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पंचतत्व में विलीन:बाबा गंगानाथ पंचतत्व में विलीन, 12 वर्ष खड़े रहकर की थी तपस्या

बुहाना13 दिन पहले
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जिले की प्रसिद्ध बुहाना बणी में 21 वर्ष से गोसेवा कर रहे खड़ेश्वरी महाराज रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उन्होंंने सुबह पांच बजे गुरुगांव के अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके पैतृक गांव कितलाणा से बुहाना तक शोक की लहर दौड़ गई। बाबा गंगानाथ खड़ेश्वरी महाराज शुगर की बीमारी से पीड़ित थे। तबीयत खराब होने पर उन्हें गुरुगांव के अस्पताल में भर्ती कराया था।

बणी में 1999 में आए बाबा गंगानाथ महाराज ने 12 साल तक खड़े होकर गायों के संरक्षण के लिए तपस्या की। तब से इनका नाम खड़ेश्वरी महाराज पड़ा। 2013 में यूपी के तत्कालीन सांसद व वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुहाना आकर उनकी तपस्या पूरी करवाई थी। उन्ही के प्रयासों से बणी में हजारों गायों को चारा पानी की व्यवस्था हो रही है।

शाम पांच बजे नाथ संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार उन्हें समाधि दी गई। इस अवसर उनके गुरु महाराज पंचमनाथ महाराज नोहर, हरियाणा के पूर्व मंत्री रामविलास शर्मा, सरपंच दशरथ सिंह तंवर, पंचायत समिति सदस्य राजपाल सिंह तंवर, रामवतार जांगिड़, सतवीर बाड़ावाला, मैनपाल, हरपाल,पूर्व सरपंच रोताशसिंह,लाम्बी अहीर पूर्व सरपंच रामवतार यादव, थली सरपंच पवन कुमार जांगिड़,राजेश शर्मा, भिर्र सरपंच शीशराम, झांझा के पूर्व सरपंच घीसाराम आदि मौजूद थे।

कितलाणा गांव से आए थे बणी में
हरियाणा के भिवानी जिले कितलाणा गांव में 1959 में ब्राह्मण परिवार में जन्म लिया। 25 वर्ष की उम्र में भक्ति भाव में लग गए। नोहर आश्रम में गुरु पंचम नाथ से शिक्षा ली। इसके बाद बुहाना बणी में 12 वर्ष खड़े होकर गायों के लिए तपस्या की। बणी को गुलजार बना दिया। आज हजारों गाय विचरण करती हैं। बुहाना के आस-पास के गांव में बाबा के लिए काफी श्रद्धालुओं में श्रद्धा रही है।

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