दी उन्होंने बायोफोर्टिफाईड किस्मों के पोषण लाभ के बारे में भी जानकारी दी। डाॅ. कनोजिया ने बताया कि यह कार्यक्रम देश के समस्त कृषि विज्ञान केन्द्रों पर इफको के समन्वय से आयोजित किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं में पोषण वाटिका एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता लाना हैं।

इस अवसर पर इफको जिला प्रबन्धक मुकेश आमेटा ने महिलाओं को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का संतुलित प्रयोग के लिए प्रेरित किया। कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी सहायक डाॅ. रमेश कुमार डामोर ने महिलाओं को संतुलित भोजन एवं उसके पोषक तत्वों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रकृति फाउण्डेशन के प्रभारी राजेन्द्र जयसवाल ने बताया कि पोषण वाटिका से परिवार के लिए ताजा फल एवं सब्जी के साथ-साथ सब्जी पर होने वाले दैनिक खर्च को भी कम किया जा सकता हैं।

रिलायंस फाउंडेशन के विक्रम सिंह ने जैविक खेती एवं इसकी महत्वता पर प्रकाश डाला। प्रकृति फाउंडेशन के समन्वयक विजय मेनारिया ने पोषण वाटिका के रेखांकन एवं सब्जियों की बुवाई के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जैविक खेती में उपयोग में आने वाले नीमास्त्र एवं ब्रह्मास्त्र बनाने के बारे में जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोतरी में सही जवाब देने वाली 10 कृषक महिलाओं को उन्नत दरांती एवं जैव उर्वरक देकर पुरस्कृत किया गया। अन्त में सभी महिलाओं को पोषण वाटिका स्थापित करने के लिए गाजर, मूली, पालक, धनिया, मेथी के बीज एवं पपीता की पौध वितरित की गई।

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