प्रगतिशील हो रहे हैं देश के किसान:5 साल में 4 से बढ़कर 80 हैक्टेयर हुआ अनार की खेती का रकबा

चूरूएक महीने पहले
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सुजानगढ़ के गांव करेजड़ा के किसान के खेत में खड़े अनार के पौधे। - Dainik Bhaskar
सुजानगढ़ के गांव करेजड़ा के किसान के खेत में खड़े अनार के पौधे।
  • जिले के किसान परंपरागत खेती के साथ बागवानी अपनाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे, नागौर, सीकर व बीकानेर के बाजार की शान बढ़ा रही है हमारे खेतों में उपजी अनार

सूखे व कम उत्पादन की मार झेलने वाली धोरों की धरा अब अनार की खेती के मामले में भी अपनी पहचान बना रही है। यहां के किसान अब परंपरागत खेती में सरसों, गेहूं, बाजरा, ग्वार, मूंठ-मोठ के साथ अनार की खेती भी कर रहे हैं। अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। यहां की सुनहरी मिट्‌टी में पैदा हो रहे अनार नागौर, सीकर, बीकानेर, नोयड़ा, गाजियाबाद सहित देश के अन्य क्षेत्रों के बाजारों की शान बढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार व कृषि उद्यानिकी विभाग के प्रयास से जिले में सर्वप्रथम वर्ष 2015-16 में चार हैक्टेयर में अनार की खेती शुरू हुई, जो अब बढ़कर 80 हैक्टेयर तक पहुंच चुकी है। बालू मिट्‌टी व धोरों की धरा में पैदा हो रही अनार स्वाद व पौष्टिकता के मामले में भी अन्य जगहों पर उत्पादित होने वाली अनार से बेहतर है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो जिले का मौसम व वातावरण अनार की खेती के अनुरूप है। यहां पर उत्पादित होने वाली अनार में महाराष्ट्र सहित अन्य क्षेत्रों से आने वाली अनार से अधिक मिठास होता है।

इसके अलावा बालू मिट्‌टी में सभी खनिज व पौष्टिक तत्व पर्याप्त मात्रा होने के कारण अनार के दाने स्वास्थ्यवर्धक व पौष्टिकता से भरपूर होते हैं। यहां उत्पादित अनार का औसत वजन भी 200 से 250 ग्राम तक है। बाजार में भी अलग-अलग गुणवत्ता के अनुसार प्रति किलो के भाव 80 से 120 रुपए तक मिल रहे हैं। किसान एक साल में अनार से दो से तीन बार उपज ले सकते हैं।

उद्यानिकी कृषि अिधकारी रामलाल शर्मा के अनुसार चूरू में अनार की खेती का रकबा लगातार बढ़ने का कारण यहां की जलवायु इसकी खेती के अनुरूप है। साल के 12 माह में से दो या तीन माह को छोड़ दें तो अधिकांश समय यहां की जलवायु गर्म रहती है, जो अनार के पौधों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। अनार के पौधे लगाने के बाद शुरुआती तीन साल तक किसान को पौधों की अच्छी देखभाल करनी पड़ती है। इसके बाद एक पौधा कम से कम 25 साल तक उपज देता है।

सरकार देती है 50 प्रतिशत तक अनुदान : कृषि विभाग उद्यानिकी सहायक निदेशक डॉ. मदनलाल ने बताया कि अनार की खेती पर सरकार भी किसानों को 50% तक अनुदान देती है। एक किसान अधिकतम चार हैक्टेयर में अनार की खेती कर सकता है। किसान को अधिकतम 30 हजार रुपए या लागत का 50% प्रति हैक्टेयर जो कम हो वो अनुदान दिया जाता है। बूंद-बूंद सिंचाई आवश्यक है। बूंद-बूंद सिंचाई पर भी अलग से 50% तक अनुदान देती है। पिछले कुछ सालों में जिले के किसानों का अनार की खेती के प्रति रुझान बढ़ा है।

अनार की खेती से इस साल 18 से 20 लाख की आय : रामप्रताप
सुजागनढ़ के गांव करेजड़ा के 32 वर्षीय प्रगतिशील किसान रामप्रताप ने अनार की खेती से इस साल 18 से 20 लाख रुपए की आय हुई है। रामप्रताप ने बताया कि पहले परंपरागत खेती करते थे। 2016 में एक हैक्टेयर में अनार के पौधे लगा तीन साल देखभाल की। 2019 में उत्पादन शुरू हुआ। वर्ष 2021 में करीब 1100 पौधों से 18 से 20 लाख रुपए की आय हुई है। अनार सीकर, नवलगढ़, नोयड़ा, गाजियाबाद आदि जगह जाती है।

800 पौधों से इस साल चार लाख की कमाई : बनाराम
गांव भासीना के प्रगतिशील किसान बनाराम मेघवाल ने बताया कि इस साल अनार की खेती से खर्च निकालने के बाद करीब चार लाख रुपए कमाए। 2016 में एक हैक्टेयर में अनार के पौधे लगाए थे, जिनमें से अब 800 पौधे विकसित हो चुके हैं। 2019 में उत्पादन शुरू हो गया, मगर इस साल अच्छा उत्पादन हुआ। अनार की खेती के लिए उद्यानिकी विभाग ने ही प्रोत्साहित किया था, जो मेरे लिए फायदेमंद साबित हुई।

अगले साल तक 50 हैक्टेयर तक बढ़ेगा रकबा : 2020-21 तक जिले में 50 किसान 80 हैक्टेयर में अनार की खेती कर रहे हैं। अगले साल 40 से 50 हैक्टे. बढ़ोतरी की उम्मीद है। 2021-22 के लिए विभाग को 34 हैक्टे. के टारगेट मिले हैं।

चूरू की जलवायु अनुरूप, 3 साल मेहनत, 25 साल तक उपज

तहसील क्षेत्र तारानगर 10 सुजानगढ़ 11 बीदासर 17 रतनगढ़ 12 तहसील क्षेत्र सरदारशहर 12 चूरू 10 राजगढ़ 8 (क्षेत्र हैक्टेयर में)

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