उरी फिल्म देखकर बोला- सेना में ही जाऊंगा:राजसमंद का लक्ष्य बना एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर, जॉब छोड़कर जुटा था

राजसमंद2 महीने पहले

लक्ष्य जोशी ने 2019 में उरी फिल्म देखी तो उसके भीतर सेना में जाने की जुनून पैदा हुआ। बीटेक स्टूडेंट था और जॉब भी कर रहा था। सबकुछ छोड़कर उसने वायुसेना में जाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करना शुरू किया। आज राजसमंद के छोटे से गांव सरदारगढ़ का 24 साल का युवा लक्ष्य वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बन गया है।

लक्ष्य की यह कहानी बहुत प्रेरक है। सरदारगढ़ के लक्ष्य जोशी ने वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनने के सपने को साकार कर लिया है। उनके परिवार व गांव में लक्ष्य की उपलब्धि पर खुशियां मनाई जा रही हैं। लक्ष्य ने हैदराबाद में डेढ़ साल की कड़ी ट्रेनिंग ली।

लक्ष्य के पिता ललित कुमार जोशी ने बताया कि एयर फोर्स में जाने के लिए दिसबंर 2020 में लक्ष्य ने कॉमन एडमिशन टेस्ट दिया। टेस्ट पास करने के बाद उसका भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग कैडेट ब्रांच में फ्लाइंग पायलट के पद पर चयन हुआ। इसके बाद एयर फॉर्स एकेडमी डूंडीगल हैदराबाद में डेढ़ साल की ग्राउंड व फ्लाइंग ट्रेनिंग हुई। 18 जून 2022 को ट्रेनिंग पूरी होने पर उसे भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर कमीशंड किया गया।

वायुसेना में जाकर लक्ष्य ने अपना सपना पूरा किया।
वायुसेना में जाकर लक्ष्य ने अपना सपना पूरा किया।

इस अवसर पर एयर फॉर्स एकेडमी डूंडीगल हैदराबाद में कम्बाइंड ग्रेजुएशन परेड (सीजीपी) हुई। मुख्य अतिथि जनरल मनोज पाण्डे (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) व एयर मार्शल मानवेन्द्र सिंह ने 165 फ्लाइट कैंडेट, 7 इंडियन कॉस्ट गार्ड एवं 5 इंडियन नेवी ऑफिसर को रैंक प्रदान की। जनरल मनोज पाण्डे ने फ्लाइंग ऑफिसर लक्ष्य जोशी को विंग्स व रैंक दी। इस दौरान माता-पिता, भाई व मामा भी मौजूद रहे।

लक्ष्य जोशी ने यूं पूरी की अपनी ट्रेनिंग
लक्ष्य जोशी ने तीन चरणों में अपनी ट्रेनिग पूरी की। पहले स्टेज में बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग हुई। इसमें राइफल चलाना, ट्रैकिंग, फिजिकल फिटनेस करवाया गया। दूसरी स्टेज में बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग में विमान उड़ाने की 57 शॉर्टी पूरी की। तीसरी स्टेज में एडवांस फ्लाइंग ट्रेनिंग में एचएएलएल एचजेटी किरण एमके 2 विमान में 94 शॉर्टी पूरी की गई। जोशी ने 82 कैडेट मे से 28 फ्लाइंग मेरिट प्राप्त की है।

उरी फिल्म देखकर सेना में जाने का लक्ष्य बनाया
लक्ष्य जोशी के पिता सरदारगढ मे मेडिकल की दुकान चलाते हैं। माता अध्यापक है। छोटा भाई डाक्टर की पढाई कर रहा है। दादाजी जिला आयुर्वेद अधिकारी के पद से रिटायर्ड हैं। लक्ष्य के पिता ने बताया कि परिवार में अभी तक कोई भी सेना में नहीं गया है। बेटे की 12 वीं तक की पढाई आमेट व सरदारगढ में पूरी हुई। उसके बाद उसने बीटेक किया और 2 साल तक परिचित के यहां जॉब भी की। फिर अचानक उरी मूवी देखने के बाद बेटे ने सेना में जाने का निर्णय लिया।

माता पिता के साथ लक्ष्य।
माता पिता के साथ लक्ष्य।