राहत भरी खबर:कोरोना के कारण माता-पिता खोने वाले जिले के 205 बच्चों को पीएम केयर्स योजना से मिलेंगे हर माह दो-दो हजार रुपए

झुंझुनूं2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना में 5 साल तक प्रतिमाह स्टाइपेंड, 23 साल की उम्र में मिलेंगे 10 लाख रुपए

काेराेना महामारी के दाैरान अपने माता- पिता काे खो देने वाले बच्चों की आर्थिक सहायता के लिए पीएम केयर्स फाॅर चिल्ड्रन याेजना के तहत पांच साल तक प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा और 23 साल की उम्र हाेने पर 10 लाख रुपए मिलेंगे। जिले में ऐसे 205 बच्चों के नाम सामने आए हैं। योजना के लिए गाइड लाइन जारी हाे गई है। लीगल गार्जियन को खोने वाले बच्चे भी इस योजना का लाभ ले सकेंगे। ऐसे बच्चों को 31 दिसंबर तक आवेदन करना होगा। योजना का लाभ 18 साल से कम उम्र के उन्हीं बच्चों को मिलेगा जिन्होंने 11 मार्च 2020 से लेकर 31 दिसंबर 2021 के बीच अपने माता-पिता को खोया है।

छुटि्टयों में भी रहने की सुविधा :

11 से 18 वर्ष की आयु के बच्चे जिनका नामांकन किसी आवासीय विद्यालय में होगा उन्हें छुटि्टयों के दौरान कलेक्टर के द्वारा सीसीआई या किसी उपयुक्त स्थान पर रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। 4 से 10 वर्ष की आयु सीमा के बच्चों की पढ़ाई व समुचित देखभाल के लिए अलग गाइडलाइन जारी की गई है। जबकि 11 से 18 साल तक के बच्चाें के लिए अलग गाइडलाइन बनी है।

4 से 10 साल या उससे अधिक आयु सीमा के बच्चे जिनके परिजन, परिवार का सदस्य, रिश्तेदार नहीं हैं या फिर उन्हें अपने साथ रखने को तैयार नहीं हैं, या फिर बच्चा खुद उनके साथ नहीं रहना चाहता तो उन्हें कुछ समय के लिए किसी अन्य परिवार के साथ रखा जाएगा। यह विकल्प उपलब्ध न होने पर बच्चों को बाल देखभाल संस्थान में रखा जाएगा। 11 से 18 साल की उम्र के छात्रों का दाखिला नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, एकलव्य मॉडल स्कूल, सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय में कलेक्टर कर सकेंगे।

जिले के 7 बच्चों ने माता-पिता दोनों को खो दिया
काेराेना काल में जिले में 198 बच्चाें के सिर से पिता का साया उठ गया। जबकि 7 ऐसे बच्चे हैं जिनके माता- पिता दाेनाें की ही काेराेना की वजह से माैत हाे गई थी। शहर मे एक नेपाली दंपत्ति की काेविड की वजह से माैत हाे गई थी। इसी तरह पिलानी, जयपहाड़ी, इस्लामपुर में बच्चाें ने बच्चाें ने माता- पिता काे खाे दिया था।

खबरें और भी हैं...