कोरोना वैक्सीनेशन:सबसे पहले कोरोना मुक्त होने वाला चूरू, वैक्सीन के दाेनों डोज लगाने में अव्वल

चूरू9 महीने पहले
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  • प्रदेश का दोनों डोज अचीवमेंट 75.1 फीसदी, चूरू 85.3 फीसदी के साथ टॉपर

प्रदेश में सबसे पहले कोरोना मुक्त होने वाला चूरू जिला अब हेल्थ वर्कर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को दोनों डोज लगाने में राजस्थान में पहले नंबर पर है। दोनों डोज लगवाने में राजधानी जयपुर प्रदेश में सबसे निचले नंबर पर है। चूरू जिले ने 85.3 फीसदी अंकों के साथ ये सफलता हासिल की है। जयपुर 64.1 फीसदी अंक के साथ प्रदेश में 33वें नंबर पर है।

संभाग मुख्यालय बीकानेर जिला 69.7 फीसदी के साथ 31वें, कोटा जिला 68.0 फीसदी के साथ 32वें नंबर पर है। चूरू के बाद राजसमंद 84.5 फीसदी के साथ दूसरे नंबर एवं चित्तौड़गढ़ 83.7 फीसदी के साथ तीसरे नंबर पर है। पड़ोसी जिला सीकर 80.7 फीसदी के पांचवें एवं झुंझुनूं 80.2 फीसदी के साथ सातवें नंबर पर है। ये रैंकिंग 14 मार्च को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय ने जारी की है।

इसमें 13 फरवरी को पहला डोज लगाने के 28 दिन बाद दूसरा डोज लगाने वाले वर्कर्स की संख्या के साथ मूल्यांकन है। बता दें कि चूरू जिला 25 जनवरी को प्रदेश में सबसे पहले कोरोना मुक्त हुआ था। हालांकि अब जिले में कोरोना के सात नए मामले आ चुके हैं। सीएमएचओ डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि ये सफलता पूरी चिकित्सा विभाग की टीम की है। कलेक्टर के मार्गदर्शन से हमने टीम भावना काम किया और आगे भी करते रहेंगे।

तीन कारण -इसलिए चूरू जिला वैक्सीन डोज लगवाने में प्रदेश में रहा टाॅपर

1. प्रशासन का मार्गदर्शन: जिले में हेल्थ वर्कर और फ्रंटलाइन के पहले व दूसरे डोज मेंे प्रशासनिक मॉनीटरिंग के कारण लक्ष्य ज्यादा अचीव हुआ।

2. चिकित्सा टीम की मेहनत: चूरू जिले की चिकित्सा विभाग की टीम ने कोरोनाकाल से लेकर टीकाकरण तक टीम वर्क के साथ काम किया।

3. लोगों को ट्रैक करना, ड्यू लिस्ट वालों को दूसरे दिन कॉल करके बुलाना, प्रोत्साहित करना आदि।

प्रदेश में 13 मार्च तक दोनों डोज की स्थिति

हेल्थ वर्कर

पहला डोज- 389834 सैकंड डोज- 318140

फ्रंटलाइन वर्कर

पहला डोज- 220302 सैकंड डोज- 139772

कुल

पहला डोज- 610136

सैकंड डोज- 457912

प्रतिशत- 75.1

ये वर्कर्स की जागरूकता से संभव हुआ : कलेक्टर

कलेक्टर सांवरमल वर्मा का कहना है कि हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को फर्स्ट और सैकंड डोज लगवाने में अव्वल रहने के पीछे उनकी ही जागरूकता प्रमुख है। लोगों को समझना चाहिए कि एक डोज लगाने के बाद दूसरा डोज लगाना जरूरी है, अन्यथा कोई लाभ नहीं होगा। इसलिए जरूरी है कि दूसरा डोज भी लें।

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