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प्रशासन की अनदेखी:22 साल से नोखा-सीकर रेललाइन के काम को वित्तीय स्वीकृति नहीं, अब तक केवल सर्वे ही अपडेट हुए हैं

चूरू8 महीने पहले
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नोखा-सीकर नई रेललाइन के काम को 22 साल से रेल और वित्त मंत्रालय ने मंजूरी नहीं हुई। 1997-98 से लेकर 2009-10 तक 6 सर्वे हुए। 2009-10 में नोखा-सीकर रेललाइन के पूर्व में हुए सर्वे को अपडेट करने की स्वीकृति जारी की गई। उत्तर पश्चिम रेलवे ने सर्वे को अपडेट किया। इसकी रिपोर्ट 12 मार्च 2012 को रेलवे बोर्ड को भेजी। रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई 209 किमी होगी। इस पर 819.11 करोड़ रु. खर्च का अनुमान लगाया है। बोर्ड ने 17 मई 2012 को इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति के लिए योजना आयोग को भेजा, इस बाद बात आगे नहीं बढ़ सकी।

इसका कारण इन सांसदों की उदासीनता है। बीकानेर, चूरू, सीकर सांसद क्रमश: अर्जुनराम मेघवाल, राहुल कस्वां एवं सुमेधानंद ने भास्कर से बातचीत करते हुए कहा कि वे इस बारे में रेल अधिकारियों से बात करेंगे, मगर हुआ कुछ नहीं। उपरे सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य अनिल कुमार खटेड का कहना है कि नोखा-सीकर रेललाइन को मंजूरी मिले तो रेलवे को राजस्व में फायदा मिलेगा, वहीं लोगों का सालासर, मुकाम आदि धार्मिक स्थल तक आवागमन और सुलभ हो जाएगा।
इस रेललाइन को मंजूरी मिले तो ये होगा फायदा

  • बीकानेर, नागौर ,चूरू और सीकर जिले के नोखा, श्रीडूंगरगढ़, बीदासर, सुजानगढ़, लाडनूं, लक्ष्मणगढ़ को सीधा जुड़ाव होगा।
  • विश्नोई समाज के प्रमुख आस्था केंद्र मुकाम और बालाजीधाम सालासर भी इस रेल मार्ग से जुड़ने से लाखों श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।
  • तालछापर अभयारण्य आने वाले पर्यटकों, जैन विश्व भारती विवि लाडनूं में अध्ययन के लिए आने वाले छात्रों को भी लाभ मिल सकेगा।
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