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गांवों से निकले सिविल सर्विसेज होल्डर:फेमिना मिस इंडिया की फाइनलिस्ट रहीं राजगढ़ की ऐश्वर्या ने सिविल सर्विसेज में पहले ही प्रयास में हासिल की 93वीं रैंक

चुरु6 महीने पहले
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ऐश्वर्या श्योराण 2014 में दिल्ली की क्लीन एंड क्लियर फेस फ्रेश भी रह चुकी हैं। - Dainik Bhaskar
ऐश्वर्या श्योराण 2014 में दिल्ली की क्लीन एंड क्लियर फेस फ्रेश भी रह चुकी हैं।
  • अड़सीसर के दिनेश प्रतापसिंह के 381वीं व न्यांगल बड़ी के अनिल कुमार के 517वीं रैंक

यूपीएससी की सिविल सर्विसेज परीक्षा-2019 में जिले के तीन होनहारों ने सफलता हासिल की है। अखिल भारतीय स्तर पर 93वीं रैंक हासिल करने वाली राजगढ़ तहसील के चुबकिया ताल गांव की 23 वर्षीय ऐश्वर्या ने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। इनके पिता कर्नल हैं। वह मॉडलिंग कर चुकी हैं। पढ़िए इनकी सफलता की कहानी...

बिना कोचिंग 10 महीने में तैयारी कर क्लियर की परीक्षा

चूरू जिले के राजगढ़ तहसील के गांव चुबकिया ताल की ऐश्वर्या श्योराण ने बिना कोचिंग के सिविल सर्विस परीक्षा 10 महीने घर पर तैयारी करके क्लियर की। उन्होंने बताया कि मॉडलिंग तो उनकी रूचि थी लेकिन लक्ष्य सिविल सर्विस परीक्षा पास करना ही था। लक्ष्य तय हो तो कोई आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता। मई 2018 में इस परीक्षा के सिलेबस को समझा और फिर प्रारंभिक, फाइनल की परीक्षा में सफलता हासिल की। ऐश्वर्या को पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया में 93वीं रैंक हासिल हुई।

स्कूल टॉपर भी रह चुकीं

अपनी स्कूलिंग संस्कृति स्कूल चाणक्यपुरी से करने वाली ऐश्वर्या स्कूलिंग के दौरान हैडगर्ल और 97.5% के साथ एकेडमिक टॉपर भी रह चुकी हैं। ऐश्वर्या ने स्नातक की उपाधि दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से प्राप्त की थी। इससे पहले मुंबई में आयोजित फेमिना मिस इंडिया 2016 में फाइनलिस्ट भी रह चुकी हैं। 2015 में मिस दिल्ली का ख़िताब भी उसके नाम रहा। ऐश्वर्या 2014 में दिल्ली की क्लीन एंड क्लियर फेस फ्रेश भी रह चुकी हैं। 2016 में मुंबई में आयोजित लेक मी फैशन वीक जो देश का सबसे बड़ा फैशन शो है, जिसमें देश के जाने माने मॉडल्स के साथ एक मात्र न्यू मॉडल थी।

ऐश्वर्या के पिता वर्तमान में मुंबई में रहते हैं।
ऐश्वर्या के पिता वर्तमान में मुंबई में रहते हैं।

आईआईएम इंदौर में भी हो चुका चयन

2018 में आईआईएम इंदौर में भी चयन हुआ था, लेकिन अपना पूरा फोकस सिविल सर्विस पर दिया। अपनी मेहनत लग्न और इच्छा शक्ति से अपने पहले ही प्रयास में सफलता के शिखर को छुआ। ऐश्वर्या के पिता अजय शिवराण भारतीय सेना में कर्नल के पद पर करीमनगर, तेलंगाना में तैनात हैं और माता सुमन गृहिणी है। वर्तमान में परिवार मुंबई रहता है।

जिले से निकले सिविल सर्विसेज होल्डर

अनिल कुमार : 517वीं रैक टीचर के बेटे ने सॉफ्टवेयर कंपनी की नौकरी छोड़ी, पहले व दूसरे प्रयास की कमियों को दूर कर पाई सफलता
राजगढ़ के न्यांगल बड़ी गांव के सरकारी स्कूल के शिक्षक महावीर प्रसाद के पुत्र अनिल कुमार ने सिविल सर्विस परीक्षा क्लियर करने के लिए नोएडा में सेमसंग में सॉफ्टवेयर कंपनी की नौकरी छोड़ी। 2017 में पहली बार व 2018 में दूसरी बार परीक्षा में अनिल को सफलता नहीं मिली तो जिद की, कि चाहे कुछ भी हो जाए वह सिविल सर्विस परीक्षा क्लियर करके रहेगा। पहले दो प्रयास में रही कमियों का रिव्यू किया। गलतियों को पकड़कर उसे दूर किया। यहां तक कि वॉट्सएप भी यूज करना छोड़ दिया। हालांकि फेसबुक से जुड़े रहे। प्रारंभिक और फाइनल परीक्षा पास करने के बाद नॉलेज और नजरिये से इंटरव्यू क्लियर कर लिया। तीसरे प्रयास में 517वीं रैंक हासिल की। अनिल ने गांव के सरकारी स्कूल में हिंदी मीडियम से परीक्षा देकर 10वीं परीक्षा 88 फीसदी अंकों से पास की। 12वीं की परीक्षा हासियावास से की। उसने यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा 2019 की तैयारी दिल्ली में रहकर की। उसने बताया कि वह रोज सात से आठ घंटे पढ़कर ये सफलता हासिल कर पाया।

