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अब इंसाफ की बारी:ढाई साल की मासूम से दुष्कर्म के मामले में 63 पेज की चार्जशीट पेश, 26 गवाह बनाए, इनमें प्रत्यक्षदर्शी 10 वर्षीय मामा भी शामिल

नवलगढ़6 दिन पहले
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  • नवलगढ़ इलाके के बड़वासी में 21 मार्च को मां के मामा ने ही की थी दरिंदगी, पुलिस ने 17 दिन में पेश कर दिया चालान

नवलगढ़ के बड़वासी गांव में ढाई साल के मासूम के गुनहगार को जल्दी सजा दिलाने के लिए पुलिस ने घटना के 17 दिन बाद गुरुवार काे चालान पेश कर दिया। जांच अधिकारी डीएसपी सतपालसिंह ने यह चालान झुंझुनूं के पोक्सो न्यायालय में पेश किया है। इस मामले में आरोपी मासूम की मां का मामा है। इस कारण परिवार ने मुकदमा दर्ज नहीं करवाया था। पुलिस की ओर से पीड़ित परिवार की काउंसलिंग करने के बाद ही मासूम के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया था।

डीएसपी ने बताया कि 63 पेज की चार्जशीट है। पुलिस ने आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए हर सबूत जुटाने का प्रयास किया है। आरोपी के खिलाफ करीब 26 गवाह बनाए गए हैं, जिसमें पीड़िता का 10 वर्षीय मामा व 5 साल का बड़ा भाई भी शामिल है।

केस ऑफिसर नियुक्त
इस केस को केस ऑफिसर स्कीम में शामिल किया गया है। नवलगढ़ सीआई सुनील शर्मा को केस ऑफिसर नियुक्त किया गया है। इस केस को पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। इसमें फांसी की सजा तक का प्रावधान है।

चुनौती : नजदीकी रिश्तेदार होने के कारण मामला ही दर्ज नहीं करवा रहे थे परिजन
इस मामले में आरोपी परिवार का होने कारण पुलिस के सामने साक्षय जुटाने के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहले तो पीड़ित पक्ष ने मामला दबाने का प्रयास किया, लेकिन जब अामजन के बीच यह मामला आ गया तो किसी व्यक्ति ने इसकी सूचना दे दी। फिर पुलिस ने गुपचुप तरीके से इसका सत्यापन कराया। डीएसपी सतपालसिंह व सीआई सुनील शर्मा मौके पर पहुंचे और पूरी जानकारी जुटाई, तब मामले की सच्चाई सामने आई। पीड़ित बच्ची के माता-पिता ने दुष्कर्म का आरोपी परिवार का होने के कारण मुकदमा दर्ज कराने से इनकार कर दिया, इसके बाद पुलिस ने काउंसलिंग की, तब जाकर मुकदमा दर्ज हुआ।

पीड़िता का दो बार हो चुका है आॅपरेशन : दुष्कर्म की पीड़िता का अब तक दो बार ऑपरेशन हो चुका है। पीड़िता का अभी भी जयपुर के जेके लोन अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस लगातार पीड़िता के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ले रही है।

पीड़िता का 10 वर्षीय मामा है प्रत्यक्षदर्शी : दुष्कर्म के मामले में पीड़िता का 10 वर्षीय मामा घटना का प्रत्यक्षदर्शी है। पुलिस ने बयानों से पहले इसकी मनोचिकित्सक के सामने काउंसलिंग की गई, इसके बाद मनोचिकित्सक के सामने ही बयान दर्ज किए गए। इसके बाद बच्ची के पांच वर्षीय भाई की भी काउंसलिंग की गई। दुष्कर्म की घटना के बाद पीड़िता के परिजन बच्ची को गांव के मेडिकल स्टोर पर लेकर गए थे, लेकिन मेडिकल स्टोर संचालक ने उसे नवलगढ़ के राजकीय अस्पताल में भेज दिया गया, यहां पर आकर भी परिजनों ने बच्ची की मरहम पट्‌टी करवाई। इसके बाद पीड़िता के परिजन उसे वापस लेकर चले गए।

