ये कैसी निगेहबानी!:हाईवे पेट्रोलिंग पर साल भर में 5 करोड़ खर्च, पकड़े दो मामले, एक में 28 पव्वा शराब दूसरे में 6 चाकू-तलवार जब्त

फतेहपुर4 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो

हाईवे पर हो रहे अपराधों को रोकने के लिए राजस्थान पुलिस में हाईवे पेट्रोल टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों का मुख्य उद्देश्य हाईवे पर दुर्घटनाओं में कमी लाना और लूटपाट की घटनाओं को रोकना था। लेकिन अब यह हाइवे पेट्रोलिंग केवल पिकअप और ट्रक चालकों की जांच तक सीमित रह गई है।

पिछले 1 साल के कार्रवाई के आंकड़ों पर गौर करें तो ऐसा ही कुछ सामने आ रहा है। जानकारी के मुताबिक 2013 में प्रदेश के सभी जिलों को पुलिस मुख्यालय की ओर से हाइवे पेट्रोलिंग की गाड़ियां आवंटित की गई और इनके लिए अलग से नफरी की व्यवस्था भी की गई। 2014 में पुलिस के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक में आदेश जारी किए की इन गाड़ियों को सिर्फ हाईवे पर अपराध और दुर्घटनाएं रोकने के लिए लगाया था, इनका काम वाहनों के चालान करना नहीं है। लेकिन अब भी केवल हाईवे पर इन हाईवे पेट्रोलिंग की गाड़ियों को ट्रक और पिकअप के चालान करते हुए देखा जा सकता है।

अपराधियों को पकड़ने में पुलिस जीरो

अपराधियों को पकड़ने और दुर्घटना रोकने में इन की भूमिका जीरो है। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल पूरे प्रदेश में हाईवे पेट्रोलिंग पुलिस ने महज दो कार्रवाई की। इनमें से एक कार्रवाई में तो मात्र 28 पव्वे देशी शराब के बरामद किए गए और आरोपी को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई जोधपुर में की गई और दूसरी कार्रवाई चूरू के सुजानगढ़ में की गई जिसमें चाकू तलवार सहित धारदार हथियारों के साथ 6 लोगों को हाईवे पेट्रोल की पुलिस ने गिरफ्तार किया।

इन दो कार्रवाई के अलावा पूरे प्रदेश में एक भी कार्रवाई हाईवे पेट्रोल की सैकड़ों गाड़ियों द्वारा नहीं की गई। जबकि पिछले 1 साल के इस समय में सरकार ने हाईवे पेट्रोलिंग पर 5 करोड़ तीन लाख 94 हजार 728 रुपए खर्च किए। यानी कि इतना बड़ा खर्चा और काम कुछ भी नहीं किया। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि हाईवे पेट्रोल राजस्थान पुलिस के लिए केवल सफेद हाथी बन कर रह गई है।

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