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हमारे होनहार:आरपीएससी ने मंगलवार देर रात जारी किए आरएएस के नतीजे, जिले के युवाओं ने अच्छी रैंक हासिल की, सबसे ज्यादा राजगढ़ तहसील के 8 का चयन

चूरू19 दिन पहले
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आरपीएससी ने मंगलवार देर रात राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा-2018 के परिणाम जारी किए। इसमें बुधवार शाम तक प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के 15 से ज्यादा युवाओं का चयन हुआ है। इनमें से कई युवाओं ने पहले ही प्रयास में सफलता पाई है। चूरू के गौरव बुढ़ानिया ने आरएएस परीक्षा में प्रदेश में 12वीं रैंक हासिल की। वहीं राजगढ़ तहसील के 8 युवाओं का चयन हुआ है। राजगढ़ में दो परिवारों में दो-दो सदस्यों का चयन हुआ। वहीं राजगढ़ की दो बेटी व दो बहू भी आरएएस बनी हैं। हमीरवास निवासी व एडीपीसी समसा चूरू रमेशचंद्र पूनिया के पुत्र व पुत्री ने आरएएस में चयनित होकर एक नया इतिहास कायम किया है। इससे पूर्व पूनिया की एक पुत्री भी आरएएस में चयनित हो चुकी है। पूनिया के दो पुत्रियां व एक पुत्र है, जो सभी आरएएस बन चुके हैं।

हाल ही में एडीपीसी पूनिया के पुत्र गौरव पूनिया व पुत्री डॉ. प्रभा पूनिया का सलेक्शन हुआ है। इसी प्रकार नवां निवासी व पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी कुलदीपसिंह पूनिया की पुत्री कुलज्योति पूनिया व पुत्रवधु मोनिका पूनिया का आरएएस में चयन हुआ है। कुलदीप के बेटे कमलदीप पूनिया पहले से ही आरटीएस हैं। खुड्‌डी, धोलिया, चुबकियाताल व मलवास गांव से एक-एक आरएएस बना है। चूरू तहसील से तीन, सरदारशहर से दो युवाओं का चयन हुआ है। सुजानगढ़ व रतनगढ़ क्षेत्र से एक-एक युवा आरएएस अधिकारी बने हैं।

12वीं रैंक लाने वाले चूरू के गौरव बोले-बाल अपराध रोकना व शिक्षा में सुधार प्राथमिकता

आरएएस परीक्षा में प्रदेश में 12वीं रैंक हासिल करने वाले चूरू के गौरव बुढ़ानिया की सफलता इसलिए भी मायने रखती है कि वे अप्रैल में खुद कोरोना संक्रमण से रिकवर हो चुके हैं। हालांकि संक्रमण से पहले वे आरएएस इंटरव्यू दे चुके थे। उनकी प्रतिभा का आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि वे आईएएस लिखित परीक्षा भी क्लियर कर चुके है और पांच अगस्त को इंटरव्यू है।

बचपन से प्रतिभाशाली रहे गौरव की सफलता के पीछे परिवार का पूर्ण सपोर्ट रहा, मगर सबसे ज्यादा मोटीवेट करने वाले उनके बड़े पापा श्रवण बुढ़ानिया (रिटायर लेखाधिकारी) आज नहीं हैं। वे पोस्टकोविड से उबर नहीं सके। उनका 11 दिन पहले निधन हो चुका है, मगर गौरव को गौरवशाली बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

बड़े पापा को याद करते हुए गौरव कहने लगे कि वे खुद का उदाहरण देकर उन्हें मोटीवेट करते कि गांव (कबीलसर, बिसाऊ) में दसवीं पास एकमात्र थे। उस समय उनके संघर्ष की कहानी से उन्हें प्रेरणा मिली और उन्होंने तय कर लिया कि वे बड़े पापा से एजुकेशन में एक-दो कदम आगे जाकर उनके सपने को साकार करेंगे। गौरव के पिता दूधवा मीठा में टीचर हैं। गौरव के मार्गदर्शक जयपुर के शिक्षक रघुवीर एवं आईएएस रामनिवास बुगालिया भी रहे। गौरव ने बताया कि उन्होंने विभिन्न कोचिंग संस्थानों से आरएएस परीक्षा के टॉपर की तैयारी एवं विभिन्न नोट्स आदि हासिल करके सफलता हासिल करना।

हमीरवास के गौरव काे पहले प्रयास में 167वीं रैंक मिली, बहन डॉ. प्रभा दूसरे प्रयास में बनीं आरएएस

सादुलपुर | गौरव पूनिया पुत्र रमेशचंद्र (एडीपीसी) निवासी हमीरवास ने प्रथम प्रयास में ही 167वीं रैंक हासिल की है। पिता शिक्षाधिकारी, मां शिक्षक व बड़ी बहन आरएएस होने से घर में शिक्षा का माहौल अच्छा रहा। गौरव बताते हैं कि माता-पिता, बहन के मार्गदर्शन में कड़ी मेहनत से मुकाम हासिल किया है। साहित्य पढ़ने में रूचि है। एडीपीसी रमेशचंद्र की बेटी डॉ. प्रभा ने 316 वीं रैंक हासिल की। डॉ. प्रभा बीडीएस हैं। पति चिड़ावा के अस्पताल में डॉक्टर हैं। प्रभा ने बताया कि 2013 में भी सफल नहीं हो सकी। बड़ी बहन प्रतिभा का जब आरएएस में सलेक्शन हुआ, तो उसने भी आरएएस बनने की ठान ली और इसके लिए दिन-रात अथक प्रयास भी किए।

नवां की कुलज्योति के तीसरे प्रयास में 309वीं रैंक, भाभी मोनिका दूसरे प्रयास में सफल

कुलज्योति पुत्री कुलदीप सिंह पूनिया (रिटा. डीईओ) निवासी नवां ने तीसरे प्रयास में 309वीं रैंक हासिल की है। बिट्स पिलानी में पढ़ाई के बाद आरएएस की तैयारी में जुटी रहीं। पिता व शिक्षिका माता कमलेश से मिले मार्गदर्शन से ही यह सफलता मिली है। रिटा. डीईओ कुलदीप पूनिया की पुत्रवधु माेनिका ने दूसरे प्रयास में 213वीं रैंक हासिल की है। पति कमलदीप मालूसर, नागौर में तहसीलदार हैं। माेनिका की शादी इसी वर्ष फरवरी में हुई थीं। सास-ससुर व पति के मार्गदर्शन व प्रोत्साहन से यह मुकाम हासिल किया है।

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