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  • Devotees Reached The Annual Worship Of Rani Sati Temple, But Forgot The Corona Guidelines, Banned The Entry Of Devotees In Lohargal, Not Even Monitoring Here

कोरोना को निमंत्रण, भीड़ का हिस्सा बने:राणी सती मंदिर की वार्षिक पूजा में पहुंचे श्रद्धालु, लेकिन कोरोना गाइडलाइन भूले, लोहार्गल में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगाई, यहां निगरानी तक नहीं

झुंझुनूं22 दिन पहले
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भादवी अमावस्या पर मंगलवार को राणी सती मंदिर में वार्षिक पूजा होगी। अमावस्या दो दिन रहने से सोमवार को भी मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की भीड़ रही, इस दौरान श्रद्धालुओं से लेकर प्रशासन की ओर से कोरोना गाइड लाइन को लेकर लापरवाही सामने आई। मंदिर में अलग अलग राज्यों से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जिनमें से अधिकांश बिना मास्क के थे और दूरी का भी पालन नहीं किया गया।

सुबह छह बजे आरती के बाद मंदिर परिसर में प्रवासियों व स्थानीय श्रद्धालुओं का आना शुरू हुआ जो रात आठ बजे तक जारी रहा। सोमवार को सुबह 7.38 बजे अमावस्या शुरू हो गई थी, जो मंगलवार को सुबह 6.20 बजे तक रहेगी। सोमवार को पूरे दिन अमावस्या रहने से अधिकांश लोगों ने अमावस्या की पूजा सोमवार को ही कर ली। राणी सती मंदिर व खेमी शक्ति मंदिर में पूजा करने वालों की भीड़ रही।

राणी सती मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि मंदिर की वार्षिक पूजा मंगलवार को होगी। सुबह महामंगला आरती के बाद सुबह छह बजे से मंदिर में कोरोना गाइड लाइन की पालना करते हुए दर्शन के लिए रात आठ बजे तक खुला रहेगा। मंदिर में प्रवेश से पहले दर्शनार्थियों को कोविड वैक्सीनेशन की कम से कम एक डोज और मास्क लगा होना चाहिए। इधर, खेमी शक्ति मंदिर में सुबह छह बजे मंगल आरती के साथ ही पूजा-अर्चना शुरू हुई। पंडित रामनाथ शास्त्री के सानिध्य में आरती व पूजा के बाद दर्शनार्थियों ने पूजा की।

इसलिए उमड़े श्रद्धालु, दो साल में पहली बार वार्षिक पूजा में अनुमति
राणी सती मंदिर की वार्षिक पूजा में हर साल देश भर से श्रद्धालु आते हैं। पिछले साल कोरोना के कारण यह पूजा सांकेतिक ही हुइ थी और श्रद्धालुओं को इजाजत नहीं थी। इस साल कोरोना का असर कम होने से श्रद्धालुओं को आने की मंजूरी थी। कोरोना में पहली बार वार्षिक उत्सव पर मंदिर में दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह था, लेकिन इस उत्साह के सामने कई लोग कोरोना गाइडलाइन भूल गए। भीड़ में शामिल अधिकांश लोग बिना मास्क थे और दूरी का भी ध्यान नहीं रखा गया।

प्रशासन की लापरवाही : भीड़ पर कोई निगरानी नहीं रखी
कोरोना के कारण प्रशासन धार्मिक आयोजनों पर निगरानी रखता आया है। हाल ही में होने वाली 24 कोसीय परिक्रमा को भी स्थगित किया गया है। इसके साथ ही लोहार्गल में भीड़ जुटने और अस्थियों के विसर्जन पर भी रोक है। प्रशासन को चाहिए था कि वह वार्षिक पूजा में आने वाले श्रद्धालुओं के इंतजाम और कोरोना गाइडलाइन की निगरानी रखता, लेकिन इस तरह की कोई पहल प्रशासन की ओर से नहीं की गई। नतीजा श्रद्धालु भी बेरोकटोक लापरवाही के साथ वार्षिक पूजा में पहुंचे।

प्रशासन को उठाने चाहिए थे यह कदम

  • मंदिर में मुख्य गर्भ गृह तक पहुंचने से पहले प्रवेश द्वार से लेकर मंदिर तक काफी जगह है। प्रशासन को चाहिए था कि श्रद्धालुओं को टैंट लगाकर जगह जगह रोका जाता।
  • दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का ग्रुप बनाकर उनके मास्क चैक कर दूरी के साथ ही अंदर भेजा जाता। जिनके पास मास्क नहीं थे उन्हें उपलब्ध करवाने चाहिए थे
  • इस बार अमावस दो दिन है। प्रशासन इस बात से बेखबर ही रहा कि मंदिर में सोमवार को भी भीड़ जुट सकती है। ऐसे में प्रशासन ने ज्यादा तैयारी भी नहीं की।
  • अगले कुछ दिन और मंदिर में श्रद्धालु आयेंगे। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह पूरे इंतजामों के बीच गाइडलाइन के साथ श्रद्धालुओं को दर्शन करवाए।

सीधी बात- यूडी खान, कलेक्टर झुंझुनूं

हमने इंतजाम किए थे
राणी सती मंदिर में वार्षिक पूजा में कई राज्यों से श्रद्धालु आए, लेकिन कोरोना गाइड लाइन का पालन नहीं किया गया।हमने इसके पूरे इंतजाम किए थे, एसडीएम और पुलिस टीम को तैनात किया गया था।लोहार्गल में अस्थि विसर्जन पर भी रोक है और परिक्रमा पर भी। यहां निगरानी तक नहीं थी।लोग सहुलियत के साथ दर्शन कर सकें और गाइडलाइन भी ना टूटे इसके निर्देश दिए गए थे। संबंधित अधिकारियों को पुन: कहा जाएगालोगों की आस्था है। इसलिए वे आए हैं, लेकिन प्रशासन की अनदेखी से उन्हें भी लापरवाही का मौका मिला। कल से हम इस व्यवस्थ में और सुधार करेंगे।

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