आरोपी ने पीड़िता के पिता को घर में घुसने नहीं दिया
इस मामले में आरोपी मासूम की मां का मामा है। पीड़िता का प्राथमिक इलाज कराने के बाद उसका पिता उसको घर लेकर गया, लेकिन आरोपी ने उनको घर में नहीं घुसने दिया। उसके साथ झगड़ना करने लगा। आरोपी ने कहा कि तुमको घर में नहीं घुसने दूंगा। जब गांव के लोगों को इस झगड़े की भनक लग गई, तो किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम में इसकी शिकायत कर दी। इसके बाद पुलिस ने सत्यापन करवाया।

जिस मेडिकल स्टोर से दवा लेने गए, वह भी गवाह
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने इस मामले में पीड़ित बच्ची के माता-पिता, मेडिकल स्टोर संचालक, पुलिसकर्मी, चिकित्साकर्मी, बच्ची का भाई व बच्ची के मामा को गवाह बनाया गया है। गांव के लोग इस मामले में दबी जुबां से चर्चा तो कर रहे थे, लेकिन कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आना चाहता था, इसलिए इस मामला पुलिस के लिए चुनौती भी बन रहा था। पुलिस ने लिए चार्जशीट पेश करना इतना आसान नहीं रहा। एसपी मनीष त्रिपाठी खुद पूरे मामले की मॉनिटरिंग करते रहे। पुलिस टीम चार्ज शीट में एफएसएल टीम की जांच रिपोर्ट व डीएनए को भी सबूतों में शामिल किया है।

पुलिस ने की पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद : इस मामले में पुलिस ने मानवता दिखाते हुए मासूम के माता-पिता की आर्थिक मदद भी है। परिवार का खर्चा भी पुलिस ने उठाया। पुलिस ने आर्थिक प्रतिकर के लिए आवेदन किया है। पुलिस ने कहा कि गरीब परिवार होने के कारण हर संभव मदद का भी भरोसा दिया।

मासूम का दो बार हो चुका ऑपरेशन, अस्पताल में भर्ती

मासूम के साथ दुष्कर्म 21 मार्च को उसकी ही मां के मामा ने दरिंदगी की। इसके ठीक पांच दिन पहले ही झुंझुनूं में पोक्सो कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में दरिंदे को फांसी की सजा सुनाई थी। भास्कर ने पहले ही दिन अपनी खबर में यह कहा था कि दरिंदे ने एक भी नहीं सोचा। क्योंकि वह मासूम का नाना है और ऐसे ही घिनौने काम के लिए ठीक पांच दिन पहले ही फांसी की सजा सुनाई थी।

यह घटनाक्रम
नवलगढ़ के बड़वासी गांव में ढाई साल की मासूम के साथ उसकी ही मां के मामा ने दुष्कर्म किया था। आरोपी नजदीकी रिश्तेदार होने के कारण परिवार ने मुकदमा दर्ज नहीं करवाया था। पीड़ित परिवार की काउंसलिंग के बाद बच्ची के पिता ने रिपोर्ट दी। 21 मार्च दिन में तीन- चार बजे बच्ची घर पर थीं। परिवार की महिलाएं मंदिर गई हुई थीं। अन्य सदस्य इधर-उधर थे। इस दौरान बच्ची की मां के मामा ने मासूम को अकेली देखकर दुष्कर्म किया। आरोपी बच्ची के रोने पर उसे छोड़कर भाग गया।

परिवार के सदस्य घर पहुंचे तो घटना की जानकारी मिली। आरोपी परिवार का सदस्य था। इसलिए बदनामी के डर से पिता ने पुलिस में रिपोर्ट नहीं लिखाई। पीड़ित मासूम की स्थिति खराब होने के कारण उसे थानाधिकारी ने नवलगढ़ अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इस दौरान मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। मामले में 30 साल के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

एसपी ने खुद की मॉनिटरिंग
पूरे मामले की मॉनिटरिंग खुद एसपी मनीष त्रिपाठी ने की। उन्होंने तत्काल अस्पताल पहुंचकर बच्ची के परिजनों से मुलाकात की। बच्ची को अच्छे इलाज के लिए जयपुर में भर्ती करवाया गया। साथ ही घटनास्थल का भी मौका मुआयना किया गया। एफएसएल की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर सबूत जुटाए।

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