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तकनीकी भूल सुधार रहा रेलवे:शेखावाटी के 156 अंडरपास ढंके जाएंगे, ताकि बरसात में नहीं फंसे वाहन, मानव रहित क्रॉसिंग की जगह बनाए गए थे अंडरपास

झुंंझुनूं10 दिन पहलेलेखक: मोहम्मद मुस्लिम
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बगड़. 2016 में काली पहाड़ी के पास हादसा। - Dainik Bhaskar
बगड़. 2016 में काली पहाड़ी के पास हादसा।
  • बरसात में भरने वाले पानी को निकालने के लिए लगाए जाते हैं पंपसेट

रेलवे अंडरपास में बरसाती पानी के भरने की समस्या को दूर करने के लिए रेलवे अब इन्हें ढंकेगा। रेलवे की इस योजना के तहत शेखावाटी के सभी 156 अंडरपास को ढका जाएगा। झुंझुनूं जिले में सबसे पहले सीकर- लाेहारू के बीच रतन शहर में बने रेलवे अंडरपास काे ऊपर से कवर्ड किया गया है। सबसे पहले अंडरपास भी यहीं बना था। जिसके बाद बरसात का पानी इनमें नहीं जा सकेगा और आवागमन सुगमता से हो सकेगा। एक अंडरपास को ढकने पर करीब 60 लाख रुपए खर्च होंगे। हालांकि सीकर शहर में दो अंडरपास व एक लक्ष्मणगढ़ इलाके में कवर्ड कर दिया गया है।

दरअसल, मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर हादसों को टालने के लिए रेलवे ने उनसे पहले अंडरपास बनाए थे। दावा किया गया था कि इनसे वाहन आसानी से आ जा सकेंगे, लेकिन बरसात के दौरान इनमें पानी भरने लगा और कई अंडरपास तो पूरी तरह से डूब गए। वाहन चालक इन्हें पानी के बीच से पार करने लगे। जिससे हादसे भी बढ़ गए।

ऐसे में रेलवे ने पंप सेट के जरिए पानी निकालने का ठेका दिया। जिसमें एक अंडरपास पर सालाना तीन लाख रुपए का खर्चा भी आता था और समस्या का समाधान भी नहीं हो रहा था। ऐसे में अब रेलवे ने इन्हें ढंकने का काम शुरू किया है। गौरतलब है कि शेखावाटी एरिया में बने हुए सभी अंडरपास में बरसात के दिनों में पानी भरता है। इससे रास्ता बंद हो जाता है। फतेहपुर के अंडरपास में एक व्यक्ति जान भी गंवा चुका है।

झुंझुनूं जिले में सबसे पहले रतनशहर में बना था अंडरपास, ढंका भी इसे ही गया, अच्छे परिणाम भी आए

जुलाई 2016 : पहले हर साल बारिश में डूब जाता था

बगड़. रतन शहर अंडर पास में भरा बारिश का पानी। (तीन जुलाई 2016)
बगड़. रतन शहर अंडर पास में भरा बारिश का पानी। (तीन जुलाई 2016)

रेलवे ने सबसे पहले रतनशहर में अंडरपास को ढका है। यह अंडरपास रोहतक रोड, सुलताना रोड से जोड़ता है। जिससे इसके निर्माण के समय ग्रामीणों को काफी राहत मिली थी, लेकिन फिर पानी भरने से यह सुविधा परेशानी में बदल गई। हर साल यह पहली ही बारिश में पानी से भर जाता था। इस अंडरपास के निर्माण पर सवा करोड़ रुपए की लागत आई थी

2021 : अब बारिश के बावजूद एक बूंद तक नहीं आई

बगड़. रतन शहर अंडर पास के उपर लगाया गया टिन शेड। फोटो : आलोक सोनी
बगड़. रतन शहर अंडर पास के उपर लगाया गया टिन शेड। फोटो : आलोक सोनी

इस साल इसे गैल वैल्यूम की चादर से ढक दिया गया है। इसके कवर करने पर करीब 60 लाख रुपए खर्च हुए हैं। जिसके अच्छे परिणाम भी सामने आए हैं। पिछले दिनों हुई जाेरदार बारिश के बावजूद इसमें पानी नहीं भरा है। ऊपर से कवर करने के साथ ही इसके दोनों किनारों पर ऊंचा स्पीड ब्रेकर बना दिया गया है। इससे जमीन पर बहने वाला पानी भी अंदर नहीं जाता।

