गैस सिलेंडर अबकी बार 1035 पार:मई माह में बढ़े 53 रु. बढ़ने से 1035 रुपए में मिलेगा, वहीं 22 मार्च काे भी बढ़े थे 50 रुपए

राजसमंदएक महीने पहले
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पीएम उज्ज्वला याेजना में अप्रैल 2019 में सब्सिडी 270 रु. की जगह ‌20.48 मिल रही, इसलिए रिफिलिंग 70 हजार से घटकर 30 हजार हुई - Dainik Bhaskar
पीएम उज्ज्वला याेजना में अप्रैल 2019 में सब्सिडी 270 रु. की जगह ‌20.48 मिल रही, इसलिए रिफिलिंग 70 हजार से घटकर 30 हजार हुई

कोरोना काल के बाद पहले से महंगाई की मार झेल रहे आमजन काे तेल व गैस कंपनियों ने लगातार झटके पर झटके देते हुए गुरुवार काे घरेलू उपयोग के गैस सिलेंडर की कीमत में 3 रुपए प्रति सिलेंडर का इजाफा करते हुए 1035 रुपए में िमलने लगा है। वहीं इससे पहले 7 मई काे 50 रुपए और 22 मार्च काे 50 रुपए बढ़ाए थे। घरेलू गैस सिलेंडर की रेट एक हजार पार अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

शहर में 14.2 केजी रसोई गैस सिलेंडर के 1035 रुपए देने होंगे। दरअसल, भास्कर पड़ताल में सामने आया कि रसोई सिलेंडर के दाम आसमान छू रहे हैं। गत 28 माह में ही घरेलू सिलेंडर 446.50 रुपए महंगा हाे गया। यानी जो घरेलू गैस सिलेंडर जनवरी 2020 में 650 रुपए में मिल रहा था, उसकी रेट अब 1035 रुपए पहुंच गई। यानी 30 माह पहले जहां सिलेंडर की रेट दोगुनी के करीब पहुंच गई हैं।

मंहगाई धीरे-धीरे नया रिकॉर्ड बनाते हुए आमजन काे परेशान कर रही है। तेल कंपनियाें ने 53 रुपए बढ़ाने के बाद गैंस सिलेंडर 982 रुपए की जगह 1035 रुपए में मिलने लगा है। साल 2020 में घरेलू गैस के दाम प्रति सिलेंडर 650 रुपए जिसमें भी 270 रुपए सब्सिडी मिलती थी, लेकिन अब 3 साल बाद बिना सब्सिडी के 1035 रुपए हो गया हैं।

सरकार नाम मात्र की 20.48 रुपए सब्सिडी के नाम पर देती हैं। इतनी महंगाई का आम आदमी के जीवन पर क्या असर हो रहा है, यह समझने के लिए हमने कुछ डाटा जुटाए और ग्राउंड पर पहुंचकर पड़ताल की। पता चला कि गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ने के बाद सिलेंडर की मांग यानी रिफिलिंग 20 प्रतिशत हाे गई हैं। इसका सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा है।

एपीएल उपभोक्ता पहले हर माह एक लाख 50 हजार सिलेंडरों की रिफिलिंग करवा रहे थे, अब ये संख्या मात्र 90 हजार पर पहुंच गई हैं। यही हाल उज्जवल योजना के है। जिले में एक लाख 54 हजार 918 उपभोक्ता हैं। पहले हर माह करीब 55 हजार उपभोक्ता रिफिलिंग करवाते थे जो अब अप्रैल 2022 में मात्र 25 हजार उपभाेक्ताओं ने रिफिलिंग करवाई हैं।

इसकी एक वजह यह भी है कि सब्सिडी 2020 के मुकाबले 270 रुपए से घटकर मात्र 20.48 रुपए तक आ गई हैं। वहीं साल 2013 में प्रति सिलेंडर पर 442 रुपए सब्सिडी मिलती थी, जिससे 1022 का सिलेंडर उपभोक्ताओं को केवल 580 में ही मिलता था, लेकिन अब 2022 में केवल 20 रुपए ही सब्सिडी मिल रही है, जिससे उपभोक्ताओं को 1015 तक मिल रहा हैं।

उज्ज्वला योजना में उपभोक्ता रिफिल नहीं खरीद रहे, क्योंकि एक सिलेंडर की कीमत में मासिक खर्च चलाते
कोलाब्रेटिव क्लीन एयर पॉलिसी सेंटर (सीसीएपीसी) की एक रिपोर्ट में कहा है कि रसोई गैस सिलेंडर पर सब्सिडी को बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे एक सिलेंडर की लागत को घर के मासिक खर्च के 4 फीसदी तक सीमित किया जा सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सब्सिडी केवल गरीब परिवारों को देनी चाहिए और धनवानों को लाभार्थियों की सूची से हटा दिया जाना चाहिए।

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों ने प्रति वर्ष केवल 3 रिफिल खरीदे हैं। सीसीएपीसी के अनुसार इन परिवारों के लिए पूरी तरह से रसोई गैस पर स्विच करने के लिए प्रति वर्ष कम से कम 9 सिलेंडर की जरूरत होती हैं। रिफिलिंग महंगी होने के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा। उज्जवला योजना के उपभोक्ताओं को तो सब्सिडी ही नहीं मिल रही। एक सिलेंडर की कीमत चुकाने का मतलब परिवार का आधा मासिक खर्च चला लेते हैं।

वापस लाैटे चूल्हे पर खाना बनाने के दिन
कुंवारिया गाेटीदेवी माली के पास उज्जवला योजना में कनेक्शन हैं। तीन महीने से ये चूल्हे पर ही खाना पका रहे हैं। पति डेली लाइट फिटिंग के कार्य में मजदूरी करते हैं। कहती हैं महंगाई बहुत ज्यादा है, सिलेंडर भरवाना मुश्किल हैं। इसी तरह कैलाशी भील ने बताया कि 6 माह से टंकी रिफिल नहीं कराई हैं। अब चूल्हे के पास पानी का स्टैंड बनाकर रखा हैं। इसी तरह गांव में कई महिलाओं ने भी गैस सिलेंडर महंगा होने से अब वापस चूल्हा पर खाना पकाना शुरू कर दिया हैं।

रेट बढ़ने के कारण उज्जवला में 20% ही रिफिलिंग करवा रहे
सिलेंडर की रेट बढ़ने के कारण गैस एजेन्सी पर सेल 35% रह गई हैं। वहीं उज्जवला में ताे मात्र 20% लाेग ही रिफिलिंग करवा रहे हैं। ग्रामीणाें क्षेत्राें में ग्राड़िया जाती है लेकिन वापस भरी हुई आती हैं। रिफिलिंग नहीं हाे रही हैं।
विनाेद पालीवाल, गैस एजेंसी संचालक राजसमंद

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