दिनेश प्रतापसिंह : 381वीं रैक कंपाउंडर के बेटे को पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली तो नौकरी छोड़कर तैयारी की, सफलता पाई

सरदारशहर के अड़सीसर गांव के दिनेश प्रतापसिंह राठौड़ ने दूसरे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में 381वीं रैंक हासिल की। दिनेश के पिताजी उदयसिंह सरदारशहर में नर्सिंगकर्मी हैं। दिनेश ने बताया कि 2018 में इंटरव्यू में सफलता नहीं मिल पाई। उसने सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी छोड़कर तैयारी शुरू की। पिता ने सपोर्ट किया और कहा कि फिलहाल उसे सिविल परीक्षा की तैयारी पर ही ध्यान देना चाहिए। जॉब बाद में भी मिल जाएंगे। दिनेश ने नियोजित ढंग से तैयारी की। बचपन से प्रतिभाशाली रहे दिनेश ने 10वीं की परीक्षा 86 फीसदी अंकों से पास की। उसने अहमदाबाद से बीटेक तथा बाद में एमबीए करके जॉब शुरू कर दिया। दिनेश ने बताया कि उसने बचपन में ठान ली थी कि वह प्रशासनिक सेवा में जाएगा। इसलिए वह जाब करते हुए इसकी तैयारी में जुटा रहा, जब पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली तो दूसरे प्रयास में पहले की कमियों को दूर करके तैयारी की और सफलता हासिल की। उसने कहा कि माता-पिता के अलावा परिजनों का सपोर्ट ही उसकी सफलता का राज है।

जसवंतगढ़ की महिमा को 479वीं रैक
कस्बे की महिमा खीचड़ ने 479वीं रैंक हासिल की। महिमा की मां गृहणी और पिता ओम प्रकाश का नागालैंड में हार्डवेयर का बिजनेस है।

लाडनूं के रामचंद्र के 605वीं रैंक आई
कस्बे के रामचंद्र जाखड़ के 605वीं रैंक आई। वे अभी अहमदाबाद में सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय) हैं। पिता प्रेमाराम प्रयोगशाला सहायक हैं।

सिविल सर्विसेज में शेखावाटी के होनहार

सीकर के सोहनलाल : 201वीं रैक

3 बार असफल, हार नहीं मानी, नौकरी से छुट्‌टी लेकर तैयारी की और सफल हुए यूपीएससी परिणाम में सीकर जिले के कई युवाओं ने सफलता प्राप्त की। ढाल्यावास निवासी सोहनलाल निठारवाल ने 201वीं, श्रीमाधोपुर के सौरभ गोयल ने 324वीं, नेठवा के विक्रम सिहाग ने 450वीं, बिडोली के पियूष गठाला ने 530वीं, गोकुलपुरा के मनीष खीचड़ ने 390वीं तथा नीमकाथाना के विवेक शर्मा ने 711वीं रैंक हासिल की। आईआईटी दिल्ली से पासआउट खंडेला तहसील के ढाल्यावास निवासी सोहनलाल चौधरी पुत्र बनवारीलाल निठारवाल को यह सफलता चौथे अटेंप्ट में मिली है। 2018 में उनका चयन आईइएस में हुआ था। सिविल सर्विस परीक्षा 2019 की तैयारी की लिए इंजीनियरिंग सर्विसेज से लीव लेकर फिर से तैयारी की और इस बार रैंकिग बेहतर हुई और सफलता मिल गई। सोहनलाल ने बताया कि उनके पिता बनवारीलाल साधारण किसान हैं तथा मां श्रवणी देवी गृहणी हैं।

झुंझुनूं के मानुष : 146वीं रैक

तीन बार मामूली नंबरों से चूके, तैयारी में जुटे रहे, लक्ष्य हासिल कर दिखाया यूपीएससी की सिविल सर्विसेज परीक्षा 2019 में जिले के पांच होनहारों ने सफलता हासिल की है। कारी गांव के मानुष पारीक ने 146वीं रैंक हासिल की। मानुष का यह चौथा अटेंप था। मानुष ने 2015 में पहली बार एग्जाम दी, असफल रहे। इसके बाद 2016, 2017 व 2018 में कुछ नंबर से मानुष रह गए। इस समय मानुष घनघोर निराशा में थे, लेकिन मानुष यह सोचकर अपना हौसला बढ़ाते रहे कि कुछ नंबर से ही वे चूक रहे हैं। इस बीच परिवार के सपोर्ट से वह फिर तैयारी में जुट गए। पिता मनोज, माता ऊषा व चाचा मुकेश व बहन बुलबुल ने पूरा साथ दिया और हौसला बढ़ाया। इस बार उनकी सालों की मेहनत रंग लाई। इधर, शिमला के भाखरी के अभिषेक यादव ने 288वीं, कुमावास के निकास खीचड़ ने 234वीं, कलाखरी की दीक्षा यादव ने 342वी और नवलगढ़ के देवीपुरा बणी के अाईपीएस विजयसिंह गुर्जर ने 625वीं रैंक हासिल की।

चूूरू के बिजली निरोधक थाने में हैंड कांस्टेबल के बेटे विक्रम की 450वीं रैंक
चूरू के बिजली निरोधक थाने के हैड कांस्टेबल प्यारेलाल के पुत्र विक्रम सिहाग ने सिविल सर्विस की परीक्षा में ऑल इंडिया स्तर पर 450वीं रैंक हासिल की। उसने ये सफलता दूसरे प्रयास में हासिल की। उसने बताया कि इस सफलता में इंटरनेट उसका सहायक बना। इसके माध्यम से वह हर प्राब्लम का समाधान कर लेता। बतादें कि विक्रम सिहाग सीकर जिले के नेठवा के निवासी है।

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