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पहल:फसलों को बचाने के लिए चार गांवों के लोग पांच साल से 350 बेसहारा पशुओं को रखते हैं अस्थाई गोशाला में

बिसाऊएक महीने पहले
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  • बुवाई से फसल कटाई तक रखते हैं अस्थाई गोशाला में, चारा-पानी की करते हैं पूरी व्यवस्था

अक्सर बेसहारा पशुओं से परेशान लोग इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन की ओर देखते हैं, लेकिन क्षेत्र के चार गांवों के लोगों ने मिल कर इस समस्या का समाधान अपने स्तर पर ही कर लिया। इन ग्रामीणों ने हर वर्ष फसल बुवाई से फसल कटाई तक बेसहारा गोवंश को एक जगह रखने के लिए आपसी आर्थिक सहयोग से अस्थाई गोशाला का निर्माण कर लिया है। इसमें करीब साढ़े तीन सौ पशुओं को फसल कटाई तक रखा जाता है जहां इऩके लिए चारे पानी की व्यवस्था भी की जाती है।

ग्रामीण इकबाल खान के अनुसार निराधनू, शिवदयालपुरा, नाथासर, झटावा खुर्द के लोगों ने इन गांवों में घूमने वाले बेसहारा पशुओं से फसल को बचाने के लिए हर साल फसल बुवाई से पहले ही अस्थाई गोशाला बना लेते हैं। इसके बाद आराम से फसल की निराई-गुड़ाई का काम करते हैं। यह व्यवस्था पिछले पांच साल से गांगियासर रोड पर नर्सरी में कर रखी है जिसमें रहने वाले सभी पशुओं को खेती का कार्य पूरा होने के बाद दीपावली निकलते ही खुला छोड़ देते हैं। इन पशुओं के चारे पानी की व्यवस्था के लिए प्रति दिन 500 रुपए मजदूरी पर चार कर्मचारी रखे हैं। जो इन 350 पशुओं को सुबह 9 से शाम 6 बजे तक गांव की चारागाह भूमि पर चराने भी ले जाते हैं।

किसान जुगलाल, सतवीर सहारण, मनीराम कुमावत, विक्रम सिंह, भंवर सिंह का कहना है कि इस व्यवस्था के कारण ही चारों गांवों के किसान अपने खेतों में आराम से सही सलामत काम करते हुए अनाज निकाल कर घर ले आते हैं। यह व्यवस्था आगे भी इसी तरह चले, इसके लिए इन किसानों की मांग है कि कोई भामाशाह आगे आए।

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