मत्स्य विकास विभाग ने जारी की एडवाइजरी:रजिस्टर्ड हैचरी से ही खरीदें बीज, अधिकृत व्यक्ति से ही मार्गदर्शन लें झींगा पालक

चूरू2 महीने पहले
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जिले में झींगा पालन करने वाले किसानों को आ रही विभिन्न तकनीकी कठिनाइयों को देखते हुए मत्स्य विकास विभाग ने सक्षम अधिकृत व्यक्तियों से ही तकनीकी मार्गदर्शन लेने तथा सीएए रजिस्टर्ड हैचरी से ही उच्च क्वालिटी बीज व फीड खरीदने की सलाह दी है। मत्स्य विकास अधिकारी इरशाद अली ने बताया कि झींगा पालन से संबंधित जानकारी के लिए किसान 01552 222791 तथा 8696460733 पर संपर्क कर सकते हैं।

विभागीय वेब पोर्टल पर विजिट किया जा सकता है। विभाग की ओर से झींगा पालन के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इकाई लागत आठ लाख रुपए प्रति हैक्टेयर तथा प्रथम वर्ष इनपुट लागत छह लाख रुपए प्रति हैक्टेयर पर अनुदान की योजना है, जिसमें सामान्य को 40 फीसदी तथा एससी-एसटी व महिलाओं व सहकारी संस्थाओं को 60 फीसदी अनुदान देय है।

पॉलीथिन लाइनिंग के लिए दो लाख रुपए प्रति हैक्टेयर सभी वर्गों को अतिरिक्त सरकारी सहयोग दिया जा रहा है। इसी प्रकार फिश फीड इकाई की स्थापना दो से पांच क्विंटल उत्पादन क्षमता लागत 30 लाख रुपए पर भी सामान्य को 40% तथा एससी-एसटी, महिलाओं व सहकारी संस्थाओं को अधिकतम 60% अनुदान दिया जा रहा है।

पोस्ट हार्वेस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए आइस प्लांट या कोल्ड स्टोरेज निर्माण पर सामान्य किसान के लिए 40 तथा एससी-एसटी, महिला व सहकारी संस्थाओं के लिए 60% तक अनुदान देय है। रिटेल फिश मार्केट की आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए, मोबाइल-रिटेल आउटलेट कियोस्क की स्थापना, रेफ्रिजरेटेड, कंटेनर 10 टन क्षमता के लिए, इंसुलेटेड ट्रक छह टन क्षमता के लिए, ऑटोरिक्शा मय आइस बॉक्स, मोटर साईकिल मय आइस बॉक्स तथा साईकिल मय आईस बॉक्स पर भी सामान्य को 40 प्रतिशत तथा एससी-एसटी, महिलाओं व सहकारी संस्थाओं को 60 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मछुआरा कल्याण कार्यक्रम के तहत सक्रिय मछुआरों को दुर्घटना बीमा किया जाता है, जिसमें प्रीमियम सरकार द्वारा वहन किया जाता है। मृत्यु अथवा पूर्ण स्थाई विकलांगता पर बीमित राशि दो लाख रुपए तथा आंशिक स्थाई अपंगता पर बीमित राशि एक लाख रुपए का भुगतान किया जाता है। चिकित्सा पर अधिकतम 10 हजार रुपए का पुनर्भरण देय है।

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