आत्महत्या / एसपी के नाम सुसाइड नाेट और दाेस्त वकील काे वाॅट्सएप मैसेज में एसएचओ ने लिखा-मुझे गंदी राजनीति के भंवर में फंसाने की कोशिश, एमएलए बहुत बकवास

In the WhatsApp message of SP's Suicide Nate and a lawyer, the SHO wrote - Trying to trap me in the vortex of dirty politics, MLA is a lot of nonsense
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In the WhatsApp message of SP's Suicide Nate and a lawyer, the SHO wrote - Trying to trap me in the vortex of dirty politics, MLA is a lot of nonsense

  • राजगढ़ सीआई के फंदे पर लटकने के बाद अब सियासत भी गरमाई-आरोपों के कटघरे में विधायक से लेकर पुलिस अधिकारी भी
  • विधायक कृष्णा बोलीं-विष्णुदत्त के बारे में सुना खूब था, व्यक्तिगत मुलाकात कभी नहीं हुई
  • ...लेकिन जिंदा है सबसे बड़ा सवाल-आखिर वो कौनसी गंदी राजनीति, कैसा प्रेशर जिसकी वजह से जिले के बेस्ट सीआई ने मौत का रास्ता चुना

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 06:17 AM IST

चूरू. राजगढ़ पुलिस थाने के एसएचओ विष्णुदत्त विश्नोई शुक्रवार शाम कस्बे में हुई फायरिंग और एक की मौत के मामले में जुटे थे। इस मामले को लेकर वे शुक्रवार रात 3 बजे थाने गए थे। इसके बाद वे थाने स्थित क्वार्टर के कमरे में साेने चले गए। खाना नहीं खाया, केवल दूध पीया। शनिवार सुबह 9 बजे तक कमरे से बाहर नहीं आए तो उनके कुक कन्हैयालाल ने थाने में सूचना दी। दरवाजा तोड़कर देखा तो वे फंदे पर झूलते मिले। उनकी आत्महत्या के मामले में कई सवाल उठ रहे हैं। कमरे में  दो सुसाइड नोट मिले जिनमें एक एसपी के नाम, दूसरा माता-पिता के नाम। 
एसपी के नाम सुसाइड नोट में लिखा है कि मेरे चारों तरफ इतना प्रेशर बना दिया गया कि मैं तनाव नहीं झेल पाया। सुबह उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर एक व्हाट्स मैसेज वायरल हुआ। दावा किया गया कि यह उन्होंने अपने वकील दोस्त गोवर्धनसिंह को भेजा था। जिसमें लिखा कि उन्हें गंदी राजनीति के भंवर में फंसाने की कोशिश की जा रही है। और वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेना चाहते हैं।

