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विश्व तंबाकू दिवस पर आपसे जुड़ी खबर:शेखावाटी के स्कूलाें में 10% छात्र करते हैं धूम्रपान, इन्होंने पिता, दोस्तों या गांव में दूसरों को हुक्का पीते देख सीखा

नवलगढ़22 दिन पहलेलेखक: राजकुमार शर्मा
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यदि आप बच्चों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं तो आज से ही यह लापरवाही छोड़ दीजिए और उन पर ध्यान देना शुरू कीजिए। अन्यथा आपकी यह लापरवाही आपके बच्चे को एक ऐसी आदत की ओर धकेल सकती है जो उसकी जिंदगी पर भारी पड़ेगी।

मुंबई के विख्यात ब्रीच कैंडी अस्पताल के सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. अनिल सांगानेरिया ने शेखावाटी के 12000 स्कूली बच्चों पर एक स्टडी की है। जिसमें सामने आया कि इन स्कूलों में प्रत्येक सौ में से 10 बच्चे सिगरेट या बीड़ी पीते हैं। गुटखा-जर्दा खाने वाले बच्चों की संख्या इससे ज्यादा है। इसी स्टडी में यह भी सामने आया कि पिछले कुछ ही सालों में प्रत्येक दस बच्चों में से चार बच्चों को कैंसर पाया गया। डॉ. सांगानेरिया मूलत: नवलगढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने अब तक कैंसर के करीब साढ़े चार हजार जटिल ऑपरेशन किए हैं। भारी व्यस्ताओं के बावजूद वे साल में कुछ समय निकालकर शेखावाटी आते हैं। कैंसर के प्रति जागरुकता लाने के लिए वे अपनी जागरण मंच के तहज कैंपेन चलाते हैं। इसी कैंपन के दौरान उन्होंने यह स्टडी की। अब तक वे हजारों लोगों खास तौर पर स्कूली बच्चों को धूम्रपान से मुक्ति दिला चुके हैं।

बच्चों में धूम्रपान की लत पहले घर से शुरू होती है, फिर दोस्तों से

  • 1 स्कूलों में बच्चों से पूछा गया कि उन्होंने सिगरेट या बीड़ी पीना क्यों शुरू किया। सबसे ज्यादा बच्चों ने बताया कि घर में पिता, दादा या अन्य किसी रिश्तेदार को देखकर उन्होंने इसकी शुरूआत की। इन बच्चों को घर में सिगरेट-बीड़ी आसानी से मिल जाती और उन्होंने चोरी छिपे पीना शुरू किया।
  • 2 दूसरा बड़ा कारण घर से बाहर दोस्त सामने आए। कुछ बच्चों का कहना था कि उन्हें सबसे पहले उनके दोस्त ने सिगरेट पीने को कहा। मना करने के बावजूद उन पर दबाव डाला गया। कुछ मामले ऐसे भी थे जब दोस्त को सिगरेट पीता देख खुद का रौब जमाने के लिए बच्चे नेे सिगरेट की शुरूआत की।
  • 3 स्टडी के अनुसार धूम्रपान वाले बच्चे ग्रामीण क्षेत्र के हैं। इन्होंने बताया कि गांव में बुजूर्गों को हुक्का पीते देख हुक्का या सिगरेट पीना शुरू किया। इसके अलावा गांव में सुनसान जगह, छुट्‌टी के बाद स्कूल में किसी का ना होना और माता पिता के भी ध्यान नहीं देने के कारण ग्रामीण बच्चे इसकी चपेट में ज्यादा आ रहे हैं।

चिंताजनक: महिलाओं में तेजी से बढ़ रही धूम्रपान की आदत

डॉ. अनिल सांगानेरिया ने शेखावाटी में की गई अपनी स्टडी के अलावा दुनिया भर में हो चुकी दूसरी स्टडीज के आधार पर बताया कि देश में महिलाओं में धूम्रपान की आदत तेजी से बढ़ रही है। रिसर्च बताती हैं कि भारत में लगभग 1.21 करोड़ महिलाएं सिगरेट पीती हैं। अमेरीका के बाद भारत इस मामले में दूसरे नंबर पर है। एक पुरुष दिनभर में औसतन 6.1 सिगरेट पीता है। वहीं एक महिला दिनभर में सात सिगरेट पीती है। ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामले इसी कारण से सामने आ रहे हैं। यह बेहद चिंताजनक हैै। पूरी आबादी की बात करें तो भारत में लगभग 27.5 करोड़ लोग यानी 35% आबादी तंबाकू का सेवन करती है।

बीडी-सिगरेट हो या हुक्का कोरोना में ज्यादा खतरनाक

पिछले दिनों कुछ स्टडी के आधार पर दावा किया गया था कि धूम्रपान से कोरोना नहीं फैलता। डॉ अनिल सांगानेरिया इसे गलत बताते हैं। उनका कहना है कि गुटखा और सिगरेट का सेवन करने वालों में कोरोना संक्रमण होने का खतरा ज्यादा रहता है। स्मोकिंग और किसी भी रूप में तम्बाकू लेने पर सीधा असर फेफड़े के काम करने की क्षमता पर पड़ता है। कोरोना सबसे पहले फेफड़ों पर ही अटैक करता है, इसलिए इसका मजबूत होना बेहद जरूरी है। तंबााकू और कोरोना वायरस दोनों ही फेफड़ों की कार्यक्षमता घटा देते हैं।

धूम्रपान करने वाले दस में से 5 छात्रों को कैंसर संभव

धूम्रपान करने से होने वाले कैंसर के मरीज इलाज के दौरान पछताते हैं कि कुछ सैकिंड के मजे के लिए उन्होंने अपना जीवन बर्बाद कर लिया। धूम्रपान करने वाले लोग अब भी इसके खतरे नहीं समझ रहे हैं। इसकी लत लगतार बढ़ रही है। मैंने शेखावाटी के बच्चों पर जो स्टडी की है। वह वाकई में चौंकाने वाली है। इसे रोकना होगा। सौ में से 10 बच्चे सिगरेट पीते हैं। यह तय मानकर चलिए कि यदि उन्होंने सिगरेट नहीं छोड़ी तो इनमें से 5-6 के कैंसर होना तय है। शेष को दूसरी बीमारियां। स्कूलों में शिक्षकों को चाहिए कि वे रोजाना क्लास में पांच मिनट बच्चों को धूम्रपान के खतरों के बारे में बताए। माता पिता भी यदि अपने बच्चों का भला चाहते हैं तो उन पर ध्यान दें। यदि वे भी धूम्रपान करते हैं तो आज से ही छोड़ दें। आखिर, ये आपके ही बच्चों के भविष्य का सवाल है। -डॉ. अनिल सांगानेरिया, सीनियर कैंसर सर्जन

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