ढाई साल से कमरे में पड़ी है एसडीपी मशीन:डेंगू मरीजों को 2 की बजाय 6 घंटे में मिल रही प्लेटलेट्स

चूरू2 महीने पहले
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ब्लड बैंक में कपड़े से ढकी एसडीपी मशीन। - Dainik Bhaskar
ब्लड बैंक में कपड़े से ढकी एसडीपी मशीन।
  • डीबीएच ब्लड बैंक में जनवरी-19 से धूल फांक रही 30 लाख की सिंगल डोनर प्लेटलेट्स मशीन
  • चूरू शहर में रोज 15 से 20 डेंगू मरीज पहुंच रहे अस्पताल, शहर में रोज चाहिए 100 यूनिट से ज्यादा ब्लड

चूरू में डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अब तक सरकारी रिकाॅर्ड के अनुसार आंकड़ा 250 के पार चला गया है, जबकि शहर में अभी भी रोज 15 से 20 डेंगू के मरीज सरकारी और निजी अस्पताल के आउटडोर में आ रहे हैं। डेंगू के मरीजों के मरीजों की प्लेटलेट्स डाउन होने पर उन्हें तत्काल प्लेट्लेट्स की जरूरत होती है। कई बार तो प्लेटलेट्स एकाएक डाउन को लेकर अस्पताल से रैफर तक कर दिया जाता है।

आश्चर्य की बात ये है कि मेडिकल कॉलेज से जुड़े डीबी अस्पताल में 30 लाख की सिंगल डोनर प्लेटलेट्स मशीन ढाई साल से ब्लड बैंक में मौजूद है, पर इसका मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए आज तक उपयोग नहीं किया। बुधवार को अस्पताल के निरीक्षण पर आए उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने भी नाराजगी जताई।

भास्कर ने इस मामले पड़ताल की तो पता चला कि एसडीपी मशीन एक जनवरी 2019 से डीबी अस्पताल में है, लेकिन इसका अभी उपयोग नहीं किया गया। इसका कारण पैथोलोजी स्टाफ की कमी बताया गया, जबकि मेडिकल कॉलेज में तो पूरा पैथोलोजी डिपार्टमेंट है। डीबीएच में फिलहाल आरडीपी विधि से प्लेटलेट्स निकाला जाता है। इसमें समय और डोनर अधिक ले जाने पड़ते हैं।

मसलन डेंगू मरीज को डॉक्टर ने चार-पांच यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह देने पर उसे चार डोनर एक साथ ले जाने पड़ेंगे, जबकि सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) में केवल एक मरीज की जरूरत होती है। फिलहाल एसडीपी मशीन ब्लड बैंक के कोने में पड़ी है। अस्पताल सुप्रीडेंट डॉ. शरद जैन का कहना है कि एसडीपी मशीन को पैथोलोजी स्टाफ की कमी के कारण शुरू नहीं किया गया। बतादें कि एसडीपी पर एक डॉक्टर एवं तीन-चार टेक्नीकल स्टाफ की हर समय जरूरत रहती है।

सिंगल डोनर से 60 हजार प्लेटलेट्स तक बढ़ती हैं, आरडीपी से सिर्फ 5 हजार

रैंडम डोनर प्लेटलेट्स (RDP)

डेंगू के मरीजों की प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए फिलहाल आरडीपी विधि से प्लेटलेट्स निकाला जाता है। इसमें कम से कम छह घंटे लगते हैं। एक बार रक्तदान करने के बाद तीन माह बाद ही फिर से रक्तदान किया जा सकता है।

फायदे : ये प्लेटलेट्स डोनर उपलब्ध करवाने पर सरकारी अस्पताल में फ्री है और निजी में 700 रुपए लगते हैं।

नुकसान : एक यूनिट आरडीपी चढ़ाने पर सिर्फ 5 हजार प्लेटलेट्स काउंट बढ़ते हैं। इस वजह से कई यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ते हैं। यानी डेंगू के मरीज को डॉक्टर ने चार यूनिट ब्लड चढ़ाने के लिए सलाह दी है, तो मरीज या उसके परिजनों को प्लेट्लेट्स के लिए चार डोनर ले जाने पड़ेंगे।

सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (SDP)

एसडीपी ब्लड के जरिए एक घंटे में प्लेटलेट्स निकालता है। डोनर के शरीर से ब्लड निकालकर मशीन में ले जाया जाता है वहां से प्लेटलेट्स अलग होकर मरीज के शरीर तक पहुंचता है और बाकि ब्लड दोबारा डोनर के शरीर में पहुंचाया जाता है। डोनर 72 घंटे बाद दोबारा प्लेटलेट्स दे सकता है।

फायदा- इस विधि से प्लेटलेट्स चढ़ाने से मरीज में 50 से 60 हजार तक प्लेटलेट्स बढ़ता है। फिलहाल ब्लड निकालने के बाद रैंडम डोनर प्लेटलेट्स (आरडीपी) विधि से प्लेटलेट्स निकाला जाता है। एक ही डोनर से पर्याप्त प्लेटलेट्स ली जा सकती है। एक से दो घंटे में जरूरत की पूरी प्लेटलेट्स ली जा सकती है।

नुकसान : एसडीपी से सिंगल डोनर के जरिये प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए 9500 रुपए मरीज के खर्च होते हैं। इसकी किट के 7500 रुपए है।
ये हो सकता है सिंगल प्लेटलेट्स डोनर : जो 6 माह से बीमार नहीं हुआ हो। डोनर का वजन कम से कम 55 किग्रा हो। डोनर का एचबी लगभग 14 या 15 हो।

डीबी अस्पताल में इसलिए जरूरी एसडीपी :

फिलहाल अस्पताल के ब्लड बैंक से रोज 30 से 40 यूनिट ब्लड प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए जाता है। अभी आरडीपी से ये काम हो रहा है, जिसमें एक मरीज को तीन से चार डोनर लाने पड़ते हैं। प्लेटलेट्स के लिए चार से छह घंटे का इंतजार करना पड़ता है। एसडीपी मशीन चालू हो जाए तो मांग के अनुसार जरूरतमंदों को प्लेटलेट्स पर्याप्त मात्रा में दिया जा सकता है।

राठौड़ बोले-लापरवाह है अस्पताल प्रबंधन, 30 लाख की मशीन को इंस्टॉल तक नहीं किया
उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने बुधवार को अस्पताल का निरीक्षण किया तथा डेंगू के मरीजों के प्लेटलेट्स के लिए एसडीपी मशीन शुरू नहीं करवाने पर नाराजगी जताई। राठौड़ ने कहा कि चूरू में प्रदेश में सबसे ज्यादा डेंगू मरीज आ रहे हैं और अस्पताल प्रबंधन लापरवाह बना हुआ। ढाई साल पहले आई 30 लाख की लागत की एसडीपी काे इंस्टॉल तक नहीं करवाया गया।

सीनियर फिजिशियन डॉ. आरिफ का कहना है कि डेंगू में शरीर के नसों (आर्टरी) की अंदर की परत खुरदरी हो जाती है और जब खून आर्टरी से गुजरता है तो चिकनाहट लिए हुए खून की प्लेटलेट्स उस खुरदरे स्थान पर चिपक जाती हैं। इससे खून में प्लेटलेट्स की मात्रा कम होती जाती है।

सीधी बात डॉ. एमएम पुकार, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज

स्टाफ नहीं होने से मशीन शुरू नहीं हुई : प्राचार्य

डेंगू मरीजों को सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की सुविधा क्यों नहीं मिल रही है, जबकि मशीन ब्लड बैंक में है?
प्रिंसिपल-पहली बात ये है कि इसका स्टाफ नहीं है। दूसरी बात ये मरीज के लिए महंगी है। इसकी अब तक जरूरत नहीं है।

लेकिन एसडीपी से प्लेटलेट्स आरडीपी से 10 गुना ज्यादा बढ़ती है?
-ये सही है, मगर महंगी भी बात तो है।

ढाई साल से ब्लड बैंक में मशीन पड़ी है, चालू क्यों नहीं करवाई? क्या अस्पताल की लापरवाही नहीं है?
प्रिंसिपल-स्टाफ नहीं मिलने से चालू नहीं हुई। अब एक-दो दिन में शुरू करवा देंगे।

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