21 साल बाद अचानक घर लौटा बेटा, परिवार में खुशियां:गया तो पत्नी प्रेग्नेंट थी, अब बेटे की शादी हो चुकी

राजसमन्द2 महीने पहले
घर परिवार के साथ 21 साल बाद लोटे लालसिंह - Dainik Bhaskar
घर परिवार के साथ 21 साल बाद लोटे लालसिंह

21 साल पहले 24 साल का युवा प्रेग्नेंट पत्नी और भरे-पूरे परिवार को छोड़कर अचानक गायब हो गया। तीन-चार साल तक परिवार के लोग उसे तलाशते रहे। लेकिन युवक का कहीं पता नहीं चला। परिवार वालों ने यहां तक मान लिया कि बेटा मर चुका है। सोमवार को निहंगों की टोली घर में दाखिल हुई। एक निहंग से कहा- ओए पर्वत सिंह, मेरे भाई क्या हाल है। यह निहंग कोई और नहीं, बल्कि 21 साल पहले गायब हुआ बेटा ही था।

मामला राजसमंद जिले के देवरिया का है। देवरिया निवासी लाल सिंह 24 साल की उम्र में 26 जून 2021 को गुजरात के मेसाणा जिला के बेचलाजी से अचानक गायब हो गया था। परिवार के लोगों ने काफी तलाशा। बाद में तलाश बंद कर दी। लाल सिंह का देवरिया में परिवार था। पिता मोहनसिंह के चार बेटे व एक बेटी है। लाल सिंह के अलावा तेज सिंह, भगवंत सिंह, पर्वत सिंह के साथ पिता गुजरात के बेचलाजी बर्तन का व्यवसाय करता था। लाल सिंह की शादी हो चुकी थी और उसकी पत्नी गर्भवती थी। एक दिन अचानक लाल सिंह गायब हो गया। अब वह निहंग तेजासिंह बनकर लौटा है।

सोमवार को अचानक गांव लौटा लाल सिंह
सोमवार शाम लाल सिंह 45 साल की उम्र में घर लौट आया। साथ में दो निहंग लच्छा सिंह सोढ़ी व जवरजंग सिंह सोढ़ी भी थे। तीनों एक साथ गांव पहुंचे। लाल सिंह ने अपने छोटे भाई पर्वत सिंह को पहचान लिया। पर्वत सिंह को आवाज लगाई तो वह डरकर खेतों की तरफ चला गया। लाल सिंह ने गांव के एक व्यक्ति भगवान लाल जाट को भी ऐसे ही आवाज लगाई। बाद में अपने घर जाकर उसने राज खोला कि वह वही लाल सिंह है जो 21 साल पहले गायब हो गया था।

लाल सिंह ने बताया कि बस घर से निकलने का मन हो गया था, इसलिए चल दिया। मेहसाणा से अहमदाबाद गया। 3 महीने तक मिठाई की दुकान पर काम किया। फिर हरिद्वार चला गया। वहां 15- 20 दिन रुकने के बाद अमृतसर में गोल्डन टेम्पल में लंगर में खाना परोसने का काम किया। वहां रामदास को अपना गुरू बना लिया। अमृतसर में सिख पंथ सोढ़ी वंश अपना लिया। इसके बाद वह पंजाब में यात्राएं करता रहा। लाल सिंह को नया नाम मिला अमृतनाम तेजासिंह। पिता का नाम गुरू गोविन्द सिंह व माता का नाम साहेब देवा मिला।

सरदारगढ़ से पैदल अपने गांव आया
​​​​​​​
लाल सिंह के साथ अन्य दो निहंग जोधपुर होते हुए मारवाड़ जंक्शन पहुंचे। वहां से ट्रेन से सरदारगढ़ और सरदारगढ़ से पैदल देवरिया पहुंचे। रास्ते में गांव के भगवान लाल जाट को उन्होंने पहचान लिया जबकि भगवान लाल जाट ने नहीं पहचाना। इसके बाद सबसे छोटा भाई पर्वत सिंह मिला, जिसको भी पहचान लिया। लेकिन पर्वत अपने बड़े भाई को नहीं पहचान पाया।

लाल सिंह के 21 साल बाद अचानक घर लौटने पर उनसे मिलने वालों का तांता लगा है। परिवार खुश है। लाल सिंह को पता लगा कि घर छोड़कर जाने के बाद गर्भवती पत्नी ने बेटे को जन्म दिया था, बेटे देवेंद्र की 21 अप्रैल को शादी हुई है। लाल सिंह की पत्नी व बेटा मुम्बई में हैं जहां वे आइसक्रीम का बिजनेस कर रहे हैं। बेटा पिता से मिलने मुंबई से रवाना हो गया।

लाल सिंह के दोस्तों कालू, शैतान, खुमाण, भगवान लाल, सूरज मल जाट, हरिसिंह, बसंन्त सिंह, रामसिंह, गणपत सिंह, डूले सिंह मिलने पहुंचे। सभी ने बचपन की यादें शेयर की।

खबरें और भी हैं...