पूरे देश में सामने आती रही पानी भरने की समस्या

  • रेलवे का पूरा संचालन इंजीनियरिंग पर ही होता है और इसके लिए रेलवे में इंजीनियर्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद अंडरपास बनाते समय इस बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया कि बरसात के दौरान इनमें पानी भरेगा तो उसे कैसे रोका जाएगा।
  • रेलवे अंडरपास में पानी भरने की समस्या अकेले झुंझुनूं की नहीं है। बल्कि पूरे देश में जहां जहां यह अंडरपास बनाए गए। उन सभी जगहों पर बरसाती पानी भरने की समस्या आई।
  • तीन साल पहले सीकर जिले के रानोली में अंडरपास के निर्माण के समय ही ग्रामीणों ने इसमें यह खामी बता दी थी और विरोध प्रदर्शन भी किया था। अंडरपास बन जाने के बाद यह समस्या आई।
  • कोटा-दौसा मेगा हाईवे के पास दिल्ली-मुंबई मुख्य रेलवे लाइन पर बांझड़ली में भी अंडरपास में हर साल बरसाती पानी भर जाता है।

160 अंडरपास सीकर-लोहारू व सीकर-चूरू रूट पर

सीकर से लोहारू व सीकर- चूरू रुट पर 160 रेलवे अंडरपास हैं। एक अंडरपास पर करीब एक करोड़ रुपए की लागत आई है। ये सभी मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर बनाए गए थे। इन क्रॉसिंग के ग्रामीण क्षेत्रों में होने से अक्सर हादसे होते थे। ऐसे में अंडरपास बनने से लोगों को काफी राहत भी मिली, लेकिन रेलवे ने इसमें तकनीकी भूल कर दी। इन्हें कवर्ड नहीं करने से बरसात में इनके अंदर पानी भरने लगा। एक ही अच्छी बारिश में पानी चार से पांच दिन तक भरा रहता। उससे निकालने के बावजूद कीचड़ जमा रहता। इसके बाद दोबारा बरसात से पानी वापस भर जाता और इस तरह ये अंडरपास बड़ी समस्या बन गए। सीकर जिले में तीन अंडरपास ढंके हुए हैं।

जानलेवा अंडरपास : ढंके जाएंगे तो हादसों से भी निजात मिलेगी

  • जुलाई 2016 में कालीपहाड़ी रेलवे अंडर पास में पानी भरा रहने से बस फंस गई थी। गनीमत रही कि समय रहते सभी यात्रियाें काे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
  • जुलाई 2019 में झुंझुनूं में इंडाली रेलवे फाटक अंडरपास में पानी भरा होने से एक बाइक सवार पटरियाें के ऊपर से निकल रहा था। इसी दाैरान ट्रेन आ जाने से युवक ने भाग कर जान बचाई जबकि बाइक ट्रेन की चपेट आ गई।
  • 2016 में नूआं में अंडरपास में पानी भरने से कार फंस गई थी। लाेगाें ने ट्रैक्टर की मदद से कार काे बाहर निकाला। तब जाकर उसमें सवार लोगों की जान बच सकी।
  • 9 जुलाई 2019 को फतेहपुर रेलवे अडंरपास में बरसाती पानी के कीचड़ में फंसने से दूध बेचकर आ रहे बालाराम गुर्जर पुत्र जगन्नाथ गुर्जर की मौत हो गई थी।
  • 2 वर्ष पूर्व ही एक मारुति यहां फंस गई थी। उसमें पूरा परिवार सवार था। उस दौरान वहां खड़े ऑटोरिक्शा वालों और आसपास के लोगों ने उस परिवार के सभी लोगों को बचा लिया था।
  • 13 जुलाई 2021 काे ही फतेहपुर में मंडावा पुलिया अंडरपास पर करीब पांच फीट से अधिक पानी भर गया। एक निजी बस और एक रोडवेज बस आमने सामने आने से एक घंटे पानी में फंसी रही। दोनों बसों में 38 यात्री सवार थे। हालाकि समय रहते सभी यात्रियों को सकुशल निकाल लिया गया नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।

सभी अंडरपास ढंकना ही एकमात्र उपाय तभी इनका सही उपयोग हो सकेगा

एक्सपर्ट व्यू

जब यह अंडरपास बनाए जा रहे थे। उस वक्त भी कई जगहों पर लोगों ने प्रदर्शन कर इस बात की आशंका जताई थी कि इनमें पानी भरेगा। अंडरपास देखा जाए तो वाकई में ग्रामीणों की सहुलियत के लिए बनाए गए थे। इनसे फायदा भी हुआ, लेकिन जब इनके बनने के बाद जहां जहां भी पहली बारिश हुई। इनमें पानी भर गया और यह समस्या सभी जगह आई। अस्थायी तौर पर रेलवे ने पंपसेट से पानी निकालने के इंतजाम किए, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ। अब इन्हें ढकना ही एकमात्र उपाय है तभी जाकर इनका सही उपयोग हो सकेगा।
- मोहम्मद मुबारिक, सीविल इंजीनियर

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