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पुलिस ने रचे स्वांग:कभी तांत्रिक ताे कभी भैंस खरीदार बनी पुलिस, दाे माह में लंबे समय से फरार एक हजार अपराधी पकड़े

राजसमंदएक महीने पहलेलेखक: नरपत सिंह
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तांत्रिक के भेष में पुलिसकर्मी। - Dainik Bhaskar
तांत्रिक के भेष में पुलिसकर्मी।

जिले में लूट, डकैती, चाेरी, हत्या, हत्या का प्रयास और दुष्कर्म जैसे अपराधाें में विगत कई सालाें से फरार आराेपियाें काे पकड़ने के लिए जिला पुलिस ने अभियान चलाया हुआ है। दाे माह में पुलिस ने फरार 4510 अपराधियाें में से पुलिस ने 1002 अपराधियाें काे पकड़ कर सलाखाें के पीछे पहुंचाया है। अभियान में ऐसे अपराधी भी पुलिस के हाथ लगे जाे पिछले 13 साल से फरार हाेकर टाॅप 10 में ईनामी अपराधी थे।

हार्डकाेर अपराधियाें काे पकड़ने के लिए पुलिस काे भी कई ढाेंग रचने पड़े। कहीं तांत्रिक बनकर जमीन में गढ़ा धन निकालने का लालच दिया ताे अपराधी की तलाश में गाेवा में जाकर नारियल पानी भी बेचा। जिले के 15 ही थाना प्रभारियों के नेतृत्व में विशेष टीमाें का गठन किया।

मेवादा काॅलाेनी कपासन निवासी भगाेड़ा अर्जुन उर्फ अर्जुनिया पुत्र नारु कंजर काे 2007 में न्यायालय से स्थाई वारिंटी हाेने और रेलमगरा के लक्ष्मीपुरा में बाइक सवार से लूट के मामले में आराेपी है। रेलमगरा थानाधिकारी भरत याेगी के निर्देशन में एएसआई गाेपीराम, हेड कांस्टेबल शम्भुलाल, विजयसिंह, महिपालसिंह व कांस्टेबल राकेशकुमार, विकास कुमार, ओमप्रकाश और चुन्नीलाल पकड़ने के लिए घर गए।

घर पर परिजनाें ने अर्जुन कंजर के बारे में पूछताछ करने पर अनभिज्ञता जताई। टीम ने तांत्रिक बनकर अर्जुन कंजर के करीबी काे जमीन में गढ़ा धन दिलवाने कर बात कही। जिस पर करीबी मान गया और चाेरी छुपे अर्जुन काे माैके पर बुलाया, दाे दिन ताे नहीं आया। तांत्रिक बनी पुलिस ने जाने की बात कही ताे अर्जुन आया। पुलिस ने माैके से ही पकड़ लिया।

गाेवा में नारियल पानी बेचा, चार साल से फरार आराेपी काे पकड़ा
राजसमंद थाना क्षेत्र में धाेखाधड़ी मामले में 4 साल से फरार आराेपी दिल्ली निवासी कमल उर्फ बकीरसिंह पुत्र गाेपालदास माेटवानी काे गाेवा से गिरफ्तार किया। थानाधिकारी डाॅ. हनुवंतसिंह ने बताया कि धाेखाधड़ी का फरार आराेपी कमल दिल्ली ससुराल में रहता और राजसमंद में कुछ समय के लिए काॅ-ऑपरेटिव संस्थान में काम करते हुए 23 लाख रुपए की धाेखाधड़ी कर फरार हाे गया। पुलिस दिल्ली गई ताे ससुराल वालाें ने मना कर दिया। मुखबीर से उसके रायबरेली में हाेने की सूचना मिली।

पुलिस रायबरेली गई ताे गाेवा की जानकारी मिली। गाेवा बड़ा शहर हाेने से जानकारी नहीं मिली। लेकिन पुलिस टीम ने गाेवा ब्रिज पर नारियल पानी बेचा और आराेपी की फाेटाे दिखानी प्रारंभ की। सफलता नहीं मिली ताे बाइक का मिस्त्री बनकर घुमे। 10 दिन कड़ी मेहनत के बाद आराेपी परिवार सहित मिला ताे उसे गिरफ्तार किया। आराेपी ने अपना नाम और दस्तावेज तक फर्जी बना दिए थे, जिस कारण वह पकड़ में नहीं आ रहा था।

गोवा में घूमती पुलिस।
गोवा में घूमती पुलिस।

12 जुलाई 2010 में मेवदा काॅलाेनी कपासन चित्ताैड़ निवासी सुरेश पुत्र राजु कंजर रेलमगरा के कुंडिया में घर में घुसकर रात काे साे रही महिला की ज्वैलरी लूट के मामले में फरार था। रेलमगरा थानाधिकारी भरत याेगी के निर्देशन में हेड कांस्टेबल महिपालसिंह व कांस्टेबल राजकुमार व साेमेंद्रसिंह उसे पकड़ने गए। घर पर परिजनाें ने सुरेश कंजर के बारे में पूछताछ करने पर अनभिज्ञता जताई। टीम ने कहा कि हमें ताे भैंसे चाहिए। पिकअप लेकर आ गए हैं, भाड़ा लग रहा है। इसलिए मुंह मांगा दाम देंगे। भैंसे हाे ताे दे दाे, जिस पर परिजन मकान के पीछे पशुओं के बाड़े में ले गए वहां सुरेश साे रहा था। पुलिस टीम ने तत्काल प्रभाव उसे दबाेच लिया। अदालत ने उसे जेल भेज दिया।

भैंसों की खरीदार बनी पुलिस।
भैंसों की खरीदार बनी पुलिस।
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