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भरतपुर से रेस्क्यू किए तेंदुए को छोड़ा:एक और पैंथर छोड़ा गया मनसा माता कंजर्वेशन रिजर्व में, जिले में 15 से ज्यादा हुए तेंदुए

झुंझुनूं7 महीने पहले
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मनसा माता कंजर्वेशन रिजर्व में छोड़ा गया तेंदुआ। - Dainik Bhaskar
मनसा माता कंजर्वेशन रिजर्व में छोड़ा गया तेंदुआ।

उदयपुरवाटी के मनसा माता की पहाड़ियों में बघेरों की संख्या बढ़ने लगी है। सैनिक कल्याण मंत्री राजेंद्र गुढ़ा और डीएफओ आरके हुड्डा की टीम ने कल कदम कुंड से आगे एक और बघेरे को जंगल में आजाद किया। डीएफओ आर के हुड्डा ने बताया कि सरिस्का अभयारण्य की टीम ने दो दिन पहले भरतपुर से एक बघेरों को रेस्क्यू किया था। वन विभाग को इसे किसी सुरक्षित जंगल में छोड़ा था। मंत्री राजेंद्र गुढ़ा को इस बात की जानकारी मिली तो वन विभाग की टीमों से बात कर उन्होंने तेंदुए को मनसा माता कंजर्वेशन रिजर्व में छोड़ने के लिए राजी किया।

उसके बाद वन विभाग ने मनसा माता वन क्षेत्र में ही बघेरे को छोड़ने का तय किया। गौरतलब है कि राजेंद्र गुढ़ा पहले भी बघेरों को मनसा माता के जंगलों में छुड़वा चुके हैं। इस बार सरिस्का अभ्यारण की टीम बघेरे को लेकर उदयपुरवाटी पहुंची। बघेरे को छापोली होते हुए कदम कुंड से आगे जंगल में दूर तक मनसा की पहाड़ियों में लेकर गए। वहां टीम ने बघेरे को अंधेरे में आजाद कर दिया। इस मौके पर मंत्री गुड़ा डीएफओ आरके हुड्डा,दिनेश गुर्जर,दीनदयाल शर्मा,आनंद सिंह आदि मौजूद रहे ।

बघेरे ने किया रात में शिकार

डीएफओ आरके हुड्डा ने बताया कि देर रात बघेरे ने एक बकरी का शिकार किया। कदम कुंड के पास रहने वाले लोगों ने बताया कि देर रात बघेरे की काफी आवाजें सुनाई दी। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह जब देखा तो बकरी के शिकार के निशान मिले। डीएफओ आरके हुड्डा ने बताया कि मनसा माता कंजर्वेशन रिजर्व में तेंदुआ जल्दी फैमिलियर हो रहे है। जिले में तेंदुए की संख्या अब 15 से ज्यादा है। वहीं, इसके अलावा तेंदुए के कब्स भी मनसा माता कंजर्वेशन रिजर्व में देखे गए हैं।

खेतड़ी अभयारण्य और मनसा माता कंजर्वेशन रिजर्व को लेपर्ड सफारी पार्क बनाने की तैयारी शुरू

झुंझुनूं के उप वन संरक्षक राजेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि जिले में बढ़ते तेंदुए की संख्या से अब इनके देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी। इसके लिए खेतड़ी में अभयारण्य बनाने के लिए तेजी से कार्य चल रहा है। मनसा माता कंजर्वेशन रिजर्व को लेपर्ड कंजर्वेशन एरिया के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है । वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत राजस्थान सरकार ने 102.31 वर्ग किमी वन भूमि को वन्य जीवों के लिए संरक्षित किया था।

इस के लिए मनसा की पहाड़ियां, खोह बागोरा, कांकरिया मैन, धनावता, जैतपुरा, भोजगढ़, पौंख, किशोरपुरा सहित वन क्षेत्र इलाके में चारदीवारी बनाकर पेयजल व्यवस्था व अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। इस के लिए वन विभाग राजस्थान सरकार के द्वारा 18 नवंबर 2019 में मिली 10 वर्षीय प्रबंधन योजना को स्वीकृति के बाद अपना प्लान तैयार कर रहा है। खेतड़ी के बीलवा,उसरिया की ढाणी, समदेड़ा तालाब क्षेत्र, पांडेता भैरू मंदिर व अन्य क्षेत्र में तेंदुओं ने अपना टेरिटरी क्षेत्र बना लिया है।