जल योजना:बालेर में नहीं है आरओ प्लांट की व्यवस्था, फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

बालेर13 दिन पहले
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कस्बे मे पूर्व में भाजपा शासन काल मे राजस्थान सरकार द्वारा कस्बे मे स्वच्छ पेयजल की घर घर आपूर्ति के लिए जल योजना के तहत लगभग 2 करोड़ 40लाख की लागत से पेयजल योजना स्वीकृत करवाकर कस्बे मे पेयजल आपूर्ति चालू की गई थी। लेकिन इन दिनों पेयजल मे फ्लोराइड की अधिकता के चलते जहां एक और पाईप लाइनों मे जगह जगह ब्लॉक होने से पेयजल आपूर्ति तो बाधित हो रही है। इसी के साथ साथ पेयजल आपूर्ति मे फ्लोराइड की अधिकता के चलते लोगो के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने मे भी कोई संदेह नहीं है। ग्रामीणों ने पूर्व में खंडार विधायक अशोक बैरवा से कस्बे में फ्लोराइड युक्त पानी से निजात दिलवाने के लिए कस्बे में आरओ प्लांट लगवाने की मांग की है। फ्लोराइड की अधिकता पेयजल मे मौजूद होने पर इसके नियमित फ्लोराइडयुक्त पानी के पीने से फ्लोरोसिस नामक बीमारी का ख़तरा बढ़ जाता है।फ्लोरोसिस मनुष्य के तब होता है,जब वह मानक सीमा से अधिक घुलनशील फ्लोराइड-युक्त पेयजल को लगातार पीने के लिये व्यवहार मे लाता रहता है। फ्लोराइड-युक्त की अधिकता के चलते यदि मनुष्य इसका सेवन लगातार करता रहता है तब उसे ऐसा महसूस होता है जैसा कोई अजगर की चपेट मे आकर महसूस करता है। मानकों से अधिक पेयजल मे फ्लोराइड की मात्रा पाई जाती है,तो शरीर के सभी अंगो एवं प्रणालियों पर प्रभाव पड़ने से स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न। प्रकार की शिकायते होती हैं।अधिक फ्लोराइड गर्दन,पीठ,कंधे व घुटनों के जोड़ो और हड्डियों को प्रभावित करता हैं।कैसर,स्मरण शक्ति कमजोर होना,गुर्दे की बीमारी व बांझपन जैसी समस्या से भी मानकों से अधिक फ्लोराइडयुक्त पानी के नियमित पीने से ऐसी समस्या भी इससे हो सकती है।

फ्लोराइडयुक्त पानी को पीने से असमय बुढ़ापा शरीर के जोड़ो के दर्द से ग्रसित हो रहे है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कस्बे के पेयजल मे फ्लोराइड की जांच करवाकर लोगो को राहत दिलवाने की पूर्व मे भी कई बार मांग की लेकिन आज हालत ये है की पेयजल योजना की पाईप लाइने ही ब्लॉक हो रही है तो मानव शरीर का क्या हाल होगा। शुद्ध पेयजल मात्रा आसपास बनी कुईयो मे ही मिलता है,लेकिन गर्मी मे जलस्तर कम हो जाने से मजबूरन लोगों को फ्लोराइड युक्त पानी पर निर्भर रहना पड़ता है।कस्बे के 15प्रतिशत लोग ही कुईयो के शुद्ध पानी का उपयोग करते है।जबकि 85 प्रतिशत लोग तो पेयजल योजना के तहत नलो से सप्लाई होने बाले पानी को ही पेयजल के लिए उपयोग में लेते हैं।
ग्राम पंचायत के लिए सिरदर्द बनी पेयजल योजना
जलदाय विभाग द्वारा पेयजल योजना को ग्राम पंचायत के हैंडओवर कर दिया गया था। पानी में फ्लोराइड की अधिकता के चलते भी जलदाय विभाग द्वारा भूमिगत पाइप लाइन डाल दी गई। पाइप लाइनों में फ्लोराइड जमा होने पर पाइप लाइन जाम हो जाती है। जिससे ग्राम पंचायत द्वारा करवाये गए इंटलाकिंग, सीसी सड़कों को तोड़ कर जगह जगह पाइप लाइनों को खोद कर चेक किया जाता है। ग्राम पंचायत को खुदाई के लिए संसाधन जुटाने पड़ते हैं। फिर भी कई वार्डो में पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है।

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