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जन संकल्प से हारेगा कोरोना:सपोर्टिंग ट्रीटमेंट से 80% मरीज घर में ही ठीक हो सकते हैं, पहले सप्ताह की सजगता ही तय करती है रिकवरी रेट

चूरू13 दिन पहले
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डॉ. सुधीर भंडारी एसएमएस मेडिकल काॅलेज जयपुर के प्रिंसिपल और कोविड मैनेजमेंट ग्रुप के हैड। - Dainik Bhaskar
डॉ. सुधीर भंडारी एसएमएस मेडिकल काॅलेज जयपुर के प्रिंसिपल और कोविड मैनेजमेंट ग्रुप के हैड।

हम लोग कोविड पनेडेमिक के अंतिम दौर में थे, इसी बीच दूसरी लहर आ गई, जो ज्यादा एग्रेसिव है। कोविड-19 में पहला सप्ताह वायरल रेप्लीकेशन का होता है और दूसरे सप्ताह में इंफ्लेमेशन के कारण जटिलताएं बढ़ जाती हैं। कोविड के 80% मरीज एसिम्प्टोमेटिक या माइल्ड सिम्प्टम वाले होते हैं। उन्हें सिर्फ सपोर्टिव ट्रीटमेन्ट, विटामिन्स और ब्रीदींग एक्सरसाइज और गंभीर पेशेंट के लिए ऑक्सीजनथैरेपी, रेमडेसिविर, स्टीरॉईड एवं एंटीबायाेिटक्स का होता है।

रेमडेसिविर पहले सात दिन में सबसे अधिक कारगर है और इसे अधिकतम 10 दिन तक उपयोग में ले सकते हैं। पहले सप्ताह में यह इंजेक्शन कोविड कम्वेलेशेंट प्लाज्मा वायरल लॉड कम करने में काफी मदद करता है। 10 दिन बाद रेमडेसिविर की कोई उपयोगिता नहीं रह जाती। यह बीमारी की अवधि कम करता है, जीवनरक्षक नहीं है। यह एक एंटी वायरल ड्रग है और संक्रमण के शुरुआती दिनों में कारगर साबित होता है। संक्रमण ज्यादा होने और लंग्स खराब होने की स्थिति में इसका इस्तेमाल किया जाता है। कोरोना के हर मरीज को रेमडेसिविर की आवश्यकता नहीं लगती है।

2 सप्ताह का कोविड मैनेजमेंट
पहले सप्ताह में मरीज का ऑक्सीजन लेवल कम (90 से 91) होने के साथ-साथ 6 मिनट चलने (6 मिनट वॉक टेस्ट) से ऑक्सीजन सेचुरेशन 4 से 5 प्रतिशत घटता है, तेज बुखार भी रहता है, लंग्स में सीटी स्कोर 8 से अधिक होता है, साइटोेकाई मार्क्स बढ़े हुए हैं, लिम्फोसाइट व पोलीमोर्फ का अनुपात 3.5 से ज्यादा है, इओसिनाेफिल 0 प्रतिशत हो (जो कि हाई वायरल इंफेक्शन बताता है) तभी रेमडेसिविर इंजेक्शन देना चाहिए अन्यथा यह जीवनरक्षक दवाई नहीं है।

दूसरे सप्ताह में स्टीरॉइड्स (जो कि जीवनरक्षक दवाई का कार्य करती है), खून पतला करने की दवाएं, एटींबायोटिक्स का अधिक उपयोग होता है। अगर मरीज को साईटोकाईन स्टॉर्म हैै जिसमें कि IL6 व crp नामक कैमिकल बढ़ जाते हैं, तो उन्हें माेनोक्लाेनल एंटीबॉडीज दी जा सकती है। अतः रेमडेसिविर का राेल पहले सप्ताह में वायरल लाेड कम करने में है, एसिम्प्टोमेटिक व माइल्ड डिजीज में इसकाे इस्तेमाल करने की आवश्यकता नहीं है और 10 दिन बाद भी इसकी कोई महत्ता नहीं है। जो मरीज वेन्टीलेटर पर हैं या एक्मो पर हैं, उन्हें रेमडेसिविर की आवश्यकता नहीं होती है।

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