इसी चैटिंग में एक और मैसेज है जिसमें लिखा कि एमएलए बकवास है। थाना भवन के निर्माण में उन पर साढ़े तीन करोड़ रुपए के गबन का आरोप लगाया जा रहा है। इसके बाद पूरे प्रदेश में सियासत गरमा गई। थाने के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया, जिसमें विधायक पर भी आरोप लगाए।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं व बसपा नेता मनोज न्यांगली के साथ उनके कार्यकर्ता अलग-अलग धरने पर बैठ गए और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की । पुलिस को मौके से शव भी नहीं उठाने दिया। मामले में देर शाम तक यह आरोप भी लगाए गए कि सीआई के खिलाफ पिछले 2 माह में 4 से ज्यादा जांचों के नाम पर दबाव बनाया गया।
सवाल 1 : क्या विश्नोई पर राजनीति दबाव था, विधायक कृष्णा पूनिया की भूमिका थी?
क्यों
: भाजपा और अन्य नेताओं ने सवाल उठाए हैं। उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि प्रदेश के 13 थानों में ईमानदार पुलिस अधिकारी की छवि का थानाधिकारी फांसी लगाने जैसा काम नहीं कर सकता। निश्चय ही राजनीतिक व पुलिस अफसरों का दबाव था। भूमिका की जांच होनी चाहिए। वे सीएमओ के अधिकारियों के मार्फत किस तरह का दबाव बनाए हुई थीं। सांसद राहुल कस्वां ने कहा कि ईमानदार पुलिस अफसर की मौत से हर कोई हतप्रभ है। न्यायिक जांच होनी चाहिए। पूर्व सांसद रामसिंह कस्वां ने कहा कि 40 साल के राजनीतिक इतिहास में पहली बार किसी ईमानदार अफसर के फांसी लगाकर आत्महत्या करने का वाकया उनके सामने आया।
जवाब : भास्कर ने राजगढ़ विधायक कृष्णा पूनिया से बात की। उन्होंने कहा, विष्णुदत्त के बारे में उन्होंने सुना खूब था, मगर व्यक्तिगत तौर पर कभी मुलाकात नहीं हुई। अधिकारियों के साथ सामूहिक बैठक में जरूर 5-7 बार आमने सामने हुए होंगे। फोन पर चार-पांच बात हुई होगी। जहां तक राजनीतिक प्रेशर का सवाल है, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी है। मैंने सीएम अशोक गहलोत से बात कर न्याय की मांग की है।
सवाल-2 : क्या सीआई तनाव में थे?  स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का दबाव था? 
क्यों :
हाईकोर्ट में एडवोकेट गोवर्धन सिंह ने विश्नोई से वाट्सएप पर हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट वायरल किया है। इसमें थानाधिकारी ने कहा है कि उन्हें भी गंदी राजनीति के भंवर में फंसाने की कोशिश हो रही है। वे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन दे रहे हैं। गंदी राजनीति है और अफसर कमजोर हैं।
सच : भास्कर ने गोवर्धन सिंह से बात की। उन्होंने दावा किया कि वे खुद को माफ नहीं कर पाएंगे। बातचीत के बाद ही मैं राजगढ़ चला जाता तो यह घटना नहीं होती। उन्होंने कहा कि यह आत्महत्या दिखने में हो सकती है, लेकिन यह सोच समझकर की गई हत्या है। सीबीआई से कम जांच हुई तो सच्चाई कभी सामने नहीं आएगी। मैंने बातचीत की कोशिश की थी, लेकिन वे मर्डर मामले में व्यस्त थे।
सवाल 3 : सीआई को परेशान करने के लिए उनकी लगातार शिकायतें हुईं, जांच शुरू हुई? 
क्यों :
यह बातें भी सामने आ रही है कि थानाधिकारी को परेशान करने के लिए उन्हें नोटिस दिए जा रहे थे। उन्हें बार-बार बुलाकर परेशान किया जा रहा था।
सफाई : डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने कहा-पूरा पुलिस महकमा उनकी मौत से दुखी है। सीआई को किसी ने कोई नोटिस नहीं दिया था। वकील से बातचीत की भी जांच होगी। वहीं आईजी ने भी किसी प्रकार की जांचों से अनभिज्ञता जताई है। 
सवाल 4 : 13 पुलिस थानों में रहे। आईजी से लेकर एसपी तक सबके चहेते थे तो आत्महत्या क्यों की? 
क्यों :
विश्नाेई बीकानेर, संगरिया से लेकर जयपुर तक में कार्यरत रहे थे। संगरिया में उन्हें सिंघम के नाम से पुकारते हैं। चूरू जिले में वे पहले सब इंस्पेक्टर व दूसरी पारी में इंस्पेक्टर के रूप में विभिन्न थानों में कार्यरत रहे। उनकी सेवाकाल को करीब 21 साल हो गये थे। वे आईजी से लेकर एसपी के चेहते अफसरों में शामिल थे। बताया जाता है कि एसपी से उन्होंने राजनीतिक दबाव की बात शेयर की थी। सुसाइड नोट की भाषा से भी यह लगता है कि जिस प्रेशर को झेल नहीं पाने की बात उन्होंने की वह विष्णुदत्त को भी पता होगी और एसपी को भी। 
सच : डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने कहा-सीआई विश्नोई बेस्ट पुलिसकर्मियों में से एक थे। हर पुलिस अधिकारी उन्हें लेना चाहता था। उन्होंने आत्महत्या क्यों की, जांच के बाद ही सभी बातें सामने आ सकेगी। 
सवाल 5 : क्या पुलिस जवानों के तबादले से नाराज थे विश्नोई?
क्यों :
राजगढ़ थाने के एक हैड कांस्टेबल, दो कांस्टेबल व हमीरवास एएसआई को 22 को लाइन में बुलाया गया था। इसमें हमीरवास एसआई सुमेर मीणा, लसेड़ी टोल पर अटैच लगाया गया हैड कांस्टेबल सज्जन स्वामी व चालक कांस्टेबल राजेश कुमार की 22 मई को लाइन में आमद हो गई थी। कांस्टेबल मनोज मेघवाल की अभी लाइन में आमद नहीं हुई। थाने के स्टाफ को लाइन में बुलाए जाने वाले दिन ही एसएचओ ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 
सच : पुलिस इस मामले पर अभी कुछ नहीं कह रही है। सवाल उठ रहे हैं कि विधायक ने मुख्यमंत्री से बात करके इन लोगों को लाइन में लगाया था। 
सवाल 6 : क्यों लिखा कि एमएलए बहुत बकवास है?
क्यों
: सोशल मीडिया में एक वाट्सएप स्क्रीनशॉट वायरल हुआ। दावा है कि थानाधिकारी ने लिखा है कि एमएलए बहुत बकवास है। मैंने पुलिस स्टेशन का नया भवन बनवाया। एमएलए बोल रही है कि 41 लाख रुपए लगे। पांच करोड़ रुपए का कलेक्शन किया। 1.5 करोड़ लगे और 3.5 करोड़ मैं खा गया। आज तक एक रुपया रिश्वत नहीं ली मैंने।
सच : विधायक का दावा है कि वह कभी एसएचओ से मिली नहीं। अगर ऐसा था तो सीआई ने यह बात क्यों लिखी? अंदेशा है कि उनके बीच समन्वय तो नहीं था। 

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