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गौरव के पल:जिले के 7 युवा एक साथ बने लेफ्टिनेंट, किसी ने परिवार की परंपरा काे आगे बढ़ाया तो किसी ने बचपन का सपना पूरा किया

झुंझुनूं2 महीने पहले
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  • सेना में सर्वाधिक सैनिक देने वाले झुंझुनूं जिले के नाम एक और उपलब्धि दर्ज हुई

देश में तीनाें सेनाओं में सर्वाधिक सैनिक देने वाले झुंझुनूं जिले के नाम एक और उपलब्धि दर्ज हाे रही है। फाैज में सैनिक बनने वाले युवा इससे चार कदम आगे चल कर अधिकारी बनने लगे हैं। काेराेना के इस दाैर में भी जिले के सात युवाओं ने भारतीय सेनाओं में लेफ्टिनेंट बन कर इतिहास रच दिया है। जिले से पहली बार एक साथ इतने लेफ्टिनेंट बने हैं। इसमें दिलचस्प ये है कि लेफ्टिनेंट बने साताें युवा ग्रामीण परिवेश से हैं और खुद की मेहनत के दम पर मुकाम हासिल करने में कामयाब रहे।

सामान्य परिवाराें के इन हाेनहाराें ने पहले खुद के दम पर तैयारी की और उसके बाद खुद की क्षमताओं से ही सेना में अधिकारी बने। बुगाला की हनुमानजी की ढाणी के उत्कर्ष सिंह शेखावत ने महज 17 साल की उम्र में ये उपलब्धि हासिल की है। इंडियन एयरफोर्स में पहले ही प्रयास में वे लेफ्टिनेंट बने हैं। उन्हाेंने इसके साथ पायलट टेस्ट भी पास किया है। वे बचपन से ही हवा में उड़ने का सपना देखते थे।

फौज में सैनिक देने के लिए प्रसिद्ध झुंझुनूं जिले के युवा अब बनने लगे हैं सेना अधिकारी

एनडीए पास करने का पत्र पहुंचा ताे बेटे की सफलता का पता लगा

गुढ़ागाैड़जी के रहने वाले दीपक कुमावत का नेवी में लेफ्टिनेंट पद पर चयन हुआ है। वे अपने परिवार के पहले सेना के अधिकारी बने है। इनके पिता दयानंद कुमावत गुढा में हार्डवेयर की दुकान चलाते हैं। एनडीए का परिणाम आने के बाद आए काॅल लेटर से परिवार काे इनके चयन का पता लगा।

दादा, पिता और ताऊ के बाद अब माेहित भी सेना में लेफ्टिनेंट बने
काली पहाड़ी के शेखावत परिवार की तीसरी पीढ़ी ने सेना से कॅरिअर शुरू किया है। माेहित सिंह सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। मोहित के दादा रंगपाल सिंह सेना में रहे हैं। उनके ताऊ दिनेश सिंह और पिता याेगेश सिंह ने सेना में जाने की परंपरा काे कायम रखा। माेहित ने बचपन से सेना में जाने का सपना देखा था।

पिता सेना में हवलदार रहे, बेटे ने अधिकारी बन किया सपना पूरा
ढाकाली में रहने वाले गंगाधर सिंह ढाका सेना में हवलदार पद पर रिटायर हुए। उनके मन में बड़ा अधिकारी बनने की तमन्ना थी। इस सपने काे उनके बेटे अभिषेक लेफ्टिनेंट बन पूरा किया। सैनिक नगर में रहने वाले अभिषेक बचपन से ही पिता के सपने काे पूरा करने की तैयारी में जुट गए।

पिता राेडवेज में चालक, बेटे ने लेफ्टिनेंट बन किया नाम रोशन

राणासर निवासी राेडवेज में चालक नरेंद्र झाझ़ड़िया के बेटा राैनक बचपन से ही सेना में अधिकारी बनना चाहता था। शुरू से ही तैयारी में जुट गए। बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद एनडीए का फार्म भरा और कड़ी मेहनत से उसमें पास हाे गए। अब प्रशिक्षण पूरा लेफ्टिनेंट बन गए।

दादा और पिता सेना में रहे, अब पाेता इंजीनियर कोर में बना लेफ्टिनेंट
लाखू के प्रवीण यादव सेना की इंजीनियर कोर में लेफ्टिनेंट बने हैं। इनके पिता सुरेंद्र यादव हवलदार के पद से रिटायर हाे चुके हैं। दादा हरचंद यादव सेना में सूबेदार रहे हैं। परिवार की परंपरा काे आगे बढ़ाने के लिए प्रवीण ने बचपन से तैयारी शुरू कर दी थी और सफलता हासिल की।

दादा के सपने को पौते अविनाश ने लेफ्टिनेंट बनकर पूरा कर दिखाया

हांसलसर के अविनाश मील सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। दादा रामजीलाल मील रिटायर प्रधानाचार्य है। पिता बाबूलाल मील बार संघ के अध्यक्ष हैं। दादा हमेशा से पाेते काे सेना की वर्दी में अधिकारी बना देखना चाहते थे। दादा के सपने काे पूरा करने के लिए अविनाश ने कड़ी मेहनत की और सपना पूरा किया।

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