टिकट विंडो केबन आरामगाह बनी:आवारा जानवरों की आरामगाह बनी रोडवेज टिकट विंडो केबन

सवाई माधोपुर2 दिन पहले
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रोडवेज निगम के अधिकारियों की अनदेखी के चलते जिला मुख्यालय स्थित बजरिया में लालसोट बस स्टैंड पर टिकट विंडो की केबिन आवारा जानवरों की आरामगाह बन गई। किसी समय यात्री सुविधाओं में अव्वल यह बस स्टैंड अब निगम के उदासीन रवैए के कारण अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गया। बसों के रूट अनाउंस की जगह अब यहां चाय बेचने वालों का शोर सुनाई देता है। वर्षों से बस स्टैंड की सुध नहीं लिए जाने से यात्रियों के लिए बनाया गया यात्री प्रतिक्षालय चाय की थड़ी वालों के लिए कमाई का जरिया बन गया है।

25 से 30 बसों का होता है संचालन : लालसोट बस स्टैंड से रोजाना दिनभर में करीब 25 से 30 बसों का संचालन होता है। इनमें रोडवेज के साथ ही निजी ट्रेवल एंजेसी की बसें भी शामिल है। करौली, लालसोट, दौसा जाने के लिए इन बसों में 15 सौ से 2 हजार यात्री रोजाना यात्रा करते है। इनके अलावा कम दूरी के रूट पर चलने वाली छोटी बसों में यात्रा करने वाले यात्री अलग है।

यात्रियों के लिए लगे टीनशेड में अतिक्रमियों ने जमाई दुकानें
विदाउट ट्रेन रूट वाले मार्गो पर यात्रा करने वाले यात्रियों लिए बजरिया में लालसोट बस स्टैंड बना हुआ है। यहां रोजवेज निगम की और से यात्रियों के छाया- पानी के लिए टीनशेड व प्याऊ लगाने के लिए साथ टिकट विंडों पर निगम के कार्मिक भी लगाए थे। यहां पर यात्रियों के बैठने व बसों के ठहराव के लिए पर्याप्त स्थान है, लेकिन निगम के अधिकारियों की अनदेखी के चलते यात्री प्रतिक्षालय पर अतिक्रमी काबिज हो गए। वहीं टिकट विंडों भी बंद कर दी गई। जबकि लालसोट रूट पर अन्य रूटों की अपेक्षा सबसे अधिक यात्रीभार है। रोडवेज को सबसे ज्यादा राजस्व भी इसी रूट पर मिलता है। इसके बावजूद यात्री सुविधाओं पर ध्यान नहीं है।
लोगधूप में खड़े रहकर करते हैं बस का इंतजार
यात्री सुविधाओं पर ध्यान देने के प्रति उदासीन बना रोडवेज निगम डिपो प्रबंधन का सिर्फ राजस्व पर ध्यान है, उन्हें यात्रियों की सुविधाओं से कोई सरोकार नहीं है। जिला मुख्यालय पर लालसोट बस स्टैंड पर अतिक्रमियों का कब्जा होने से बस के इंतजार में यात्री भी इधर-उधर छांव तलाशते रहते हैं। यात्री दुकानों के आगे लगे टीनशेड के नीचे खड़े होकर बस का इंतजार करते है।

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