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मृत्यु पर गम बांटिए..!:चूरू के राजोतिया परिवार से सीख लीजिए, 56 साल पहले बंद कर दिया मृत्युभोज, परिवार के लोग सामाजिक कामों में करते हैं खर्चा

चुरू10 महीने पहले
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  • समाज आगे आने लगे, चूरू सहित जिलेभर में करवा रहे हैं विभिन्न सामाजिक काम

मृत्यु भोज को बंद करने के लिए लोगों में जागरूकता आने लगी है, वे अब दैनिक भास्कर की सामाजिक बदलाव के लिए इस पहल को लेकर खुलकर सहमति जताने लगे हैं। कई सामाजिक संगठन भी इस कुप्रथा को बंद करने के लिए आगे आने लगे है। युवा भी पीछे नहीं है। ऐसा नहीं है कि मृत्यु भोज को बंद करने को लेकर आज से पहले लोगों ने पहल नहीं की, पर सामाजिक रूप से एकरूपता नहीं देखने को मिली।

जिले में मृत्यु भोज बंद करने के लिए कई समाज में परिवारों में ऐसी पहल बहुत पहले ही हो चुकी है। लांबा की ढाणी ऐसा गांव है, जहां मृत्यु भोज नहीं होता। ऐसे कई गांव इस मुहिम में जुड़ने लगे है। चूरू तहसील के गांव ढाढरिया, ढाढरिया बणीरोतान, धोधलिया, घांघू, दांदू व जसवंतपुरा सहित कई गांवों में विभिन्न समाज के लोगों इस मुहिम को चालू कर रखा है।

माताजी की इच्छा पर उनके जीवित रहते मुक्तिधाम में लगाई ओपन जिम
चूरू शहर के वेदप्रकाश राजोतिया ने बताया कि उनके परिवार में 1964 से मृत्यु भोज बंद है। दादा जगनाराम की मृत्यु पर पिताजी ने मृत्युभोज नहीं करने का संकल्प लिया, तब से परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु पर भोज नहीं होता। ये कुरीति है, इसलिए इसे बंद करने का निर्णय लिया। पिछले साल माताजी की इच्छा पर उन्हीं के हाथों से बैकुंठ मुक्तिधाम में करीब 1.25 लाख रुपए खर्च करके ओपन जिम शुरू की। 15 फरवरी 2020 को उनका निधन हो गया है।

माथुर ने माताजी की स्मृति में मुक्तिधाम में टिनशैड लगवाया
रिटायर्ड बैंक अधिकारी लॉयन शैलेंद्र माथुर ने भी परिवार में मृत्यु भोज बंद कर दिया है। फरवरी 2017 में उनकी माताजी का निधन हुआ, तो उनकी स्मृति में बैकुंठ मुक्तिधाम में 70 हजार रुपए खर्च कर टिनशैड लगवाया। अब मुक्तिधाम में जाने वालों को धूप में नहीं बैठना पड़ता। माथुर का कहना है कि सामाजिक हित के काम कराने से सुकून मिला।

यदि समाज और संगठन इस कुप्रथा को पूरी तरह बंद करने के लिए सहमत हैं तो पदाधिकारी समाज की सहमति हमें वॉट्सएप पर भेज सकते हैं। हम आपकी सहमति को प्रकाशित करेंगे जिससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिल सके। जो पदाधिकारी नहीं हैं वे भी अपनी राय दे सकते हैं। मृत्यु भोज में शामिल नहीं होने का निर्णय लेने वाले भी सिर्फ सहमत लिखकर आप हमें 9460927880 पर वॉट्सएप भेज सकते हैं।

मुहिम में इन्होंने जताई सहमति
चूरू के वार्ड 6 में पूर्ण मल तंवर का 6 जुलाई को निधन हो गया। राज्य सरकार के निर्णय के बाद परिवार ने मृत्यु भोज नहीं करने का निर्णय लिया। इसी तरह कीतासर बीदावतान स्कूल की अध्यापिका अनिता कुमारी, राजलदेसर के महेश कुमार नाई, रतनगढ़ के भंवरलाल टेलर,ग्लोबल युवा संस्थान के अध्यक्ष आरए शर्मा, दूधवाखारा, राजगढ़ तहसील के ढाणी बड़ी के सचिन मेहरा, कानूता के आबिद छींपा, रतनगढ़ के यालसर के रामोतार, हुडेरा के मगाराम प्रजापत, बसंत कुमार ढाणा मौजा, राजगढ़,  जितेंद्रसिंह, बोबासर, विनोद कुमार माली, रतनगढ़, प्रतापसिंह परिहार, रतनगढ़, कमलसिंह गुर्जर, नवयुवक मंडल रतनगढ़ ने मृत्यु भोज बंद करने पर सहमति जताई है।

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