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सादुलपुर के नूहंद का मामला:खेलते समय आदिल ट्रांसफार्मर से चिपका, धमाके की आवाज सुनी तो अमित को पता चला, अब सेहत पूरी ठीक

सादुलपुर4 दिन पहले
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ट्रांसफार्मर के पोल में आ रहे करंट से चिपका बच्चा। - Dainik Bhaskar
ट्रांसफार्मर के पोल में आ रहे करंट से चिपका बच्चा।

यह खबर जितनी डरावनी है उतनी ही संदेश देने वाली भी है। खबर है- सादुलपुर के नूहंद गांव में एक मासूम खेलते समय ट्रांसफार्मर में दौड़ रहे करंट से चिपक गया और बूरी तरह से झुलस गया। उसे गांव के ही एक युवक ने बहादुरी दिखाते हुए करंट से छुड़ाया। इतना ही नहीं उसे पिलानी के बिरला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी सेहत में सुधार है। संदेश है- समय पर दुर्घटनाग्रस्त की मदद करना।

क्योंकि यदि करंट से झुलसे मासूम को युवक ने समय पर बचाया नहीं होता तो शायद आज वह हमारे बीच नहीं होता। जानकारी के अनुसार नजदीक के गांव नूहंद निवासी माेबिन खां तेली का लड़का आदिल (6) अपने एक साथी बच्चे के साथ गांव के चाैक में खेल रहा था। रास्ते के पास ट्रांसफार्मर में दौड़ रहे करंट से आदिल चिपक गया।

वह झुलस गया। उसके शरीर जलने लगा। धुंआ निकलने लगी। उसकी चीख सुनकर वहां पास में बैठा नूहंद का अमित पूनिया दौड़कर आया। उसे कुछ नहीं सूझा तो वह पड़ौस के घर में पड़ा लकड़ी का फंटा उठाकर लाया और उससे वारकर मासूम काे करंट से छुड़ाया। फिर फंटे से ही उसे ट्रांसफार्मर से अलग किया।

जिंदगी बचाने की कहानी अमित की जुबानी : बच्चे को तड़पता देख न जाने कहां से हिम्मत आ गई

मैं शनिवार को दोपहर में खाना खाकर दुकान पर गया था। दुकान से वापस घर लौट रहा था। समय करीब 12.35 का था। मुझे अचानक तेज धमाके और बेल्डिंग करने जैसी आवाज सुनी। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो एक बच्चा ट्रांसफार्मर के पास करंट से झुलस रहा था। उसमें धुंआ निकल रहा था। उसे तड़पता देख मैंने शोर मचाया। एकबारगी तो आंखों के सामने अंधेरा सा छा गया। कुछ नहीं सूझा, लेकिन दूसरे ही पल मुझे याद आया कि लकड़ी में करंट नहीं आता।

तब मैंने पड़ौस के घर में पड़ा लकड़ी का फंटा (पाटिया) उठाया और बिना कुछ सोचे समझे फंटे से बच्चे के हाथ पर वार कर उसे अलग किया। इसके बाद उसी फंटे से उसे ट्रांसफार्मर से कुछ दूर किया। तब तक ग्रामीणों की भीड़ लग गई थी। उन्हें बच्चे के शरीर पर मिट्‌टी मलने के लिए कहकर मैं गाड़ी लेने दौड़ गया। रास्ते से गुजर रही गाड़ी को रुकवाकर बच्चे को पिलानी के अस्पताल भिजवाया। मुझे खुशी है कि मैंने किसी की जान बचाई।

खुद ही पड़ोस में खड़ी गाड़ी लेकर आया, बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया
बच्चे को ट्रांसफार्मर से छुड़ाने के बाद अमित दौड़कर पास में ही चल रहे शादी समारोह में गया। वहां खड़ी गाड़ी लेकर आया और बच्चे को पिलानी के बिरला अस्पताल लेकर गया। बच्चे की हालत में सुधार है। परिजनों ने कहा-यदि अमित नहीं होता तो शायद आज आदिल जिंदा नहीं होता। गांव के एडवोकेट अशोकसिंह राठौड़ ने बताया कि शनिवार दोपहर आदिल पुत्र मोबीन खां तेली निवासी नूहंद गांव के चौक में एक अन्य बच्चे के साथ गुजर रहा था। तभी गांव के अमित पूनिया पुत्र सुरतसिंह पूनिया ने सूझबूझ दिखाते हुए आदिल काे बचाया।

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