महिला दिवस विशेष:नारी में शक्ति सारी, चूल्हा-चौकी के अलावा कारोबार में भी बंटाती हैं हाथ

सुजानगढ़9 महीने पहले
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  • सुजानगढ़ में छींपा समाज के 600 परिवारों में महिलाएं व बेटियां बंधेज और रंगाई-छपाई का करती हैं काम

छींपा समाज की इन महिलाओं की ये तस्वीर चूल्हा-चौकी के अलावा परिवार काे चलाने के लिए कारोबार में पुरुषों का बराबर हाथ बंटाने का संदेश दे रही है। सुबह पांच बजे उठकर चूल्हा-चौकी और पूरे परिवार की देखभाल के साथ-साथ व्यापारिक काम बूंदी-बंधेज, रंगाई-छपाई में जुट जाती हैं।

रंगाई के बाद बंधाई-बांधना व सुखाने सहित अन्य प्रोसेस महिलाओं के हाथों से होकर ही निकलती है। रात को भी समय मिलने पर यह काम करती हैं। ये बताती हैं कि जीवन का मकसद है कि न हिम्मत तोड़ो, न पीछे हटो और न किसी भी काम में खुद काे कमजोर समझो...। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पढ़िए ऐसी महिलाओं की कहानी...

70 साल से ज्यादा समय से चल रहा है यह काम

छींपा समाज के 700 घरों में 600 परिवार बूंदी-बंधेज, रंगाई-छपाई का काम करते हैं। इन परिवारों में करीब 1400 से ज्यादा महिलाओं व बेटियाें का साफे से लेकर चुनड़ी, दुपट्‌टा, सलवार सूट, ओढ़ना, साड़ी, ब्लाउज बांधनी तैयार करने में इनका रोल है। ये पुस्तैनी काम 70 साल से ज्यादा समय से जारी है। तैयार माल देश-विदेश तक जाता हैं। रोज 10 हजार साफे, 20 हजार दुपट्‌टे, तीन हजार चुनड़ी, चार हजार सूट बनकर आगे सप्लाई होते हैं।

रोज 12 से 14 घंटे काम

ये महिलाएं-बेटियां रोज 12 से 14 घंटे रंगाई-छपाई के काम में व्यस्त रहती हैं। इस व्यापार में महिलाओं का 60 फीसदी से ज्यादा योगदान रहता है।

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