शून्यकाल के दौरान सांसद:सांसद ने ग्वार, मोठ व ग्वारपाठा की फसल को एमएसपी में शामिल करने का मुद्‌दा उठाया

चूरू2 महीने पहले
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सांसद राहुल कस्वां ने मंगलवार को संसद में ग्वार, मोठ व ग्वारपाठा की फसल को एमएसपी में शामिल करने का मुद्दा उठाया। शून्यकाल के दौरान सांसद कस्वां ने सदन को बताया कि चूरू लोकसभा क्षेत्र के साथ-साथ नागौर, बीकानेर और हनुमानगढ़ जिले में ग्वार की पैदावार सबसे ज्यादा होती है। ग्वार से बनने वाले गम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक मांग रहती है। दवाई बनाने के साथ-साथ अमेरिका में जमीन से तेल निकालने के लिए भी गम का प्रयोग किया जाता है। सांसद ने बताया कि इस फसल को लेने वाले अधिकतर किसान चूरू लोकसभा क्षेत्र से आते हैं। ऑफ सीजन में जब इसकी फसल पैदा नहीं होती, उस समय फसल के भाव आसमान छूने लगते हैं। इस कारण किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ-साथ मोठ भी एक मुख्य फसल के रूप में मानी जाती है। जिसके भाव में भी उतराव चढ़ाव का फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है। चूरू लोकसभा क्षेत्र में ग्वारपाठा भी पैदा किया जाता है। इन तीनों फसलों के लिए सरकार द्वारा एमएसपी की घोषणा नहीं की जा रही है, जिसके परिणाम स्वरूप किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्वार, मोठ एवं ग्वारपाठा फसलों को एमएसपी में शामिल किया जाए। साथ ही इनकी खरीद भी की जाए।

रतनगढ़ | गांव दाउदसर में सहकारी उर्वरक संस्था इफको के तत्वावधान में मंगलवार को किसान सभा का आयोजन किया गया। इस दाैरान इफ्को मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक चूरू सोहनलाल सहारण ने कृषि क्षेत्र में विश्व की नवीनतम खोज नैनो यूरिया के अविष्कार को नींव का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया के द्वारा किसान आधी मात्रा में यूरिया का उपयोग कर दो स्प्रे खड़ी फसल पर करके 30 से 40 दिन व 60 से 70 दिन की अवस्था में कम लागत में अधिक पैदावार लेने के साथ ही स्वच्छ पर्यावरण व स्वस्थ मिट्‌टी भी रख सकते हैं। 500 एमएल की बोतल को 125 लीटर पानी में घोलकर एक एकड़ फसल में बारिक फव्वारे से स्प्रे करें। इस यूरिया के कणों की साइज बहुत सूक्ष्म होने के कारण पत्तों पर छिड़काव करने से पौधे द्वारा तुरंत खींच लेने से पौधों को कई दिनों तक नाइट्रोजन मिलता है। चूरू जिले की 23 सहकारी समिति व बिक्री केंद्रों पर अब तक सात हजार नैनो यूरिया बोतल किसानों को बिक्री के लिए उपलब्ध करवा दी गई हैं। इफ्को एमसी लोकेश गोदारा ने रबी पौध संरक्षण की जानकारी दी।

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