जगह कम हाेने से 100 बेड भी नहीं लग सकते:9 माह पहले सरकार ने सुजानगढ़ के अस्पताल को 150 बेड का किया, हकीकत

चूरूएक महीने पहले
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  • विधायक ने 6 माह पहले अस्पताल में मरीजों के बढ़ते दबाव पर एमसीएच को अलग शिफ्ट करने के दिए थे निर्देश, अभी तक यहीं संचालित

भास्कर न्यूज | सुजानगढ़ चिकित्सा सुविधा का विस्तार करने व रोगियों को सुविधा देने के लिए छोटे अस्पतालों को बड़ा अस्पताल घोषित करवाने के लिए लंबी लड़ाई और संघर्ष करना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ सुजानगढ़ शहर के सबसे बड़े राजकीय बगड़िया उपजिला अस्पताल को बड़ा अस्पताल घोषित हो जाने के बाद भी हालात इसके विपरीत है। हैरत की बात तो ये है कि पिछले करीब नौ महीने से अस्पताल को 150 बेड का अस्पताल घोषित करने के बाद भी अभी तक 100 बेड का ही अस्पताल संचालित हो रहा है। अब बात चाहे चिकित्सा विभाग-अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की हो या फिर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की। हकीकत ये है कि रोगियों के दबाव के आगे अब अस्पताल बौना पड़ने लग गया है। अस्पताल की प्रतिदिन की ओपीडी 1000-1200 है। इन सभी हालातों व रोगियों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए मातृ एवं शिशु अस्पताल को अलग से शिफ्ट नहीं किया जा रहा है।

कागजों में अस्पताल 150 बेड का, जबकि यहां डॉक्टरों के बैठने तक की जगह नहीं कागजों में सुजानगढ़ का सरकारी अस्पताल 150 बेड का है, लेकिन सच ये है कि यहां पूरे 100 बेड डालने तक की जगह भी नहीं है। डॉक्टर 18 से बढ़कर 30 के करीब हो चुके हैं, इनके तक बैठने की सुविधा सही नहीं है। गायनिक, सर्जरी सहित जनरल सभी वार्ड के बेड फुल रहते हैं। कई बार नौबत ये आती है कि बेड तक नहीं मिलते। कोविड काल में स्थिति बेहद भयंकर हुई थी। अब फिर कोविड का असर देश-दुनिया में बना हुआ है। बावजूद अस्पताल प्रशासन नहीं चेत रहा।

{अस्पताल से मातृ एवं शिशु अस्पताल को अलग शिफ्ट करने पर काफी हद तक जगह निकलेगी, जिससे आईसीयू के लिए स्वीकृत 97 लाख रुपए लैप्स नहीं होंगे। लोगों को सुजानगढ़ अस्पताल में आईसीयू जैसी सुविधा मिलेगी। {रोगी-परिजनों की भीड़ कम होने से एक साथ कई छोटी-छोटी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। एक साथ 400 रोगियों का प्रतिदिन का आउटडोर कम होने से डॉक्टरों के बैठने के लिए स्थान मिलेंगे, वहीं सातों दिन ऑपरेशन हो सकेंगे। {जांचों के लिए कतारबद्ध नहीं खड़ा होना पड़ेगा। कोविड व अन्य संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा। सबसे ज्यादा सुरक्षित गर्भवती महिला व नवजात को मिलेगा। अच्छी सुविधाएं मिलने से निजी अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा।

डायरेक्टर और मंत्री से बात कर समाधान करवाता हूं : विधायक भास्कर : करीब छह महीने पहले अस्पताल के बढ़ते दबाव पर आपने एमसीएच अलग से शिफ्ट करने के लिए पीएमओ को पत्र दिया था, आगे क्या हुआ? विधायक : तत्कालीन पीएमओ की तरफ से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को पूरी रिपोर्ट भेजकर अवगत करवा दिया था। {नाथोतालाब स्थित ट्रोमा सेंटर में एमसीएच शिफ्टिंग की प्रक्रिया छह महीने बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ? -मैं पता कर जयपुर बात करूंगा। डायरेक्टर व चिकित्सा मंत्री से बात कर इसका समाधान करवाता हूं। {अगर एमसीएच अलग शिफ्ट होता है तो आईसीयू की सुविधा मिलेगी, आपके क्या प्रयास रहेंगे? -हां, आप सही कह रहे हैं। एमसीएच अलग होने से आईसीयू जैसी बड़ी सुविधा मिलेगी, वहीं कई समस्याओं का समाधान होगा। मैं पूर्ण प्रयास कर ये काम करवाऊंगा। मैं ये चाहता भी हूं।

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