प्रेरणास्पद कहानी:जन्म से दृष्टिहीन पायल का जज्बा, सामान्य छात्रों को पढ़ा रही; गुजरात में पढ़ी, साथ ही संगीत भी सीखा

बिसाऊ9 महीने पहले
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स्कूल में बच्चों को पढाती हुई पायल। - Dainik Bhaskar
स्कूल में बच्चों को पढाती हुई पायल।
  • बिसाऊ की पायल ने अंधता को नहीं बनने दिया बाधा

जीवन में किसी भी तरह की कमी आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। हौंसले बुलंद हों तो आप हर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। ऐसी ही कहानी है बिसाऊ की पायल जोशी पुत्री विजय कुमार जोशी की। पायल जन्म से नेत्रहीन है। आंखों में रोशनी नहीं होने से बचपन कई तरह की परेशानियों के बीच गुजरा। जैसे जैसे बड़ी होती गई यह परेशानियां और बढ़ती गई, लेकिन होश संभालने के साथ ही पायल यह समझ चुकी थी कि उसे अपनी आंखों के इस अंधेरे को ही रोशनी में बदलना होगा। वह पढ़ाई में जुट गई।

इसके लिए अहमदाबाद के ब्लाइंड स्कूल अंध कन्याप्रकाश गृह में प्रवेश लिया और ब्रेल लिपि के जरिए सातवीं तक की पढ़ाई वहीं से की। इसके बाद कक्षा 8 से 12 तक की पढ़ाई अहमदाबाद के ही नेशनल हाई स्कूल में सामान्य छात्र छात्राओं के के साथ की और गुजरात शिक्षा बोर्ड परीक्षा में 80 प्रतिशत अंक लाकर अव्वल रही।

अब बीएड कर पायल अहमदाबाद के राजकीय ब्लाइंड पीपल एसोसिएशन विद्यालय में संस्कृत शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वह कक्षा नौ से 12 वीं तक के सामान्य बच्चों को पढ़ाती हैं। पढ़ाई के साथ साथ उसने संगीत भी सीखा और अब तक 50 से अधिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे चुकी है।

पायल ने बताया कि अंधता के कारण मेरा बचपन परेशानियों के बीच गुजरा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मेरे हर सपने में मेरे माता पिता ने पूरा सहयोग दिया। यदि वे मेरा साथ नहीं दे पाते तो मैं कभी आगे नहीं बढ़ पाती। पायल ने बताया कि कमियां सभी में होती हैं, लेकिन उन्हें अपने सपनों में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। जल्द ही पायल की शादी गुजरात में जूनागढ़ निवासी संस्कृत आचार्य हार्दिक दवे के साथ होने वाली है। वह बताती हैं कि मैने हर वक्त यही सोचा कि आंखों में अंधेरा है तो क्या हुआ। हम अपने परिश्रम से जीवन को रोशन बना सकते हैं।

शिक्षा के साथ संगीत भी सीखा
पायल ने ना केवल पढ़ाई के क्षेत्र में बल्कि संगीत के क्षेत्र में भी काफी कुछ सीखा। वह अपने गीतों की स्टेज पर प्रस्तुति देती है। अहमदाबाद में अलडी आर्ट काॅलेज में उसने बीए व गुजरात युनिवर्सिटी भाषा भवन में एमए की। इसके बाद बीएड 85 प्रतिशत अंक के साथ पास की। वह आज अपने सभी काम बिना किसी दूसरे के सहारे के कर लेती है। अहमदाबाद जैसे शहर में वह बिना किसी साथ के सिटी बसों से रोजाना स्कूल जाती हैं। अपनी ड्यूटी पूरी करती हैं और फिर घर लौटकर अपने सारे काम भी करती हैं।

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