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  • The Medical Department, Playing With The Lives Of Serious Patients, Relinquished The Paramedical Staff From The ALS Ambulance At The Coronacal And Relied On The Pilot

लापरवाही:गंभीर रोगियों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा चिकित्सा विभाग, कोरोनाकाल में एएलएस एंबुलेस से पैरामेडिकल स्टाफ को हटाकर पायलट के भरोसे छोड़ा

चूरूएक महीने पहले
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  • जिला मुख्यालय के डीबी अस्पताल को मिली एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेस पर दो ट्रेंड पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी जरूरी

गंभीर रोगियों को लाने एवं ले जाने के लिए जिला मुख्यालय के डीबी अस्पताल को मिली एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस की सुविधा का लाभ गंभीर रोगियों को नहीं मिल रहा है। इसका कारण इस एंबुलेंस पर तैनात पैरामेडिकल स्टाफ को हटाना है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में वेंटिलेटर, ईसीजी सहित कई उपकरण लगे हुए है, जो गंभीर रोगियों को एंबुलेंस में ही आईसीयू की सुविधा प्रदान करते हैं।

एएलएस एंबुलेंस के लिए बाकायदा डीबी अस्पताल के दो पैरामेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग भी करवाई गई। चिकित्सा विभाग की गाइडलाइन के अनुसार भी एएलएस एंबुलेंस में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ होना जरूरी है, पर वैश्विक महामारी के इस दौर में अस्पताल अधीक्षक ने इसके स्टाफ को हटा दिया है, जिसके कारण रोगियों को केवल एंबुलेंस का पायलट ही लेकर जा रहा है। बतादें कि 23.33 लाख की लागत की एएलएस एंबुलेंस को गंभीर रोगियों के लिए जीवन रक्षक माना जाता है।

डेडिकेटेड अस्पताल बनते ही एएलएस से हटाया ट्रेंड स्टाफ, उप नियंत्रक बोले-ट्रेंड स्टाफ के लिए कई बार कह चुके

डीबी अस्पताल के डेडिकेटेड अस्पताल बनते ही एएलएस पर तैनात दो पैरामेडिकल स्टाफ को हटाकर उनकी ड्यूटी कोरोना वार्ड में लगा दी। उप नियंत्रक डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि कोरोना वार्ड में पहले से ही स्टाफ कम है, पर एएलएस एंबुलेंस पर ट्रेंड स्टाफ भी जरूरी है, क्योंकि इसमें गंभीर रोगियों व कोरोना मरीजों को लाया-ले जाया जाता है। एएलएस पर स्टाफ लगाने के बारे में वे अधीक्षक को कह चुके हैं। तीन दिन पहले सीएमएचओ को इस बारे में बताया जा चुका है। एएलएस का संचालन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है।
यह हैं सुविधाएं : इमरजेंसी में मरीजों को दी जाने वाली सभी जरूरी दवाएं एएलएस में रहती है। एएलएस के अंदर एक वेंटिलेटर की सुविधा, ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफीब्रीलेटर डिवाइस मल्टी पैरा मॉनिटर डिवाइस की सुविधा भी है। इमरजेंसी में मरीजों को दी जाने वाली सभी जरूरी दवाएं इसमें उपलब्ध रहती है। इसमें ईसीजी मशीन, सेक्शन मशीन, सिरज पंप, पल्स मापने की मशीन, खून में क्सीजन मापने की मशीन सहित कई सुविधाएं हैं। इस एंबुलेंस में आईसीयू जैसी सुविधाएं होती है। 24 घंटे एक ट्रेंड चिकित्साकर्मी की ड्यूटी रहती है, जो रोगी को तुरंत आवश्यकतानुसार चिकित्सा उपलब्ध करवाता है। इसके लिए दो जनों अंकित चौधरी व पन्नालाल को ट्रेनिंग भी दिलवाई गई।
निजी नर्सिंग स्टाफ को ले जाने को मजबूर मरीज
19 अगस्त को चूरू के वार्ड 58 की एक महिला को डीबी अस्पताल से जयपुर गंभीर हालत में ले जाना पड़ा, इस दौरान एएलएस पर पैरामेडिकल स्टाफ नहीं था। मरीज के परिजनों को प्राइवेट स्टाफ हायर कर ले जाना पड़ा।
12 अगस्त को डीबीएच से कोविड पेशेंट ले जाने के लिए पैरामेडिकल स्टाफ नहीं था। इसी महीने की 30 अगस्त को कोविड पेशेंट को बीकानेर केवल एंबुलेंस का पायलट लेकर ही गया

6 सितंबर को ढाणी चारणान की महिला व 13 सितंबर को राजगढ़ की गंभीर महिला को बिना ट्रेंड स्टाफ बीकानेर ले गए।

एक्सपर्ट व्यू : ट्रेंड स्टाफ नहीं है तो फिर एएलएस सुविधा का मतलब ही क्या?
आरसीएचओ डॉ. सुनील जांदू का कहना है कि एएलएस एंबुलेंस पर गंभीर रोगियों के जीवन रक्षा से वेंटिलेटर सहित अन्य उपकरण होते हैं जिसका हर कोई संचालन नहीं कर सकता है। इसमें ईसीजी मशीन, सेक्शन मशीन, पल्स मापने की मशीन, खून में आक्सीजन मापने की मशीन की सुविधा है, जिसके लिए ट्रेंड स्टाफ जरूरी है, वर्ना एएलएस किस काम की है। अस्पताल के दो चिकित्साकर्मी को ट्रेनिंग भी दिलाई गई।
मुझे पता है एएलएस पर ट्रेंड स्टाफ नहीं है, लगाने के लिए निर्देश दे दिए हैं :
अधीक्षक
डीबी अस्पताल अधीक्षक डॉ. गोगाराम ने बताया कि ये सही है कि एएलएस पर दो महीनों से ट्रेंड स्टाफ नहीं है। स्टाफ की कमी के कारण उन्हें कोरोना वार्ड में लगाना पड़ा है। अब एक नर्सिंग को एएलएस पर लगाने के निर्देश दिए हैं।

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