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13 से 22 जनवरी तक दी जाएगी ट्रेनिंग:नवाचार; जिले के 1027 शिक्षक पहले खुद पढ़ेंगे साइबर सुरक्षा का पाठ, फिर कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को देंगे ट्रेनिंग

चूरू8 दिन पहले
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  • प्रदेश में बढ़ते साइबर क्राइम के मामलों की रोकथाम के लिए लिया निर्णय,

प्रदेश में लगातार बढ़ते साइबर क्राइम व ऑनलाइन ठगी से बचाव के लिए शिक्षा विभाग अब विद्यार्थियों को जागरूक करेगा।। प्रत्येक स्कूल से एक शिक्षक को ट्रेनिंग देकर साइबर क्राइम की बारीकियों से रूबरू करवाया जाएगा। समग्र शिक्षा विभाग की ओर से किए जा रहे इस नवाचार के तहत जिले के कुल 1390 प्रारंभिक व माध्यमिक स्कूलों में से 1027 स्कूलों के शिक्षकों को 22 जनवरी तक ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें प्रारंभिक के 523 व माध्यमिक के 504 स्कूल शामिल हैं। ट्रेनिंग की शुरुआत गुरुवार से की गई तथा पहले दिन चूरू व रतनगढ़ ब्लॉक के शिक्षकों को दो सत्र में 50-50 के दल बनाकर प्रशिक्षण दिया। जयपुर से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके ट्रेनर खुर्शीद खान व शिवराम मीना प्रारंभिक व नानूराम मेघवाल व मुकेश कुमार माध्यमिक के शिक्षकों को साइबर क्राइम के प्रति जागरूक करेंगे। ^एबीईईओ अर्जुनसिंह ने बताया कि कई बार विद्यार्थी अज्ञानता के कारण साइबर क्राइम के जाल में फंस जाते हैं। इसके मद्देनजर राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया है। जिले के शिक्षकों को 13 से 22 जनवरी तक ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है। बच्चों को सिखाएंगे ऑनलाइन फ्रॉड से बचना व सोशल मीडिया का शिष्टाचार उपयोग

वर्तमान दौर में बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल देना अभिभावकों की मजबूरी बन गया है। बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के बाद इंटरनेट पर दिनभर व्यस्त रहते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के साथ दोस्ती कर लेते हैं या अनजान लिंक्स पर क्लिक कर लेते हैं। यही आगे चलकर उनके लिए कई बार मुसीबत भी बन रही है। प्रशिक्षण के माध्यम से कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को ऑनलाइन सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं जैसे उपकरणों की सुरक्षा, फोन व ऑनलाइन घोटालों से सावधानी, सोशल मीडिया शिष्टाचार से उपयोग, ऑनलाइन फ्रॉड के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा।

इन चार खतरों को समझेंगे स्टूडेंट्स साइबर ग्रूमिंग : हैकर फर्जी अकाउंट बना फंसाते हैं। शोषण के उद्देश्य से लालच दे विद्यार्थियों से भावनात्मक संबंध बनाते हैं। साइबर स्टॉकिंग : यानी इलेक्ट्रॉनिक साधनों से किसी पर निगरानी रखना। साइबर स्टॉकिंग यौन उत्पीड़न करने के इरादों से की जाती है। गेम्स से नुकसान : इनकेे साथ स्पैम, वायरस डाउनलोड हो जाते हैं जो कंप्यूटर, मोबाइल फोन को प्रभावित करते हैं। साइबर बुलिंग : इंटरनेट या मोबाइल टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके घटिया, तकलीफदेह संदेश या ईमेल भेजकर परेशान किया जाता है। {साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग देने के लिए विभाग की ओर से एक पुस्तिका भी तैयार करवाई गई है। इसमें 45 मिनट के ऑनलाइन सत्र के जरिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन समस्याओं से लड़ने और उबरने की क्षमता का निर्माण करना सिखाया जाएगा। प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों को यह पुस्तिका वितरित की जाएगी।

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