किसानों की मेहनत बर्बाद:बारिश का सितमबर; बाजरे की 1.20 लाख हैक्टेयर फसल में खराबा

चूरू2 महीने पहलेलेखक: हरीश सैनी
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लगातार बारिश से अंकुरित होने लगे बाजरे के सिट्‌टे। - Dainik Bhaskar
लगातार बारिश से अंकुरित होने लगे बाजरे के सिट्‌टे।
  • सितंबर के अंतिम सप्ताह में बारिश से फसलों में नुकसान
  • खराबे का आंकड़ा किसान सभा राज्य कमेटी के अनुसार
  • मूंग की 2.50 लाख व मोठ की 2 लाख हैक्टेयर फसल में खराबा

जिले में अगस्त के दूसरे पखवाड़े में शुरू हुआ मानसूनी बारिश का दौर अब तक जारी है। लगातार हो रही बारिश में खेतों में पककर खड़ी व काटकर छोड़ी गई फसलें खराब हो रही हैं। बाजरे की कटी हुई फसलों में दाने अंकुरित होने लग गए। वहीं मूंग व मोठ के दाने काले पड़ चुके।

अखिल भारतीय किसान सभा राज्य कमेटी सदस्य निर्मल प्रजापत ने बताया कि जिले के किसान फसल खराबे को लेकर लगातार सूचनाएं दे रहे हैं। इसके आधार पर अब तक खरीफ फसल में बारिश के कारण कुल बुआई में 40 से 60% तक खराबा हुआ है। सबसे ज्यादा मूंग व मोठ में 80 से 100% फसल खराब हो गई है। बाजरे में 50 से 60% व ग्वार में 20% खराबा अब तक हो चुका है। मूंगफली की जहां कटाई हो चुकी, वहां नुकसान हुआ है। जिले में बाजरे में एक लाख से 1.20 लाख हैक्टेयर, मोठ में दो लाख हैक्टेयर के करीब, मूंग 2.50 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में फसलें खराब हो गई।

2.03 लाख हैक्टेयर मेें हुई थी बाजरे की बुआई : जिले में सीजन में 10.55 लाख हैक्टेयर में बुआई हुई। इनमें 2.03 लाख हैक्टे. में बाजरा, 3.12 लाख हैक्टे. में मूंग, 2.62 लाख हैक्टे. में मोठ की बुआई हुई थी।

ग्राउंड रिपोर्ट, तारानगर व राजगढ़ में ज्यादा नुकसान
खरीफ फसल के तहत तारानगर व राजगढ़ क्षेत्र में किसानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। इन क्षेत्रों में जून के शुरूआत में ही अच्छी बारिश होने से किसान अगेती फसलों की बुआई कर चुके थे, जो सितंबर तक पककर तैयार हो गई। किसानों ने फसलों की कटाई भी कर ली, मगर फसल भीगने से खराब हो गई। जिन किसानों ने फसलों की कटाई नहीं की, उनकी फसलों के दाने नमी मिलने के कारण अंकुरित होने लगे हैं।

  • सादुलपुर क्षेत्र के सिद्धमुख, भीमसाना, धागड़ा, राजपुरिया, ढाणी बड़ी, सादपुरा, दयावठ, चुबकियागढ़, टुंडाखेड़ी, बैरासर, भैसली, सेऊवा, ददरेवा, खुड़ी, कांजण, रतनपुरा, डोकवा, मूंदी आदि क्षेत्रों की फसलों में ज्यादा खराबा।
  • तारानगर के में बांय, झाड़सर कांधलान, झोथड़ा, पडरेऊ, तारानगर शहरी क्षेत्र, ढाणी कुम्हारान, सात्यूं, राजपुरा, अलायला, मिखाला, साहवा, रेड़ी, भूरावा, बुचावास, कोहिणा, गाजवास व लुणास आदि में ज्यादा खराबा हुआ है।

खराबे का दर्द, किसानों की जुबानी,
40 बीघा में मोठ की फसल खराब

  • चूरू के नाकरासर गांव के किसान लालचंद पारीक ने बताया कि 40 बीघा में मोठ बोया था। लगातार बारिश से शत-प्रतिशत फसल खराब हो गई। काटकर छोड़ी फसल भीग गई, खड़ी है, उस पर फलियां नहीं है।

14 बीघा में मूंग में 90 फीसदी नुकसान

  • तारानगर के बनड़ा गांव निवासी चिमनाराम ने बताया कि 14 बीघा में मूंग की बिजाई की थी। अत्यधिक बारिश के कारण मूंग की 90 प्रतिशत फसल खराब होने से करीब 1.50 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

आठ बीघा में बाजरे की फसल खराब

  • राजगढ़ के बींजावास गांव निवासी मुनेश पूनिया ने बताया कि आठ बीघा में बाजरे बोया था। सितंबर मेंं लगातार बारिश से फसल में 60 प्रतिशत तक नुकसान हो चुका है। बाजरी के दाने काले पड़ने लगे हैं तथा पककर तैयार हो चुकी फसल अंकुरित होने लगी है।

एक्सपर्ट व्यू, बीमित किसान की शिकायत पर बीमा कंपनी प्रतिनिधि खेत में जाकर तैयार करता है रिपोर्ट
रिटायर्ड नायब तहसीलदार भंवरलाल स्वामी के अनुसार बीमित किसान की शिकायत पर बीमा कंपनी का प्रतिनिधि खेत में जाकर सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करता और इसको बीमा कंपनी को भेजता है। इस रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनी उत्पादन व नुकसान का आंकलन कर बीमा क्लेम जारी करती है।

सरकार गिरदावरी कराकर देती है मुआवजा : सरकार की ओर से विशेष परिस्थितियों में गिरदावरी करवाकर किसानों को मुआवजा दिया जाता है। गिरदावरी में पटवारी संबंधित हल्का पटवार मंडल के खसरों में पहुंचकर उत्पादन व खराबे की रिपोर्ट तैयार करता है, जिसके आधार पर किसानों को सरकार मुआवजा जारी करती है।

18001021142 पर 72 घंटे के अंदर सूचना दें किसान
बारिश के कारण फसलों में हो रहे खराबे को लेकर बीमित किसान संबंधित तहसील मुख्यालयों पर बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों अथवा टोल फ्री नंबर 18001021142 पर शिकायत कर सकते हैं। उपनिदेशक कृषि विस्तार दीपक कपिला ने बताया कि किसानों को 72 घंटे के अंदर खराबे की जानकारी देनी होती है।

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