सिलिएक का रोगी बच्चा:जिले में मिला सिलिएक रोग से ग्रस्त बच्चा

सवाई माधोपुर14 दिन पहले
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  • सिलिएक से पीड़ित को जीवनभर गेहूं के आटे से बनी खाद्य सामग्री से परहेज रखना पड़ता है

जिले में ढाई साल का एक बच्चा सिलिएक रोग से ग्रस्त मिला है। चिकित्सकों के अनुसार, जिले में संभवतया इतनी कम उम्र का यह पहला केस सामने आया है। इस बीमारी से पीडि़त को जीवनभर गेहूं के आटे से बनी खाद्य सामग्री से परहेज रखना पड़ता है। सामान्य चिकित्सालय में बच्चे के इलाज के लिए आए गंगापुरसिटी निवासी मुकेश मीना ने बताया कि उसके ढाई साल के बेटे शिवा को काफी समय से उल्टी- दस्त की शिकायत है।

उसने शिवा का गंगापुर व जयपुर में भी ईलाज करवाया, लेकिन इस समस्या से छुटकारा नहीं मिला। परेशान होकर वह कुछ दिन पहले वह बेटे को लेकर जिला अस्पताल आया था। यहां डा. सियाराम मीना को दिखाने पर उन्होंने गेहूं के आटे से बनी खाद्य सामग्री बंद करने के साथ ही दवाईयां लिखी थी। जिससे अब शिवा को उल्टी व दस्त में आराम मिला है। इसलिए अब दोबारा दिखाने आया हूं।

जिला अस्पताल के एमसीएच यूनिट में कार्यरत वरिष्ठ विशेषज्ञ (शिशु रोग) डा. सियाराम मीना ने बताया कि सिलिएक रोग से पीडित ढाई साल के शिवा को लेकर परिजन मेरे पास आए थे। बच्चे के पेट में पानी भरा हुआ था व उल्टी-दस्त की शिकायत थी। बच्चे की टीटीजी जांच रिपोर्ट देखने पर सिलिएक के लक्षण सामने आए। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से पीडित रोगी को गेहूं से बनी खाद्य सामग्री खाने से एलर्जी होती है। सिलिएक रोगी को केवल ज्वार,बाजरा, चावल, मक्का, साबूदाना, सोयाबीन आदि से बनी खाद्य सामग्री ही खिला सकते हैं। गेहूं के आटे से बनी खाद्य सामग्री से जीवनभर परहेज करना पडता है। इस बीमारी में खाने पर ध्यान रखना पडता है।

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