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तानों से परेशान 14 साल का बच्चा घर से भागा:9वीं क्लास में है नाबालिग,पढ़ाई में कमजोर होने पर माता-पिता की डांट से था परेशान,जोधपुर-दिल्ली ट्रेन में मिला,आरपीएफ ने चाइल्ड हेल्प लाइन को सौंपा

चूरू10 दिन पहले
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रतनगढ़ में नाबालिग को लेने पहुंची चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम। - Dainik Bhaskar
रतनगढ़ में नाबालिग को लेने पहुंची चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम।

पढ़ाई में कमजोर होने के तानों से नाराज एक नाबालिग घर से भाग गया। गुजरात का रहने वाला 14 साल का बच्चा पहले ट्रेन से जोधपुर आया। उसके बाद जोधपुर-दिल्ली ट्रेन में चढ़ गया। रास्ते में टीटी ने बच्चे को पकड़ लिया। टिकट नहीं मिलने पर टीटी ने रतनगढ़ आरपीएफ को सौंप दिया। आरपीएफ ने बच्चे को चाइल्ड हेल्प लाइन को सौंप दिया। जहां से उसे बाल कल्याण समिति में पेश किया गया। परिजनों को सूचना दी गई है। पिता ने बच्चे की गुमशुदगी का मामला अहमदाबाद में दर्ज करवाया हुआ है।

आठ सितम्बर को घर से भागा
आरपीएफ एसआई रमेश कुमार चौधरी ने बताया कि बच्चा घबराया हुआ था। चाय-बिस्कीट खिलाकर उसे नॉर्मल किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि वह अहमदाबाद,गुजरात का रहने वाला है। वह नवीं क्लास में पढ़ता था। पढ़ाई में कमजोर होने के कारण मम्मी-पापा ताने देते थे। तानों से परेशान होकर वह यू-ट्यूब पर गरीबी से अमीरी तक पहुंचे बड़े लोगों के वीडियो देखने लगा। खुद को उनकी तरह बनाने का सपना लेकर वह आठ सितम्बर को घर से निकल गया।

बाल सम्प्रेष्ण गृह भेजा
चौधरी ने बताया कि बच्चा पहले ट्रेन से जोधपुर पहुंचा। वहां से जोधपुर-दिल्ली ट्रेन में सवार हो गया। आगे कहां जाना है,खुद बच्चें को नहीं पता था। टिकट के बिना मिलने पर टीटी ने रतनगढ़ आरपीएफ को बच्चा सौंप दिया। नाबालिग मिलने की सूचना चाइल्ड हेल्प लाइन को दी गई। हेल्प लाइन की रूकिया बानो,ज्योति बागड़ी व भूपेन्द्र सिंह ने नाबालिग को बाल कल्याण समिति में पेश किया। समिति ने नाबालिग को बाल सम्प्रेष्ण गृह भेज दिया है। बच्चे के परिजनों को सूचना दी गई है।

अहमदाबाद में दर्ज है अपहरण का मामला
एसआई रमेश कुमार चौधरी ने बताया कि नाबालिग के पिता से संपर्क किया गया है। पिता ने बताया कि 10 सितंबर की शाम कराटे क्लास लेने की बात कहकर घर से निकला था। आखिरी बार बच्चा कालुपुर रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी में देखा गया था। जिसके बाद बेटे के अपहरण को लेकर अज्ञात के खिलाफ मामला भी दर्ज करवाया था।

बच्चों से परामर्श कर समझाया जाता
चौधरी ने बताया कि 12 साल की नौकरी में अब तक वह ढाई साल की बच्ची से लेकर 21 साल के युवक को उनके परिजनों से मिला चुके है। कई बार नाबालिग बच्चे छोटी-छोटी बातों को लेकर अपने घर से निकल जाते है। तब उनके साथ परामर्श कर समझाया जाता है और घर वालों तक पहुंचा दिया जाता है।

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