स्कूल में 3.25 लाख के विकास कार्य:प्रधानाचार्य वर्मा ने 9 स्कूलों में खुद के वेतन से 3.25 लाख रु. के करवाए विकास कार्य

चूरूएक महीने पहले
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स्कूल तो मंदिर की तरह है। यहां खर्च किया धन व्यर्थ नहीं जाता। ये सोच तारानगर के वार्ड एक के निवासी पूनमचंद प्रजापत की है, जो अब तक चार जिलों के सरकारी स्कूलों में 3.25 लाख के विकास काम करवा चुके हैं। ये जिले बीकानेर, सीकर, झुंझुनूं व चूरू हैं। सर्वाधिक काम चूरू व सीकर जिले में करवाए हैं। पूनमचंद वर्तमान में चलकोई के राउमावि में प्रधानाचार्य हैं। खास बात ये है कि छोटी-छोटी जरूरतों के लिए वे भामाशाह के चक्कर नहीं लगाते, बल्कि खुद के वेतन से काम करवा देते हैं। 1994 में सीकर के रूपाणी के रामावि में प्रधानाध्यापक रहते हुए इन्होंने 10 हजार वेतन में खर्च करके अलमारी दी। इसके बाद गाजुवास, बुचावास में 10 हजार रुपए खर्च कर माइक सैट, तारानगर के महात्मा गांधी राउमावि में 1.70 लाख की लागत से कक्षाकक्ष एवं बरामदा का निर्माण करवाया। तारानगर के राउमावि में 2018 में 10 हजार वेतन में से देकर फोटो कॉपी मशीन व संदूक दी। इसी साल बाड़मेर के अजित गांव के राउमावि में पांच पंखे व मूविंग चेयर दी। पिछले साल चलकोई के राउमावि में 80 हजार से कक्षाकक्ष की मरम्मत, रंगरोगन, वाॅल पेटिंग करवाएं एवं 20 हजार से कंप्यूटर की व्यवस्था की। एसीबीईओ खालिद अली ने प्रधानाचार्य वर्मा के कार्यों की सराहना करते हुए बताया कि वे खुद तो वेतन में से खर्च करके विकास कार्य करवाते हैं, भामाशाहों को प्रेरित करके भवन निर्माण, सुरक्षा, फर्नीचर आदि के काम करवाते हैं। एसीबीईओ ने बताया कि 2019 में इनकी स्कूल की दो छात्राओं ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में क्रमश : 93 एवं 96 फीसदी अंक हासिल किए।

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